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आरोपियों के साथ फोटो पर मंत्री शाह बोले:उनकी चार पीढ़ी मेरे साथ, कोई गलत काम करेगा तो पुलिस अपना काम करें

इंदौर4 दिन पहले

शहर में पिछले दिनों पकड़ाए सेक्स रैकेट और उसमें आरोपियों के साथ फोटो आने पर वन मंत्री विजय शाह ने कहा कि हम लोग सार्वजनिक जीवन में जीते हैं। मैं 32 साल से एमएलए हूं। जो पकड़ाए हैं उनके दादाजी मेरे साथ थे। उनके पिताजी मेरे साथ थे और नौजवान बच्चे भी मेरे साथ हैं। 32 साल मतलब चार पीढ़ी। अगर कोई गलत काम करेगा तो पुलिस अपना काम करें। मेरा कोई संरक्षण नहीं पर मुझको जोड़ करके फोटो सहित दिखाना, ऐसे लोगों की बुद्धि को मैं प्रणाम करता हूं।

यह बात वन मंत्री विजय शाह ने गुरुवार को इंदौर में कही। वन विकास निगम द्वारा इनोवेटिव प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं। अंडमान निकोबार द्वीप में उद्योग-व्यापार के लिए जगह कम है। जब तक वहां पौधे नहीं लगाओगे, कार्बन क्रेडिट नहीं दोगे, वहां उद्योग की परमिशन नहीं मिलेगी। मप्र में हमारे पास पर्याप्त जगह है। हमने बात की है कि आप उद्योग लगाए, हमें भारत सरकार से पैसा लेकर दें। इसके बदले वन विकास निगम के जरिए हम कार्बन क्रेडिट देंगे। हम पेड़ वापस नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके पैसे से मप्र में जंगल लगेगा और इसके बदले वहां उद्योग स्थापित होंगे। गोवा व अन्य समुद्र तट जहां जगह नहीं है वहां उद्योगों के लिए मप्र कार्बन क्रेडिट देगा जिसकी बातचीत चल रही है।

वन मंत्री विजय शाह ने यह बात नवरतन बाग के वन विभाग परिसर में स्थित वन विकास निगम के नए ऑफिस के शुभारंभ अवसर पर कही। यह ऑफिस सिवनी से इंदौर शिप्ट हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे पास सालों का अनुभव है। राष्ट्रीय लेवल की कंपनियां मप्र पर विश्वास करती है। अगर विदेश में भी किसी को कार्बन क्रेडिट चाहिए तो उनके लिए हम मप्र में पौधे लगाएंगे। कार्बन क्रेडिट वर्ल्ड वाइड है। इसके आधार पर पर वे दुनिया में जहां भी फैक्टरी लगाएंगे मप्र उनको कार्बन क्रेडिट बेचेगा। यह नया सोच है जिसे डेवलप करना चाहते हैं। पेड़ों की सेटेलाइट से मॉनिटरिंग होती है।

उन्होंने कहा कि वन विकास निगम आधुनिक तरीके से वृक्षारोपण व 5 से 15 वर्ष तक उनकी रखवाली करता है। ये लोग वो काम करते हैं जैसे बड़ी-बड़ी फैक्टरियां हैं, कोयले की खदाने हैं, रोड के प्रोजेक्ट्स हैं जहां जंगल कटते हैं और जितने जंगल कटते हैं उतनी दोगुना जमीन पर जंगल लगाने पड़ते हैं। मकसद यही है जंगल खराब न हो, सुरक्षित रहे उसकी रखवाली हो और पानी हो। जहां हम 100 वृक्ष लगाते हैं तो 40 प्रतिशत अच्छा मान लेते हैं। वन विकास निगम 75 से 80 प्रतिशत के बिना समझौता नहीं करता। हम उस जगह पेड़ लगाते हैं जहां काटे गए।

ज्यादा पैसे के साथ बेहतर सुरक्षा की गारंटी

उन्होंने कहा कि निगम उसकी रखवाली, पानी आदि की व्यवस्था वन विभाग से ज्यादा बेहतर तरीके से करता है। हम ज्यादा पैसा भी लगाने में लेते हैं सुरक्षा भी देते हैं। वन विभाग में 40 प्रतिशत में समझौता कर लेते हैं, उसे भी बढ़ना चाहते हैं और वन विकास निगम के लेवल में लाना चाहते हैं। अगर 70 प्रतिशत से अधिक नहीं आया तो हम अधिकारी की तनख्वाह में से काटते हैं इसलिए हमारा प्रतिशत इतना अच्छा है। मप्र के साथ बिहार, छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय लेवल की एजेंसिया चाहे वो एनएआई हो, महाराष्ट्रवाले हो, डब्ल्युसीएल हो, वह हमसे काम करना पसंद करती है। इंदौर, खरगोन, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, हम देखेंगे कि यहां बडे पैमाने पर जंगल कट गए। अब हम ऑफिस खोलकर काम बढ़ाएंगे। दूसरी बड़ी कंपनियों से पैसा लेकर ऐसी जगह वृक्षारोपण करेंगे जहां 80 प्रतिशत की गारंटी है।

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