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रंगोत्सव:संगीतमय फाग उत्सव में सखियों के साथ बृज में होली देखने का सुरीला उल्लास

इंदौरएक महीने पहले
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  • शहर की शास्त्रीय गायिका वैशाली बकोरे ने राग बसंत और मधुकौंस गाया

यह संगीतमय फाग उत्सव था। इसमें होली पर केंद्रित बंदिशें, दादरा और भजन सुनाए गए। नर्मदापुरम कला जगत के इस फाग उत्सव में शहर की शास्त्रीय गायिका वैशाली बकोरे ने मंगलवार को शास्त्रीय और उपशास्त्रीय गायन किया। इस ऑनलाइन उत्सव में उन्होंने राग बसंत और मधुकौंस गाने के साथ ही दादरा और भजन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की परिकल्पना इस तरह से की कि रसिकों का होली के ‌विविध रंगों का सुरीला सांगीतिक रसास्वादन मिल सके।

फगवा बृज में देखन को चलो री, फगवे में मिलेंगे कुंवर कान्ह जहां
शुरूआत उन्होंने राग बसंत से की। इसमें मध्यलय में तीन ताल की बंदिश गाई फगवा बृज में देखन को चलो री, फगवे में मिलेंगे कुंवर कान्ह जहां। गायन में सखियों के साथ बृज की होली देखने की उमंग और कृष्ण के दर्शन करने की इच्छा भी प्रकट हुई। मध्यलय एकताल की बंदिश के बोल थे : फुलवा बिनत डार डार। फिर राग मधुकौंस में बंदिश गाई : आज खेलो होरी सखियन मिली। इसमें सामूहिक उल्लास प्रकट हुआ। इसी राग में द्रुत में उन्होंने तराना प्रस्तुत किया।

कौन तरह से तुम खेलत होरी
राग मिश्र काफी में उन्होंने कौन तरह से तुम खेलत होरी गाई और फिर बंदिश बृज में हरि कैसी होली मची को प्रस्तुत किया। दादरा गाया जिसकेे बोल थे रंगी सारी गुलाबी चुनरिया। उन्होंने इसे पूरी तन्मयता से गाया। समापन मीरा के भजन होरी खेलत गिरधारी से किया। उनके साथ हारमोनियम पर मयूर पांडे और तबले पर सोपान बकोरे ने अच्छी संगत की।

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