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अस्पतालों में एंटी फंगल दवाएं नहीं:डॉक्टरों का सवाल- कब तक पानी पिलाकर वार्ड में रखें ब्लैक फंगस के मरीजों को ?

इंदौरएक महीने पहले
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प्रदेश में अस्पतालों को देने के लिए एंटी फंगल दवाएं नहीं, अकेले एमवाय को ही लायपोसोमल एम्फोसिटीरिन-बी की रोज कम से कम 150 वायल चाहिए। - Dainik Bhaskar
प्रदेश में अस्पतालों को देने के लिए एंटी फंगल दवाएं नहीं, अकेले एमवाय को ही लायपोसोमल एम्फोसिटीरिन-बी की रोज कम से कम 150 वायल चाहिए।

शहर के विभिन्न अस्पतालों में शनिवार को ब्लैक फंगस के 125 से ज्यादा मरीज भर्ती हुए। एमवाय में तो हाल यह हुए कि इन मरीजों के लिए नया वार्ड खोलना पड़ा। दो दिन पहले वहां 18 मरीज थे, जो अब बढ़कर 29 हो गए हैं। एंटी फंगल दवाएं खत्म हो गई हैं। डॉक्टर्स ने सवाल उठाया है कि ऐसे में मरीजों को कब तक पानी पिला-पिला कर वार्ड में भर्ती रख पाएंगे।

शहर के हर ईएनटी डॉक्टर के पास रोज औसत दो मरीज पहुंच रहे हैं। एमवाय में इस बीमारी से पीड़ित पांच मरीजों की मौत हो चुकी है और निजी में भी पांच की मौत की खबर है। डॉक्टर्स का कहना है कि ब्लैक फंगस के मरीजों का दो तरह का इलाज होता है, एक सर्जिकल और दूसरा मेडिकल।

सर्जिकल में जिनकी नाक में कोई गांठ बन गई है या गले में स्पॉट बन गए हाे अथवा ब्रेन में कुछ कोई दिक्कत आ रही हो तो उसे हटाया जा सकता है, परंतु एंटी फंगल दवाएं नहीं होने से उनका मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है। उन्हें दूसरी दवाइयां दी जा रही हैं, जो उतनी कारगर नहीं हैं।

फंगस इन्फेक्शन के उपचार के लिए दो हफ्ते तक दवाई देने की जरूरत होती है। अकेले एमवाय को ही लायपोसोमल एम्फोसिटीरिन-बी की रोज कम से कम 150 वायल चाहिए। प्लेन एम्फोसिटीरिन मिली तो उसकी भी 35 वायल की रोज जरूरत होगी।

एमवाय में बनाना पड़ा नया वार्ड, 20 मई के बाद दवा मिलने की उम्मीद

कमेटी करेगी जांच, लोग कैसे हुए ब्लैक फंगस के शिकार

संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने एक कमेटी गठित की है, जिसके औपचारिक आदेश रविवार सुबह जारी होंगे। डॉ. शर्मा ने बताया कि कमेटी शहर के प्रमुख चार-पांच अस्पतालों में भर्ती सौ मरीजों की केस स्टडी करेगी। कमेटी 24 से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट देगी, इससे पता चलेगा कि इन मरीजों को यह बीमारी होने की मुख्य वजह क्या रही।

डॉक्टर बीमारी से बचाव के लिए कैसे प्रोटोकाल बना सकते हैं। डॉ. संजय लोंढ़े का कहना है कि इसके प्रारंभिक लक्षण आंख के पास दर्द, चेहरे का दर्द, सुन्नपन, बुखार, दुर्गंधयुक्त स्वाद, नाक से नीला रक्त निकलना, साइनस आदि हैं।

मुंबई, पुणे, दिल्ली में भी तेजी से बढ़ रहे मरीज
दवा डीलर मनोज राय और डॉ. मकरंद शर्मा ने बताया कि कंपनियों को ऑर्डर दिए हुए हैं, राशि भी एडवांस जमा करा दी है। बताया जा रहा है कि 20 मई के बाद ही इनकी आपूर्ति हो सकेगी, क्योंकि इंदौर के साथ ही मुंबई, पुणे, बेंगलुरू, दिल्ली में भी इस तरह के मरीज तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके चलते मांग पूरे देश में बढ़ गई है। उधर, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दवाओं के लिउ सनफार्मा के मालिक से बात भी की है।

शासन को पत्र लिख मांगी दवाएं

हमारे पास ईएनटी, ऑफ्थेमोलॉजिस्ट और न्यूरो की पूरी टीम है, जो मरीजों का इलाज कर रही है। एंटी फंगल दवाओं के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। -डॉ. वीपी पांडे, एचओडी मेडिसिन, एमजीएम कॉलेज

बीमारी जल्दी पकड़ने की कोशिश करेंगे

अब सभी कोरोनों पीड़ितों की ओरल जांच अनिवार्य कर दी है। डेंटिस्ट भी उनकी जांच करेंगे, ताकि प्रारंभिक स्थिति में पता चल जाए और बीमारी बढ़े नहीं।- डॉ. संजय दीक्षित, डीन एमजीएम कॉलेज

जल्द उपलब्ध कराएंगे जरूरी दवाएं

यह संकट अचानक सामने आया है। दवा और इंजेक्शन को लेकर मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के संपर्क में हूं। जल्द ही इंजेक्शन, दवाएं उपलब्ध कराएंगे।- तुलसी सिलावट, कोविड प्रभारी मंत्री

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