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हड़ताल का असर:150 से ज्यादा सैंपलिंग वाले फीवर क्लिनिक पर डले थे ताले, अस्पतालों से लोगों को लौटाया

इंदौरएक महीने पहले
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मांगीलाल चूरिया हॉस्पिटल पूरी तरह बंद रहा। यहां लोग बाहर से ही लौट गए। - Dainik Bhaskar
मांगीलाल चूरिया हॉस्पिटल पूरी तरह बंद रहा। यहां लोग बाहर से ही लौट गए।
  • फीवर क्लिनिकों पर कोरोना की जांच कराने पहुंचे लोग हुए परेशान
  • किसी को ड्यूटी जाॅइन करना थी तो कोई होम आइसोलेशन के बाद अब टेस्ट करवाने आया था

सर कोरोना की टेस्टिंग हो जाएगी क्या... आज तो हड़ताल है कल आ जाना... पर मुझे तो ड्यूटी जाॅइन करनी है जल्दी...। हां, पर क्या करें आज सैंपल ले भी लेंगे तो आगे जमा नहीं हो पाएगा। सर पति कोरोना पॉजिटिव हो गए थे उन्हें अस्पताल में भर्ती किया है मुझे भी टेस्ट करवाना है... आज तो नहीं हो पाएगा, सभी लोग छुट्‌टी पर हैं आप लोग कल आना। यह नजारा था शुक्रवार को बाणगंगा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का। यहां पर फीवर क्लिनिक खुला तो था डॉक्टर भी थे, लेकिन मरीजों की कोरोना की सैंपलिंग नहीं हो रही थी।

ड्यूटी डॉक्टर सागर दरबार द्वारा लोगों को बोला जा रहा था कि आज डॉक्टरों की हड़ताल है आप कल आना। आज सैंपल ले भी लेंगे तो भी जमा नहीं हो पाएंगे क्याेंकि सभी जगह हड़ताल चल रही है। जेल स्टाफ में पदस्थ रोहित सिंह निवासी कर्मानगर ने बताया कि उसे ड्यूटी जाॅइन करना है, लेकिन सैंपलिंग ही नहीं हो पा रही है। कल भी आया था तो बोल दिया था कि अगले दिन आ जाना। इसी तरह बाणगंगा निवासी पिंकी सिंह ने बताया कि पति पॉजिटिव हैं, मुझे भी अपनी सैंपलिंग करवाना है। साथ ही सूरज नगर निवासी ललिता पांचाल भी सैंपल देने के लिए पहुंचीं तो उन्हें भी कल आने का कहकर लौटा दिया गया। डॉ. दरबार ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर 2 बजे तक 150 से ज्यादा सैंपलिंग होती है।

परेशानी; बियाबानी, सुभाष नगर और शिवाजी नगर में मिला ताला

बियाबानी के प्रेमकुमार देवी अस्पताल के खुले मैदान को सैंपलिंग के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन शुक्रवार को हड़ताल के कारण काम बंद रहा। शिवाजी नगर में एक स्कूल को फीवर क्लिनिक बनाया है। यहां पर भी दिनभर ताला लगा रहा। सुभाष नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी दिनभर ताला डला रहा। पीसी सेठी हॉस्पिटल पहुंचे 60 मरीजों और चार गर्भवती महिलाओं को गेट से ही लौटाना पड़ा।

इनसाइड स्टोरी: गडरिया का इस्तीफा रुकवाने सीएम हाउस तक की बात

इंदौर | कलेक्टर और डॉक्टर विवाद में डॉ. गडरिया को डॉ. माधव हसानी और डॉ. प्रवीण जड़िया के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अन्य संगठनों का साथ मिल रहा था। मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी और संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने गुरुवार रात 10 बजे रणनीति बनाई। मंत्री ने डॉ. सुमित शुक्ला के जरिए अलग-अलग संगठनों से, सांसद ने डॉ. हसानी से और संभागायुक्त ने डॉ. जड़िया व डॉ. गडरिया से चर्चा शुरू की। डॉ. शुक्ला ने अन्य सहयोगी संगठनों से बात कर उन्हें इस बात पर राजी कर लिया कि कलेक्टर के इस्तीफे वाली बात नहीं होगी, मान सम्मान सभी का रखा जाएगा।

उधर डॉ. जडिया भी मान-सम्मान की बात पर मान गए, लेकिन गडरिया की ओर से बात उठी कि इस्तीफा तो भेज दिया। शासन ने मान्य कर लिया तो नया विवाद शुरू हो जाएगा। संभागायुक्त ने एसीएस स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य सचिव आकाश त्रिपाठी और सीएम हाउस में बात की और इसे मान्य नहीं करने का आग्रह किया। डॉ. हसानी से सांसद ने बात की। कुछ माह पहले कलेक्टर ने उनके खिलाफ एक मामले में जांच बैठाई थी, तब सांसद ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच बात रखी थी। सांसद ने हसानी से कहा कि अब आपकी बारी है, शहरहित में काम पर लौटने और साथ देने की।

आखिर रात दो बजे यह तय हो गया कि सुबह संगठनों की बात में कलेक्टर के इस्तीफे को छोड़ अन्य मांग रखी जाएगी। शुक्रवार सुबह संभागायुक्त ने डॉ. गडरिया को दैनिक भास्कर में छपी खबर भेजी और कहा कि यह खबर देखिए, कोई भी अभी आप लोगों के साथ नहीं आएगा, यह कठिन दौर है। बाद में रेसीडेंसी में कलेक्टर के इस्तीफे को छोड़कर मान-सम्मान पर ही बात हुई। फिर दोपहर में संभागायुक्त कार्यालय में सब बैठे। मंत्री ने गडरिया को बहन और लक्ष्मीबाई जैसी संज्ञा देते हुए मनाया, तो संभागायुक्त ने कहा कि किसे क्या काम देना है यह कलेक्टर का विशेषाधिकार है, लेकिन मान-सम्मान भी सभी का जरूरी है। कलेक्टर के खेद जताने के साथ ही मामला खत्म हो गया।

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