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MPPSC इंटरव्यू के टिप्स:इंटरव्यू रूम के अंदर जाते ही झलके आपका कॉन्फिडेंस, आंसर ऐसा दें कि उससे दूसरा प्रश्न न बने

इंदौर7 महीने पहले

2019 मेन्स का रिजल्ट आने के बाद MPPSC एस्पिरेंट्स इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं। इंटरव्यू में सवालों के जवाबों से ही एस्पिरेंट्स का भविष्य तय होगा। इंटरव्यू में कैसे सवाल पूछे जाते हैं? इनका कैसे जवाब देना है। किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है, ये सब हम जानेंगे एमपीपीएससी इंटरव्यू बोर्ड के पूर्व सदस्य सेवानिवृत्त कर्नल मनोज बर्मन (मार्गदर्शक, फोर्स डिफेंस एकेडमी) से...

एक्सपर्ट रिटा. कर्नल मनोज बर्मन ने कहा कि कई बार होता है कि जितने पदों के लिए चयन होना है, उससे ज्यादा एस्पिरेंट्स को बुलाया जाता है। उदाहरण के तौर पर 500 पद हैं, तो ढाई हजार ऐस्पिरेंट्स को बुलाया है। इसमें यह तय है कि दो हजार एस्पिरेंट्स का चयन नहीं होना है, फिर चाहे उन्होंने कितनी भी तैयारी की हो। एस्पिरेंट्स कभी मन में ये न लाए कि वह असफल हुए हैं। वह बहुत सफल है, उन्होंने लाखों अभ्यर्थियों के बीच एग्जाम क्लियर कर यहां तक का सफर तय किया है।

एस्पिरेंट्स इंटरव्यू की तैयारी घर से या कोचिंग से करता है। उनका पहला कदम है फॉर्म भरना। कई बार एस्पिरेंट्स बिना सोचे समझे पद भर देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। सोच समझकर पदों का चयन करें। यहां सबसे ऊंचा पद है डिप्टी कलेक्टर का है। इसके लिए एस्पिरेंट्स को थ्योरी में 1400 में से 900 नंबर का स्कोर करना होता है। इंटरव्यू 175 नंबर का होता है। इंटरव्यू के ये 175 नंबर इसलिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि इसमें अच्छा परफॉर्म करने से ही स्कोर और अच्छा हो सकता है।

विपरीत परिस्थिति में दबाव झेलने में सक्षम हो या नहीं
उन्होंने कहा कि इंटरव्यू ओपन फोरम है। इसकी कोई किताब नहीं है, जिसे पढ़कर यह कह दें कि आप इंटरव्यू के लायक हो गए। इंटरव्यू एक सूटेबिलिटी टेस्ट है। यहां देखा जाता है कि आप पढ़ने लिखने में तो अच्छे हैं, लेकिन जो भी सिविल सर्विसेस है, उसमें चयनित लोगों को फील्ड में जाकर काम करना होता है। उस काम को करने में बहुत से दायित्व होते हैं। कई बार बाढ़, आग, दंगा जैसी घटना हो जाती है। ऐसे में एस्पिरेंट्स इस तरह के दवाब को झेलने में सक्षम है या नहीं ये देखा जाता है। सामान्य तौर पर नौकरी की बात करें, तो सभी के मन में 10 से 5 बजे तक काम करने की छवि बनी है, लेकिन प्रशासनिक सेवा के अधिकारी का कोई समय नहीं वह 24 घंटे का है।

रूम में एंट्री के साथ ही देखते हैं कॉन्फिडेंस
एक्सपर्ट रिटा. कर्नल मनोज बर्मन ने बताया कि एस्पिरेंट्स के इंटरव्यू रूम के अंदर आते ही पहले उसका कॉन्फिडेंस देखा जाता है। वह रूम में आने के बाद किस प्रकार का व्यवहार कर रहा है। उसने कैसी ड्रेस पहनी है। अधिकतर बार होता है कि इंटरव्यू रूम में आते ही एस्पिरेंट्स घबरा जाते हैं। वह अपना नाम तक नहीं बता पाते। प्रशासनिक अफसर बनने के बाद उन्हें जीवन में कई बार बड़े-बड़े नेताओं, मंत्रियों के सामने जाना पड़ेगा। उनके सामने खड़े होकर सही या गलत समझाना पड़ेगा। यहां देखा जाता है कि विपरीत परिस्थिति में वह मानसिक रूप से ऐसी स्थिति सामने करने के लिए समक्ष है या नहीं। इंटरव्यू में कॉन्फिडेंस, ड्रेस, व्यवहार आदि बातों को देखा जाता है।

इन प्रश्नों से होती है शुरुआत
उन्होंने बताया कि एस्पिरेंट्स की योग्यता परखने के लिए उसके द्वारा जिस भी विषय में पढ़ाई पूरी की गई होती है, उससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आपने कब सोचा कि आपको प्रशासनिक सेवा में जाना है? ऐसे प्रश्नों का एस्पिरेंट्स के पास एक समुचित उत्तर होना चाहिए। सवालों के जवाब ऐसे हो कि पहले एस्पिरेंट खुद उस पर विश्वास करें। सबसे महत्वपूर्ण है जब आप प्रश्न का उत्तर दें, तो ऐसा कुछ न कहें कि उस उत्तर से फिर प्रश्न बने।

कई बार अभ्यर्थी कुछ सवाल के जवाब नहीं दे पाता है, लेकिन एक सवाल के जवाब में ज्यादा बोलने लगता है, ऐसा न करें। उस उत्तर को भी सीमित रखें। कभी भी घबराए नहीं, भाषा का ध्यान रखें। सबसे बड़ी बात इंटरव्यू के दौरान ध्यान रखने की है कि जब भी आपसे प्रश्न पूछा जाए तो उस प्रश्न पर धैर्य के साथ विचार करके अपना उत्तर दे। उत्तर को भी किस आयाम से और कैसे बताएं, यह भी विचार करें। अभ्यर्थियों को अपनी ड्रेस का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। क्योंकि इसे लेकर भी प्रश्न पूछ लिए जाते है।