इंदौर की अनाथ बच्ची को इटली में मिली खुशियां:दो साल की कानूनी लड़ाई लड़ परिवार ले गया साथ, 2018 में मिली थी लावारिस

इंदौरएक महीने पहले
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एमवाय अस्पताल में साल 2018 में एक दो माह की बच्ची पहुंची थी। यहां लावारिस हालत में मिलने के बाद महिला बाल विकास ने इसे विजय नगर के सेवा भारती मातृछाया संस्था को सौप दिया था। कुछ समय बाद बच्ची को गोद लेने के लिये इटली के एक दंपती आगे आए। लेकिन कानून की अड़चन सामने आ गई। इसके बाद जटिल प्रक्रिया पूरी कर मंगलवार को दंपती उस बच्ची को अपने साथ ले गए।

महिला बाल विकास विभाग ने विजय नगर इलाके में स्थित सेवा भारती मातृछाया में वर्ष 2018 में आई एक बच्ची को इटली के एक दंपति निकोला डी बार्टोलोमेडो और उनकी पत्नी नुंझिया बितले को सौप दिया। बताया जाता है कि दंपती दो दिनों से इंदौर की एक होटल में ठहरे थे। जिन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाल संरक्षण अधिकारी अविनाश यादव ने दंपती के सुपुर्द किया।

अगस्त 2018 में पहुंची थी संस्था में
जब बच्ची दो माह की थी तो एमवाय अस्पताल के बाल विका विभाग की देखरेख में बच्ची सेवा भारती मातृछाया संस्था में पहुंची थी। यहां सालभर बाद इस बच्ची को लेने के लिए कोई परिवार सामने नहीं आया तो वर्ष 2018 में बाल कल्याण विभाग द्वारा इसे विधिमुक्त कर दिया। उसके बाद बच्ची की सारी डिटेल सेंट्रल एडक्शन रिसोर्स अथॉरिटी को दी गई। लेकिन तीन बीमारियों के चलते भारत में बच्ची के लालन पालन के लिये किसी ने हाथ नही बढ़ाया। इसी बीच विदेशों में संपर्क किया गया। जहां से इटली के दंपती निकलकर सामने आए।

कोरोना महामारी में रुक गया काम
एनओसी जारी होने के बाद महिला बाल विकास विभाग की टीम ने वर्ष 2019 में कोर्ट में इस बच्ची के संबंध में सारे दस्तावेत देते हुए गोद लेने वाले दंपति के साथ बच्ची को विदेश भेजने की अनुमति मांगी। इसी बीच कोरोना महामारी में 2 साल तक न्यायालय में मामला अटका रहा। जुलाई 2021 में कोर्ट ने सभी जांच-पड़ताल पूरी करते हुए इटली के दंपति को गोद लेने के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट से निर्णय आने के बाद महिला बाल विकास विभाग की टीम ने बच्ची का पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें थोड़ा समय लग गया। पासपोर्ट बनने के बाद इटली के परिवार से संपर्क किया गया

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