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जनसंख्या नियंत्रण कानून पर सियासी बहस:पूर्व मंत्री वर्मा बोले - व्यक्तिगत तौर पर मैं इस कानून का पक्षधर, पर इंदिरा गांधी के समय ये इसका विरोध क्यों करते थे, UP चुनाव जीतने बना रहे कानून

इंदौर10 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के बाद अब इसमें सियासी अंदाज में बहस शुरू हाे गई है। पूर्व मंत्री और विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने व्यक्तिगत तौर पर खुद को इसका पक्षधर तो बताया ही साथ ही भाजपा पर सवाल भी दाग दिया कि इंदिरा गांधी के समय इसका विरोध क्यों करते थे। केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर आगे आकर जनसंख्या नियंत्रण का ड्राफ्ट तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टाइमिंग को देखिए, ये यूपी चुनाव में कई लोगों को अपने अधिकार से वंचित करना चाहते हैं।

वर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि सज्जन सिंह वर्मा व्यक्तिगत तौर पर इस बात का पक्षधर है कि बिना भेदभाव के पवित्र मन से हमें स्वीकार करना चाहिए कि भारत की दुर्दशा और विकास को बाधित करने का एक बड़ा कारण हमारे देश की जनसंख्या वृद्धि है। मेरा मत है कि इस प्रकार का कानून लाया जाना चाहिए। लेकिन जो लोग आज ऐसी बातें कर रहे हैं। वे इंदिरा गांधी के समय इस कानून का विरोध क्यों किया करते थे। गांधी ने 1975 में इस बात को महसूस किया था कि जनसंख्या विस्फोट भारत को विकास की गति नहीं पाने देगा। उन्होंने कहा था कि मैं परिवार नियोजन लागू करूंगी। उन्होंने दमदारी से इसे लागू किया। यही लोग सड़क पर आंदोलन कर रहे थे। योगी को अधिकार है क्या इस कानून को बनाने का। भारत सरकार को कानून बनाना चाहिए। मोदी सरकार को विश्व पटल पर खड़े होकर कहना चाहिए कि मैं इस कानून काे लागू करूंगा।

वर्मा ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत इस कानून को पिछली शिवराज सरकार में 10 बाज अशासकीय संकल्प लेकर आए थे, लेकिन ये चर्चा को भी तैयार नहीं थे। यूपी चुनाव को जीतने के लिए ये कानून लेकर आ रहे हैं। कई लोगों को अपने अधिकार से वंचित करना है। ये सत्ता के लोलुप लोग हैं। वहीं, पूरे मामले में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कानून बनने के काम होना चाहिए।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने टाइमिंग को लेकर सवाल किया।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने टाइमिंग को लेकर सवाल किया।

यह है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट तैयार कर किया है। राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने इसे तैयार किया है। यदि ये ड्राफ्ट कानून में बदला तो UP में भविष्य में जिनके 2 से ज्यादा बच्चे होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। ऐसे लोग कभी चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। विधि आयोग का दावा है कि अनियंत्रित जनसंख्या के कारण पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे पहले लव जिहाद कानून का ड्राफ्ट भी आदित्यनाथ मित्तल ने ही तैयार किया था।

ड्राफ्ट की बड़ी बातें

  • दो से अधिक बच्चों के अभिभावकों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
  • स्थानीय निकाय और पंचायत का चुनाव भी नहीं लड़ सकते।
  • राशन कार्ड में भी चार से अधिक सदस्यों के नाम नहीं लिखे जाएंगे।
  • 21 साल से अधिक उम्र के युवक और 18 साल से अधिक उम्र की युवतियों पर एक्ट लागू होगा।
  • जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित पाठ्यक्रम स्कूलों में पढ़ाए जाने का सुझाव भी दिया है।
  • कानून लागू होने के बाद यदि किसी महिला को दूसरी प्रेग्नेंसी में जुड़वा बच्चे होते हैं, तो वह कानून के दायरे में नहीं आएंगी।
  • तीसरे बच्चे को गोद लेने पर रोक नहीं रहेगी। यदि किसी के 2 बच्चे नि:शक्त हैं तो उसे तीसरी संतान होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • सरकारी कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा कि वे इस कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे।

दो बच्चे वालों को ये फायदा

  • दो बच्चे की नीति अपनाने वाले अभिभावकों को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी।
  • ऐसे पेरेंट्स जिनके दो बच्चे हैं और वे सरकारी नौकरी में हैं और अपनी इच्छा से नसबंदी कराते हैं तो उन्हें दो एक्स्ट्रा इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, PF में एंप्लायर कॉन्ट्रिब्यूशन जैसी सुविधाएं मिलेंगी। पानी, बिजली, हाउस टैक्स में भी छूट मिलेगी।
  • एक संतान पर स्वयं नसबंदी कराने वाले अभिभावकों की संतान को 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की सिफारिश है।

वन चाइल्ड पॉलिसी अपनाने पर फ्री एजुकेशन

  • वन चाइल्ड पॉलिसी स्वीकार करने वाले BPL श्रेणी के माता-पिता को विशेष तौर पर प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा है।
  • इसके तहत जो माता–पिता पहला बच्चा पैदा होने के बाद आपरेशन करा लेंगे‚ उन्हें कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी।
  • पहला बच्चा बालिग होने पर 77 हजार और बालिका पर एक लाख की विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
  • ऐसे माता–पिता की पुत्री को उच्च शिक्षा तक मुफ्त पढ़ाई‚ जबकि पुत्र को 20 वर्ष तक नि:शुल्क शिक्षा मिलेगी।

19 जुलाई तक जनता से मांगी राय मांगी
राज्य विधि आयोग ने ड्राफ्ट को उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 नाम दिया है। आयोग ने ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट http://upslc.upsdc.gov.in/ पर शुक्रवार को ही अपलोड कर दिया है। 19 जुलाई तक जनता से राय मांगी गई है। यह ड्राफ्ट ऐसे समय में पेश किया गया है, जब 11 जुलाई को योगी आदित्यनाथ सरकार नई जनसंख्या नीति जारी करने जा रही है।

हम किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं
जस्टिस आदित्य मित्तल ने कहा कि जानबूझकर कोई कानून का उल्लंघन करेगा तो उसे कानूनी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि हमने सोच समझकर नीति बनाई है। हम किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं हैं। हम चाहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में मदद करने वालों को योजनाओं का लाभ मिले।

एक साल बाद किया जाएगा लागू
कानून के मौजूदा ड्राफ्ट के मुताबिक ये विधेयक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से एक साल बाद लागू होगा। एक से ज्यादा शादी के मामले में, बच्चों की सही संख्या जानने के उद्देश्य से प्रत्येक जोड़े को एक विवाहित जोड़े के रूप में गिना जाएगा।

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