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कोरोना के कारण 50 साल पुरानी परंपरा पर लगा ब्रेक:इस साल शहर काजी को बग्गी में बिठाकर नहीं लेकर जा पाए ईदगाह, बोले - दिल में पीड़ा है, पर अगले साल फिर आएगी खुशहाली

6 महीने पहले
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सलवाड़िया परिवार इस ईद पर शहर काजी डॉ. इशरत अली को बग्घी पर बिठाकर ईदगाह पर नमाज अता कराने नहीं लेकर जा पाया। - Dainik Bhaskar
सलवाड़िया परिवार इस ईद पर शहर काजी डॉ. इशरत अली को बग्घी पर बिठाकर ईदगाह पर नमाज अता कराने नहीं लेकर जा पाया।

कोरोना ने इंदौर में कौमी एकता की परंपरा पर ब्रेक लगा दिया। जनता कर्फ्यू के कारण मीठी ईद पर रिजर्व फोर्स अपनी 50 वर्ष पुरानी परंपरा को निभा नहीं पाया। सलवाड़िया परिवार इस ईद पर अपनी पारंपरिक बग्घी से शहर काजी डॉ. इशरत अली को उनके निवास स्थान राजमोहल्ला से सदर बाजार ईदगाह पर नमाज अता कराने नहीं लेकर जा पाया। हालांकि परंपरा निभाने सलवाड़िया परिवार शहरकाजी के घर पहुंचा और उनका स्वागत कर उन्हें ईद की बधाई दी। सलवाड़िया ने कहा कि परंपरा नहीं निभा पाने की पीड़ा उनके दिल में है, लेकिन आने वाले साल जरूर खुशहाली आएगी और वे इस परंपरा को फिर से निभाएंगे।

सत्यनारायण सलवाडिया ने घर पहुंचकर मुंह मीठा करवाया।
सत्यनारायण सलवाडिया ने घर पहुंचकर मुंह मीठा करवाया।

रिजर्व फोर्स के संयोजक सत्यनारायण सलवाडिया ने बताया कि मेरे पिता स्व. रामचंद्र सलवाडिया ने 50 वर्ष पहले ईद पर कौमी एकता परंपरा की शुरुआत की थी। शहर काजी को मीठी ईद पर उनके घर से बग्गी पर बिठाकर सदर बाजार ईदगाह तक लेकर जाते थे। उस वक्त शहर काजी डॉ. याकूब अली थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैं शहर काजी डॉ. इशरत अली को अपनी बग्गी में बिठाकर सदर बाजार ईदगाह तक ले जाता हूं। कोराेना के कारण जनता कर्फ्यू लगा है, ऐसे में इस वर्ष शहर काजी को बग्गी में बिठा कर ईदगाह तक नहीं लेकर जा पाया।

सलवाड़िया सुबह शहर काजी डॉ. इशरत अली के घर पहुंचे। उन्होंने 50 साल की अपनी परंपरा को निभाते हुए उन्हें फूल माला पहनाकर उनका मुंह मीठा कर उन्हें ईदुल फितर की मुबारकबादी दी। सलवाड़िया ने कहा कि आज दिल में पीड़ा है कि 50 साल पुरानी परंपरा पर विराम लग गया है। आज का दिन हमारे परिवार के सबसे खुशी का दिन होता था, जब सामाजिक सौहार्द का नमूना पेश होता था। आज इस परंपरा को विराम जरूर लगा है, लेकिन अगले साल फिर खुशहाली आएगी और फिर हम अपनी परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।