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  • 'God's Bell' By Sushma Dubey Of Indore; As Soon As The Daughter in law Who Was Unhappy Started Keeping The Mother in law Living In The Village, Her House Returned To Her Glory.

BHASKAR कला-साहित्य मंच:इंदौर की सुषमा दुबे की रचना 'भगवान की घंटी'; सास-ससुर के आने से भांजे-भांजियां भी महिला के घर आते-जाते, खाना खाते.. सचमुच उसके दिन फिरने लगे थे

इंदौर2 महीने पहले
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एक महिला थी। दिनभर पूजा पाठ करती। भगवान को नहलाती। जोर-जोर से घंटी बजाती।भोग लगाती, फिर भी उसके दुख कम नहीं होते। हार कर वह अपनी समस्या लेकर पंडितजी के पास गई। उन्होंने पूछा कि तुम्हारे घर में कौन-कौन है? उसने बताया पति-पत्नी और बच्चे हैं। पंडित जी ने फिर पूछा कि तुम्हारे घर में कोई बूढ़े बुजुर्ग नहीं है क्या? जवाब- है लेकिन सास ससुर अलग गांव में रहते हैं। पंडित जी ने कहा जिस प्रकार तुम भगवान की पूजा पाठ, भोग करती हो। कुछ दिन जीवित देवताओं की पूजा करके उन्हें भोग लगा कर खाना खिला कर देख लो, कभी तुम्हारी स्थिति सुधर जाए। शर्त यह है कि तुम उन लोगों की सेवा ऐसे ही करोगी जैसे कि भगवान की करती हो। वह बेमन से अपने सास-ससुर को अपने पास ले आई। इसी बहाने उस घर में रौनक आने लगी। सास-ससुर से मिलने अड़ोस-पड़ोस के लोग, रिश्तेदार आने लगे। घर में ननद और भांजे-भानजियों का भी आना होने लगा। वह सबका काम करने लगी। वह जब सास-ससुर के पैर छूती तो वे आशीर्वाद देते। इसी बहाने ननद-भांजों को खिलाती तो उसके ग्रह धीरे-धीरे सुधरने लगे। उसकी समस्याएं खत्म होने लगी। उसने सोचा कि अब इन लोगों का यहां क्या काम? मुझे दिनभर इन की सेवा करनी पड़ती है। मैं इनको वापस गांव छोड़ आती हूं। उसने उन्हें ले जाकर फिर से गांव में छोड़ दिया। थोड़े दिन में उसे फिर समस्याएं सताने लगी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह फिर पंडित जी के पास गई। पंडित जी ने कहा कि अरे बीच में तो तुम आई ही नहीं। अभी अचानक कैसे आना हुआ ? वह बोली पंडित जी आपके कहे अनुसार सास-ससुर को ले आई थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन मैं उनकी सेवा से घबराकर उन्हें फिर से गांव छोड़ आई। आप मुझे कोई और उपाय नहीं बता सकते क्या, जिससे मैं सुखी रह सकूं। पंडित जी ने उससे पूछा कि वह भगवान को रोज जोर जोर से घंटी बजा कर अपनी प्रार्थना सुनाती है क्या, उसने कभी भगवान की घंटी बजती सुनी है? महिला को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने कहा मैंने तो भगवान की घंटी कभी सुनी नहीं? पंडित जी उसे समझाया कि देखो बेटा भगवान भी उन्हीं लोगों से प्रसन्न होते हैं जो अपने से जुड़े इंसानों की सेवा भगवान से पहले करता है। फिर ईश्वर ने तुम्हारा भी तो बेटा दिया है। वह जो देख रहा है, सीख रहा है, वही आगे तुम्हारे साथ होने वाला है। यह भगवान की घंटी है जो हम नहीं सुन पाते। भगवान यही चाहता है कि तुम अपने सास-ससुर को साथ रखो। उनकी सेवा करो। तभी तुम्हारा बेटा भी तुम्हारी सेवा कर सकेगा। यह सुनकर औरत को समझ आ चुकी थी। वह उसी समय गई और हमेशा के लिए अपने सास-ससुर को अपने साथ ले आई।

(लेखिका विचार प्रवाह साहित्य मंच इंदौर की अध्यक्ष हैं)