पुलिस ने रोका तो आधी रात को छेड़ा हिंगोट युद्ध:इंदौर पुलिस के मैदान छोड़ते ही एक-दूसरे पर फेंके जलते तीर; बोले- हमने अपना काम किया

इंदौरएक महीने पहले

दीपावली के दूसरे दिन धोक पड़वा पर पुलिस-प्रशासन सारे प्रयासों के बाद भी हिंगोट(अग्निबाण) युद्ध नहीं रोक पाई। शुक्रवार देर रात 11.30 बजे जैसे ही पुलिस-प्रशासन का हमला युद्ध वाले मैदान से हटा, 25 से ज्यादा लोगों (योद्धा) ने मैदान की ओर दौड़ लगा दी और करीब 15 मिनट तक एक-दूसरे पर हिंगोट फेंके। लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन ने अपना काम किया है और हमने हमारा।

रोक लगाई तो परंपरा विलुप्त हो जाएगी
गौतमपुरा के लोगों का कहना है कि हिंगोट हमारी सदियों पुरानी परंपरा है। प्रशासन ने कोरोना का हवाला देकर इसे बंद कराना चाहा, लेकिन हमें परंपरा बरकरार रखना है, जिसे हमने रखा। ये भाईचारे का युद्ध है। इसे जीवित रखना बहुत जरूरी है। नहीं तो धीरे-धीरे हिंदू धर्म की सारी परंपरा विलुप्त हो जाएगी।

हिंगोट युद्ध न हो इसके लिए शुक्रवार सुबह से ही पुलिस और जिला प्रशासन ने गौतमपूरा के मैदान में अस्थाई चौकी बनाकर सभी तरफ से बैरिकेडिंग कर दी थी। हर रास्ते पर जवान तैनात थे। युद्ध के मैदान में किसी को जाने की अनुमति नहीं थी। गांव में फ्लैग मार्च भी निकाला गया।

देर रात योद्धा मैदान में पहुंचे और दूसरे दल पर जलते हुए बाण छोड़े।
देर रात योद्धा मैदान में पहुंचे और दूसरे दल पर जलते हुए बाण छोड़े।

घरों से भी छोड़े हिंगोट
प्रशासन की मनाही के बावजूद लोगों ने घरों से हिंगोट छोड़े। प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों का यही कहना था कि कोरोना की वजह से भीड़ वाले आयोजन पर रोक है। पुलिस ने 32 लोगों को चिन्हित कर उनसे बॉन्ड भरवाया था।

उन्हें चेतावनी दी गई है कि माहौल बिगड़ने पर वे जिम्मेदार होंगे। उन पर शांति भंग करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शाम को लोग परंपरा निभाने के लिए घरों से ही हिंगोट फेंकने लगे थे, लेकिन रात 11 बजे के बाद कई योद्धा मैदान में उतर आए और हिंगोट चलाए।

प्रशासन ने कोरोना का हवाला देकर हिंगोट युद्ध पर प्रतिबंध लगाया था।
प्रशासन ने कोरोना का हवाला देकर हिंगोट युद्ध पर प्रतिबंध लगाया था।

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