MP में सबसे ज्यादा बरसा​​​​​​​ अरब सागर वाला मानसून:निमाड़ और भोपाल-नर्मदापुरम में सामान्य से ज्यादा बारिश; जानिए कहां कम गिरा पानी...

शैलेष दीक्षित/इंदौर7 महीने पहले
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जोरदार बारिश से मध्यप्रदेश का अधिकतर हिस्सा तर और तृप्त दिख रहा है। मालवा के डैम, नदियां और झरने सब अपने शबाब पर हैं। मंगलवार और बुधवार को भारी बारिश से इंदौर का यशवंत डैम, सिरपुर का तालाब, उज्जैन का गंभीर डैम सहित प्रदेश के ज्यादातर डैम और तालाब ओवरफ्लो हो गए। नर्मदा, शिप्रा, कालीसिंध सहित सभी नदियां उफान पर हैं। वहीं रतलाम के सैलाना स्थित केदारेश्वर झरना बेहद खूबसूरत हो गया है। दैनिक भास्कर की टीम ने ड्रोन कैमरे से डैम और उफनती नदियों को कैप्चर किया।

आगे बढ़ने से पहले आप VIDEO क्लिक देख सकते हैं मालवा-निमाड़ और भोपाल बेल्ट के झरने, बांधों की खूबसूरती...

प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी है, लेकिन अभी भी 26 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। निमाड़ और भोपाल-नर्मदापुरम प्रदेश का ऐसा बेल्ट है जहां सभी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। मालवा में भी 11 में से 9 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश है। सागर-बुंदेलखंड और विंध्य महाकौशल बारिश में पिछड़ गए हैं। दमोह में तो सामान्य से आधी ही बारिश हो पाई है।

मध्यप्रदेश में आधा सूखा, आधा तर, ऐसा क्यों
माना जा रहा है कि अरब सागर की तरफ से आने वाला मानसून इस बार ज्यादा एक्टिव हो गया है। यह मानसून बुरहानपुर, बड़वानी के रास्ते आता है और इंदौर समेत पूरे मालवा-निमाड़ में बरसता है। इन्हीं इलाकों में इस बार सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वे बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल के हैं। ये वे इलाके हैं जो बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून पर निर्भर हैं। जंगल और पहाड़ अधिक होने से यहां अमूमन ज्यादा बारिश होती रही है और मप्र का चेरापूंजी, लांजी भी इसी क्षेत्र में आता है। इस बार यह पूरा इलाका बारिश में पिछड़ता दिख रहा है।

यह बात ऐसे भी प्रमाणित हो रही...
इस बार बंगाल की खाड़ी के बजाय अरब सागर से आने वाला मानसून ज्यादा बरस रहा है, इसकी एक प्रमाणिकता छिंदवाड़ा से भी साबित होते दिख रही है। चूंकि विंध्य महाकौशल में इकलौता छिंदवाड़ा ऐसा इलाका है जहां अरब सागर का मानसून भी पहुंचता है, वहां पूरे विंध्य महाकौशल में सबसे ज्यादा 150% से ज्यादा बारिश हुई है। बाकी सभी जिले इसके आसपास भी नहीं हैं।

इसी तरह भोपाल, नर्मदापुरम में भी अच्छी बारिश हुई है। इस इलाके में हरदा, बैतूल, राजगढ़ जैसे कई जिले ऐसे हैं, जहां अरब सागर का मानसून पहुंचता है।

ऐसे समझें मालवा में बारिश की स्थिति।
ऐसे समझें मालवा में बारिश की स्थिति।

एनालिसिस के बाद देखिए इलाकेवार कैसे बंट गई बारिश

मालवा : सबसे ज्यादा बारिश देवास में
मालवा के जिलों में सबसे कम बारिश राजस्थान-गुजरात से सटे जिलों में रिकॉर्ड की गई। यहां के जिलों में सबसे ज्यादा सूखा अलीराजपुर है। यहां अब तक 66% ही बारिश हुई है। जबकि रतलाम, धार, मंदसौर में 90% से ज्यादा बारिश हो चुकी है। सबसे ज्यादा 155% बारिश देवास में हुई है। इसके बाद शाजापुर में 124% बारिश दर्ज की गई है।

निमाड़ : अरब सागर के मानसून ने किया तृप्त
निमाड़ के चारों जिलों बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन और बड़वानी में औसत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। बुरहानपुर में 159% बारिश रिकॉर्ड की गई है। निमाड़ को मध्यप्रदेश में अरब सागर से आने वाले दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह मानसून यहीं से प्रदेश में एंट्री करता है।

ग्वालियर-चंबल : राजस्थान से सटे इलाके तर, बाकी में पिछड़े
यहां सबसे ज्यादा बारिश राजस्थान से सटे श्योपुरकलां (राजस्थान से लगा हुआ) में 141% दर्ज की गई। गुना, ग्वालियर और भिंड में भी औसत से अधिक बारिश हो चुकी है। इस क्षेत्र के अशोक नगर, मुरैना और शिवपुरी में भी अगस्त माह में औसत बारिश का कोटा पूरा हो सकता है।

ऐसे समझें ग्वालियर-चंबल में बारिश की स्थिति।
ऐसे समझें ग्वालियर-चंबल में बारिश की स्थिति।

विंध्य-महाकौशल : बंगाल की खाड़ी के मानसून के कम बरसने का असर
यहां के 15 जिलों में से सबसे ज्यादा बारिश छिंदवाड़ा में रिकॉर्ड की गई है। यहां 165 प्रतिशत बारिश अब तक हो चुकी है। इसके बाद सिवनी में 131% बारिश हुई है। इस क्षेत्र के सर्वाधिक सूखे जिलों में शहडोल, नरसिंहपुर, अनूपपुर, बालाघाट और जबलपुर हैं।

ऐसे समझें विंध्य-महाकौशल में बारिश की स्थिति।
ऐसे समझें विंध्य-महाकौशल में बारिश की स्थिति।

बुंदेलखंड : यूपी बॉर्डर से लगे इलाके में एक्टिव नहीं दिख रहा मानसून
प्रदेश का सबसे ज्यादा सूखा हिस्सा बुंदेलखंड का है। उप्र से सटे इस क्षेत्र के एक भी जिले में सामान्य बारिश भी नहीं हुई। हालांकि दो जिले निवाड़ी और सागर शत-प्रतिशत के करीब हैं। यहां सबसे कम दमोह में बारिश हुई है।

ऐसे समझें बुंदेलखंड में बारिश की स्थिति।
ऐसे समझें बुंदेलखंड में बारिश की स्थिति।

भोपाल-नर्मदापुरम : सबसे ज्यादा बारिश यहीं, अधिकतर जिलों में सामान्य से डेढ़ गुना बारिश

8 जिलों में ही सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। बैतूल में सबसे ज्यादा 168 प्रतिशत बारिश हुई है। यह प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है। इसके बाद भोपाल में 167 और नर्मदापुरम व सीहोर में 138% बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। मप्र में घने जंगल समेत टाइगर रिजर्व इसी इलाके में आते हैं।

ऐसे समझें भोपाल-नर्मदापुरम में बारिश की स्थिति।
ऐसे समझें भोपाल-नर्मदापुरम में बारिश की स्थिति।

अब खूबसूरत फोटोज में प्रदेश में बरसे मानसून की सैर

रतलाम के नजदीक विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच केदारेश्वर महादेव मंदिर में झरना पूरे वेग से बहने लगा।
रतलाम के नजदीक विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच केदारेश्वर महादेव मंदिर में झरना पूरे वेग से बहने लगा।
उज्जैन में रामघाट पर शिप्रा नदी के किनारे बने मंदिर पानी में डूब गए। उज्जैन-बड़नगर पुल भी बंद हो गया।
उज्जैन में रामघाट पर शिप्रा नदी के किनारे बने मंदिर पानी में डूब गए। उज्जैन-बड़नगर पुल भी बंद हो गया।
इंदौर का पातालपानी का झरना भी बहने लगा है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
इंदौर का पातालपानी का झरना भी बहने लगा है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

भोपाल में 10 घंटे में 1 इंच बारिश
राजधानी में गुरुवार सुबह से ही रिमझिम और तेज बारिश का दौर जारी है। इससे डैम ओवरफ्लो हो गए हैं। केरवा, कलियासोत और भदभदा डैम के 1-1 गेट खोल दिए गए हैं। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में गुरुवार को सुबह साढ़े 8 से शाम साढ़े 5 बजे के बीच शहर में 1 इंच बारिश हुई। जबकि सीजन में अब तक 37 इंच बारिश हो चुकी है। इससे पहले बुधवार रातभर बारिश होती रही। जिससे शहर के कई इलाकों में पानी भर गया।

भारी बारिश के कारण केरवा डैम के गेट खोले गए।
भारी बारिश के कारण केरवा डैम के गेट खोले गए।

जबलपुर में भी भारी बारिश जारी
नर्मदा नदी के कैचमेंट में तेज बारिश का दौर जारी है। इससे नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। जबलपुर से 22 किलोमीटर दूर स्थित बरगी डैम भी लबालब होने को है। डैम में पानी का स्तर 417.70 मीटर हो चुका है। जो फुल रिजरवायर लेवल से महज 4 मीटर कम है। यहां बता दें डैम का फुल रिजरवायर लेवल 421 मीटर है। प्रदेश में हो रही बारिश के चलते ऐसा अनुमान है कि अगले एक-दो दिन नर्मदा नदी के कैचमेंट में बारिश की रफ्तार यही रही तो 15 अगस्त को डैम के गेट खोले जा सकते हैं।

जबलपुर में नर्मदा लबालब। लगातार बढ़ रहा जलस्तर।
जबलपुर में नर्मदा लबालब। लगातार बढ़ रहा जलस्तर।

तवा डैम के धीरे-धीरे गेट किए जा रहे बंद
नर्मदापुरम जिले के तवा डैम के 13 गेट में से गुरुवार शाम को केवल 3 गेट से ही पानी छोड़ा जाते रहा। जबकि बुधवार को डैम के सभी 13 गेट खोलने की स्थिति बनी थी। डैम के कैचमेंट एरिए पचमढ़ी, बैतूल में लगातार बारिश और सतपुड़ा डैम से पानी छोड़ने की वजह से तवा डैम में जलस्तर बढ़ते रहा। जिस कारण सभी गेट 10-10 फीट तक खोले गए। गुरुवार सुबह 6 बजे 6 गेट बंद किए गए। 12 बजे के बाद 3 गेट ओर बंद किए गए। गुरुवार रात 8 बजे 3 गेट 5 फीट तक खुले रहे। जिससे 23385 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा। तवा डैम का जलस्तर 1166 फीट है। वर्तमान में 1158.3फीट जलस्तर बना हुआ है।

आगे क्या
मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में मानसून पूरी तरह से फिर से एक्टिव हो चुका है, ऐसे में अभी अगले एक दो दिन तक मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से नदी नाले फिर से उफान पर हैं, ऐसे में प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे गांवों को लेकर अलर्ट भी जारी किया है।