इंदौर / हाई कोर्ट जज ने वीडियो काॅन्फ्रेंस के जरिए महिला को दी गर्भपात की मंजूरी

फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • कोरोना कारण हाई कोर्ट सहित सभी न्यायालयों में भी काम बंद है, लेकिन विशेष मामलों के लिए जज सुनवाई कर रहे हैं
  • बच्चा अविकसित होकर विकृत भी था, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गर्भपात कराने के आदेश दिए

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 04:45 AM IST

इंदौर.  कोरोना कारण हाई कोर्ट सहित सभी न्यायालयों में भी काम बंद है, लेकिन विशेष मामलों के लिए जज सुनवाई कर रहे हैं। गुरुवार को ऐसा ही एक मामला हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लगा। चूंकि कोरोना के चलते लोगों को समूह में इकट्ठा नहीं होना हैै। इसलिए वीडियो काॅन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई हुई। दरअसल, एक गर्भवती महिला ने कोख में विकसित नहीं हो रहे बच्चे को गिराने के लिए अर्जी दायर की थी। बच्चा अविकसित होकर विकृत भी था। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गर्भपात कराने के आदेश दिए। 


जस्टिस विवेक रुसिया ने हाई कोर्ट परिसर में वीडियो काॅन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई की। याचिकाकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता यशपाल राठौर ने पैरवी की, जबकि शासन की ओर प्रभारी अतिरिक्त महाधिवक्ता अंशुमान श्रीवास्तव के निर्देश पर विनय गांधी ने पक्ष रखा। याचिका में उल्लेख किया था कि महिला को 18 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ हो चुका है, लेकिन बच्चा विकसित नहीं हो रहा। महिला विकृत बच्चा पैदा नहीं करना चाहती। हाई 
कोर्ट इस मामले में पहले मेडिकल बोर्ड गठित कर चुकी थी। बोर्ड की अनुशंसा को देखते हुए ही हाई कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति दे दी। 

अदालत में केवल एक ही मामले की सुनवाई हुई
हाई कोर्ट में गुरुवार केवल यही मामला को सुनवाई के लिए लगा था। जस्टिस रुसिया ने अपने कक्ष बैठे, जबकि दोनों पक्षों के वकील कोर्ट परिसर में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग वाले कक्ष में बैठे। कोर्ट ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए महिला को गर्भपात कराए जाने के आदेश जारी किए। कुछ देर में ही सुनवाई पूरी हो गई। गौरतलब है कि निचली अदालतों को भी हाई कोर्ट निर्देश जारी कर चुकी है। गवाहों के बयान और पेशी जैसे मामले को लिए वीडियो काॅन्फ्रेंस की सुविधा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हनी ट्रैप मामले में महिला आरोपियों के खिलाफ चल रहा ट्रायल इसी सिस्टम से किया जा रहा है।

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