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पेयजल कितना साफ?:जमीन के दो गज नीचे ड्रेनेज का मकड़जाल, नर्मदा लाइनों के साथ 95% बोरिंग में मिल रहा सीवरेज

इंदौर5 दिन पहलेलेखक: दीपेश शर्मा
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80 फीट गहरा कुआं आधे से ज्यादा ड्रेनेज के पानी से भरा है। यह ड्रेनेज रिसकर आया है - Dainik Bhaskar
80 फीट गहरा कुआं आधे से ज्यादा ड्रेनेज के पानी से भरा है। यह ड्रेनेज रिसकर आया है
  • 30 साल में 4 मास्टर प्लान बने, करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन ड्रेनेज मिलना बंद नहीं हुआ
  • 100 से ज्यादा कॉलोनियों में नर्मदा लाइन में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायतें हैं

शहर की सरस्वती और कान्ह नदी के साथ छह नालों की सफाई के बहाने इंदौर की जमीनी गंदगी अब बाहर आने लगी है। सरस्वती नदी के आउट फॉल बंद करने के दौरान सीवरेज आने की पड़ताल भास्कर ने शुरू की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। इंदौर में ड्रेनेज के प्लान के नाम पर अलग ही तरह के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। यहां के अफसर ड्रेनेज का नया प्लान यह कहकर बनवाते हैं कि पुरानी लाइनें बेकार हैं या बंद हैं। जबकि उन लाइनों से बहता सीवरेज शहर अधिकांश बोरिंग को प्रदूषित कर चुका है।

एक्सपर्ट कि मानें तो शहर के 95 प्रतिशत बोरिंग के पानी में बिकौली बैक्टिरिया तय मात्रा से कहीं ज्यादा है, जो पीने योग्य नहीं माना जाता। बोरिंग से झाग आने और बदबूदार पानी की कई शिकायतें हैं। इसके अलावा शहर की 100 से ज्यादा कॉलोनियों में नर्मदा लाइन में ड्रेनेज का पानी आने की शिकायत है। नदियां भले ही साफ हो जाएंगी, लेकिन जमीन के अंदर और बोरिंग तक ड्रेनेज का पानी पूरी तरह फैल गया है। यह एक या दो साल की लापरवाही से नहीं हुआ, बल्कि पिछले 30 साल में बने चार से ज्यादा मास्टर प्लान और उन पर अमल नहीं करने का नतीजा है। अभी भी इस आदत को नहीं बदला गया तो इंदौर में पानी से जुड़ी बीमारी फैलने का खतरा बना रहेगा।

32 करोड़ रुपए में नदी किनारे डाली लाइन बाद में भूल गए
1990 के दशक में इंग्लैंड की टीम ने इंदौर का दौरा किया था। इसके बाद ओवरसीज डेवलपमेंट अथॉरिटी (ओडीए) के जरिए आईडीए ने 32 करोड़ की लागत से नदी किनारे पाइप डाले थे। इसका उद्देश्य बस्तियों को ड्रेनेज लाइन से जोड़ने का था, ताकि नदी किनारे पाइप होने से लीकेज होने पर बंद करना आसान होगा। इस लाइन के जब चैंबर डाले जा रहे थे तब लालबाग के पास चैंबर धंसने से एक मजदूर की मौत हो गई। उसके बाद पूरा प्रोजेक्ट ही बंद हो गया। आज भी भागीरथपुरा नाले के पास इस लाइन के मोटे पाइप देखे जा सकते हैं।

चंद्रभागा में नाला टैपिंग फेल, बिगड़ी इंजीनियरिंग से रिवर्स आ रहा है पानी
जूनी इंदौर क्षेत्र में चंद्रभागा ब्रिज के आउट फॉल निगम ने बंद कर दिए लेकिन लोगों के लिए नई समस्या खड़ी हो गई है। बिना तकनीकि ज्ञान और लेवल मिलान के डाली लाइन से पानी रिवर्स में आ रहा है। पूर्व पार्षद रश्मि वर्मा ने बताया जूनी गणेश मंदिर का उल्टा पानी आ रहा है। निगम के इंजीनियरों के पास ड्रेनेज का कोई नक्शा नहीं था। चेंबर नहीं मिल रहे थे तो सड़क खोद-खोदकर ढूंढा।

40 लाख में 800 नक्शों का प्लान बना, नगर निगम को पता ही नहीं कहां गया
1998 में पुणे की कंपनी वाटसन गोमरी को इंदौर में ड्रेनेज का मास्टर प्लान बनाने का जिम्मा सौंपा गया। 2004-05 में यह प्लान तैयार हो सका। तब इंदौर नगर निगम के इंजीनियर्स बोर्ड में शामिल आर्किटेक्ट अतुल सेठ बताते हैं कि कंपनी को इस प्लान के लिए 40 लाख का भुगतान किया गया था। कंपनी ने पूरे इंदौर के ड्रेनेज की ड्राइंग को 800 टेबल आकार के नक्शों पर समेट दिया था। इसकी समरी 25 पन्नों की थी। भास्कर ने इन नक्शों की जानकारी लेने के लिए निगम के ड्रेनेज विभाग के कार्यपालन यंत्री सुनील गुप्ता से बात की तो उन्होंने बताया नक्शे पीएचई में हो सकते हैं। पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव ने बताया ये नक्शे 2012 में निगम में भेज दिए थे। न नक्शों का पता और न समरी का चला।

1900 किमी लाइनों को किया जा रहा ट्रेस इसमें 550 किमी कॉलोनियों की लाइन
निगम ने तीन साल पहले ड्रेनेज का पूरा नेटवर्क फिर से सर्च करवाने के लिए डीआरए को काम सौंपा है। सीवरेज और पानी के नेटवर्क की जियो मैपिंग के लिए 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। इसमें जोन स्तर पर ड्रेनेज लाइन की जियो मैपिंग करवाई जा रही है। इसमें 550 किमी की प्रमुख लाइनों को मिलाकर कॉलोनियों के नेटवर्क की कुल 1900 किमी की लाइनों को ट्रेस किया जा रहा है। इसमें भी कंपनी के अधिकारियों ने जोन स्तर से उन लाइनों को ही मैप पर लिया जो स्थानीय दरोगा द्वारा बताई गई।

ड्रेनेज से भर गया कुआं, वाटर हार्वेस्टिंग कराने वाली कंपनी ने खोली पोल
2019 में निगम ने भूजल का लेवल बढ़ाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग का प्रोजेक्ट शुरू किया था। निगम की तरफ से यह प्रोजेक्ट संचालित करने वाली एनजीओ नागरथ ट्रस्ट के सुरेश एमजी ने बताया 16 हजार से ज्यादा स्थानों पर वाटर रिचार्जिंग करवाई गई। लगभग सभी स्थानों पर लोगों ने बोरिंग के पानी में बदबू आने की शिकायत की। ऐसा एक भी स्थान नहीं मिला जहां बोरिंग के पानी को बिना आरओ ट्रीटमेंट कर पिया जा सकता हो। अनुराधानगर का ही उदाहरण सामने आया। यहां कॉलोनी के 80 फीट गहरे कुएं में ड्रेनेज का पानी भरा है और भूजल इतना प्रदूषित हो चुका है कि लोगों के यहां बोरिंग से झाग वाली पानी निकलता है। आरओ के बाद भी पानी की बदबू नहीं जाती।

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