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हड़ताली नर्सों से होस्टल खाली कराने की तैयारी:इंदौर में निजी नर्सिंग कॉलेजों की छात्राओं से ले रहे मदद, सरकार अपना सकती है सख्त रवैया

इंदौरएक महीने पहले
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इंदौर में हड़ताल पर बैठी नर्सेस। - Dainik Bhaskar
इंदौर में हड़ताल पर बैठी नर्सेस।

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर करीब एक हफ्ते चल रही प्रदेशव्यापी नर्सों की हड़ताल में कोई हल नहीं निकल पा रहा है। इंदौर में अब इनकी संख्या बढ़ गई है और अस्पतालों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। इसके मद्देनजर सरकार मामले में अब सख्त रवैया अपना सकती है। इनसे सरकारी होस्टल भी खाली कराने की तैयारी हो गई है।

इंदौर में मंगलवार को इंडेक्स, शुभदीप व आरडी गार्डी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को बुलाकर उनकी मदद ली गई थी। हालांकि ये सभी नर्सिंग फर्स्ट ईयर की छात्राएं थीं। बुधवार को अब इनके सहित अन्य नर्सिंग कॉलेजों की छात्राओं को एमवायएचस सहित ऐसे सरकारी अस्पताल जहां हड़ताल से काम प्रभावित हो रहा है, उनकी सेवाएं ली जाएंगी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि नर्सों द्वारा की जा रही हड़ताल जायज नहीं है। इनकी जो मांगे हैं वे सभी नर्सों के लिए लागू नहीं होती है। इंदौर की हड़़ताली नर्सों में से करीब 130 नर्सों के मामले में समयमान वेतनमान नहीं दिए जाने का मामला है। इसके चलते नियमों के तहत आने वाली इन नर्सों के दस्तावेजों की छानबीन कर हल निकाला जा रहा है जबकि इनकी अधिकांश मांग स्थानीय न होकर शासन स्तर तक भोपाल की है। नर्सों के इस अडिग रवैये अब इन्हें आवंटित सरकारी होस्टल खाली करने की तैयारी है। मामले में इन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।

इधर, नर्सों को लेकर भी अलग-अलग स्थिति है। नर्सों का एक गुट शुरू से ही अस्पतालों में काम कर रहा है तथा उनकी कोई मांग नहीं है। दूसरा गुट अपनी पूरी 12 सूत्रीय मांगों को पूरी करने पर अड़ा है। दूसरी ओर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की अस्थाई नर्सें जिन्हें कोरोना संक्रमण कम होते ही नौकरी से निकाला है, वे स्थाई नौकरी की मांग पर अड़ी हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पिछले हफ्ते इंदौर आए थे तो जल्द ही उनकी समस्या हल करने की बात कही थी लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला। अब नया पेंच यह भी है कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने पिछले दिनों नर्सों की भर्ती के लिए जो विज्ञापन जारी किया है, उसमें 5 साल की संविदा में काम करने का अनुभव मांगा है। इसके अलावा यह नियुक्ति मेल नर्सों के लिए नहीं है जिसे लेकर आक्रोश है। मामले में दो दिन पहले प्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन को एसीएस मो. सुलेमान ने चर्चा के लिए भोपाल बुलाया था लेकिन बात नहीं हो सकी। नर्सों का कहना है कि उनके समर्थन में जूनियर डॉक्टर्स भी जल्द मैदान में उतर सकते हैं।

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर करीब एक हफ्ते चल रही प्रदेशव्यापी नर्सों की हड़ताल में कोई हल नहीं निकल पा रहा है। इंदौर में अब इनकी संख्या बढ़ गई है और अस्पतालों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। इसके मद्देनजर सरकार मामले में अब सख्त रवैया अपना सकती है। इनसे सरकारी होस्टल भी खाली कराने की तैयारी हो गई है।

इंदौर में मंगलवार को इंडेक्स, शुभदीप व आरडी गार्डी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को बुलाकर उनकी मदद ली गई थी। हालांकि ये सभी नर्सिंग फर्स्ट ईयर की छात्राए थी। बुधवार को अब इनके सहित अन्य नर्सिंग कॉलेजों की छात्राओं को एमवायएचस सहित ऐसे सरकारी अस्पताल जहां हड़ताल से काम प्रभावित हो रहा है, उनकी सेवाएं ली जाएंगी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि नर्सों द्वारा की जा रही हड़ताल जायज नहीं है। इनकी जो मांगे हैं वे सभी नर्सों के लिए लागू नहीं होती है। इंदौर की हड़ताली नर्सों में से करीब 130 नर्सों के मामले में समयमान वेतनमान नहीं दिए जाने का मामला है। इसके चलते नियमों के तहत आने वाली इन नर्सों के दस्तावेजों की छानबीन कर हल निकाला जा रहा है जबकि इनकी अधिकांश मांग स्थानीय न होकर शासन स्तर तक भोपाल की है। नर्सों के इस अडिग रवैये अब इन्हें आवंटित सरकारी होस्टल खाली करने की तैयारी है। मामले में इन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।

नई नियुक्ति में नए पेंच

इधर, नर्सों को लेकर भी अलग-अलग स्थिति है। नर्सों का एक गुट शुरू से ही अस्पतालों में काम कर रहा है तथा उनकी कोई मांग नहीं है। दूसरा गुट अपनी पूरी 12 सूत्रीय मांगों को पूरी करने पर अड़ा है। दूसरी ओर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की अस्थाई नर्सें जिन्हें कोरोना संक्रमण कम होते ही नौकरी से निकाला है, वे स्थाई नौकरी की मांग पर अड़ी हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पिछले हफ्ते इंदौर आए थे तो जल्द ही उनकी समस्या हल करने की बात कही थी लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला। अब नया पेंच यह भी है कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने पिछले दिनों नर्सों की भर्ती के लिए जो विज्ञापन जारी किया है, उसमें 5 साल की संविदा में काम करने का अनुभव मांगा है। इसके अलावा यह नियुक्ति मेल नर्सों के लिए नहीं है जिसे लेकर आक्रोश है। मामले में दो दिन पहले प्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन को एसीएस मो. सुलेमान ने चर्चा के लिए भोपाल बुलाया था लेकिन बात नहीं हो सकी। नर्सों का कहना है कि उनके समर्थन में जूनियर डॉक्टर्स भी जल्द मैदान में उतर सकते हैं।

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