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भास्कर लाइव:20 से ज्यादा छात्राओं में हीमोग्लोबिन कम, फिर भी होस्टल में दोनों टाइम सब्जी नहीं दी जाती

इंदौर4 महीने पहले
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आदिम जाति कल्याण विभाग के होस्टल का कलेक्टर ने किया निरीक्षण। - Dainik Bhaskar
आदिम जाति कल्याण विभाग के होस्टल का कलेक्टर ने किया निरीक्षण।

समय - सोमवार दोपहर 2 बजे... स्थान - सुदामा नगर डी-सेक्टर स्थित तीन मंजिला भवन कलेक्टर मनीष सिंह और सामाजिक क्षेत्र के लिए काम कर रहे डॉ. निशांत खरे आदिम जाति कल्याण विभाग के होस्टल (किराए की बिल्डिंग) पहुंचते हैं। अंदर जाते ही कलेक्टर पूछते हैं यहां खाना कौन बनाता है? एक महिला जवाब देती है सर, मैं। कलेक्टर- क्या देती हो खाने में... कुछ देर में छात्रावास में रहने वाली लड़कियां नीचे आ जाती हैं।

कलेक्टर उनसे पूछते हैं- सब्जी दोनों समय मिलती है? जवाब मिलता है नहीं... फिर कलेक्टर पूछते हैं- चावल मिलता है? छात्राएं कहती हैं- एक समय। थोड़ी देर में होस्टल अधीक्षक आ जाती हैं। वे अपना परिचय देती हैं। कलेक्टर उनकी ओर मुखातिब होते हैं- आप ध्यान नहीं देतीं हॉस्टल पर। कितना वेतन मिलता है? अधीक्षक- सर, 62 हजार। कलेक्टर- फिर भी आप ध्यान नहीं देतीं।

दोनों समय जो खाना मिलना चाहिए, वह क्यों नहीं मिलता। सफाई भी नहीं है यहां। अधीक्षक से- शाम का खाना कब देती हो? कामवाली- सर, 6.30 बजे। कलेक्टर- अब शाम को नाश्ता हम भिजवाएंगे। आप रात 8 बजे गरम खाना दें। बता दें कि होस्टल में 47 छात्राएं हैं।

कलेक्टर ने कारण बताओ नोटिस के साथ ही अधीक्षक का वेतन भी रोका

अधीक्षक से- आपका सुपरविजन ठीक नहीं दिख रहा। फिर वहीं खड़े एक अधिकारी से- इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करो। यहां खाने का इशु है। क्या नाम है इनका? अधीक्षक- मीनाक्षी ठाकुर। कलेक्टर- मैडम का वेतन रोक दो, तब तक जारी न हो, जब तक यहां व्यवस्था न सुधरे। मकान मालिक को बोलो- कलेक्टर आए थे। यहां एक टॉयलेट का काम बचा है, वह सात दिन में पूरा हो जाए। नहीं तो कोई दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर देंगे।

तीन और होस्टल पहुंचे, यहां भी कहीं दूध तो कहीं खाना नहीं

कलेक्टर ने बिल्डिंग की क्षमता और वर्तमान में छात्राओं की जानकारी ली तो पता चला कि कुछ दिन पहले छात्राओं की खून की जांच हुई थी, उसमें करीब 20 छात्राओं में हीमोग्लोबिन कम मिला। इस पर डॉ. खरे के साथ तय हुआ कि वे डॉक्टरों की टीम भेजेंगे। कलेक्टर ने दवाएं अपने विभाग की ओर से उपलब्ध कराने की बात की। कलेक्टर ने काम करने वाली बाई से पूछा- छात्राओं को दूध कितना मिलता है।

जवाब मिला- 100 ग्राम। फिर छात्राओं से कंफर्म किया। इस पर अधीक्षक को कलेक्टर ने कहा कि- अब खाना अच्छा देना, किसी भी दिन आकर मैं खाऊंगा। इसके बाद कलेक्टर ने तीन होस्टल और देखे। कहीं दूध और खाने की शिकायतें मिलीं तो कहीं अन्य समस्याएं। कलेक्टर ने बताया कि आमतौर पर होस्टलों में देख-रेख सही नहीं होती, इसलिए निरीक्षण किया।

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