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  • Holkars built Rampur Kothi in 1870 as a resting place for the Nawabs of Rampur. Coronavirus in India, MP Coronavirus Cases, Virus Cases in MP, COVID 19 Cases, Corona Virus Cases in Bhopal, Coronavirus Update in Madhya Pradesh, coronavirus MP, Coronavirus Outbreak In MP

जानिए अपने शहर के बारे में / होलकरों ने रामपुर के नवाबों के लिए आरामगाह के तौर पर 1870 में बनवाई थी रामपुर कोठी

कब बनी : 1870 में मकसद : रामपुर के नवाबों के विश्राम के लिए  शैली : ब्रिटिश और मराठा स्टाइल आर्किटेक्चर कब बनी : 1870 में मकसद : रामपुर के नवाबों के विश्राम के लिए शैली : ब्रिटिश और मराठा स्टाइल आर्किटेक्चर
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कब बनी : 1870 में मकसद : रामपुर के नवाबों के विश्राम के लिए  शैली : ब्रिटिश और मराठा स्टाइल आर्किटेक्चरकब बनी : 1870 में मकसद : रामपुर के नवाबों के विश्राम के लिए शैली : ब्रिटिश और मराठा स्टाइल आर्किटेक्चर

  • एंग्लो-मराठा स्टाइल आर्किटेक्चर की इमारत में दो तलघर व लालबाग तक सुरंग भी
  • पुणे स्थित हाउसेस ऑफ लॉर्ड्स एंड कॉमन्स का आर्किटेक्चर भी इसी शैली का है

दैनिक भास्कर

Apr 07, 2020, 08:11 AM IST

इंदौर. तकरीबन 150 साल पुरानी इस कोठी का आर्किटेक्चर ब्रिटिश और मराठा शैली के भवनों से प्रेरित है। मराठा शैली में लंबे कॉरिडोर्स बनाए जाते थे। ऐसे कॉरिडोर यहां भी बने हैं। ब्रिटिश आर्किटेक्चर में नक्काशी और जालीदार काम कम होता है और आर्च बनाए जाते हैं। इस दो मंज़िला कोठी के नीचे दो तलघर भी हैं। पहले तलघर में आरटीओ कार्यालय का रिकॉर्ड रखा हुआ था। कहा जाता है कि इसके नीचे वाले तलघर में कुछ सुरंगें थीं। इनमें से एक सुरंग इस कोठी से सीधे लालबाग पैलेस तक पहुंचाती है। हालांकि जानकार कहते हैं कि तलघर में कुछ रास्ते तो हैं, लेकिन सुरंग के होने के ठोस प्रमाण अब तक नहीं मिले हैं। इस तलघर को काफी समय पहले बंद कर दिया गया था।

कोठी को फिर दिया जा रहा पुराना स्वरूप, बनाएंगे आर्ट गैलरी और रेस्तरां 
1972-73 में होलकर स्टेट का निजी भवन होने से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को इसकी देखरेख का जिम्मा सौंपा गया। पीडब्ल्यूडी ने यह इमारत आरटीओ कार्यालय चलाने के लिए परिवहन विभाग को दे दी। विभाग ने यहां अपने हिसाब से कई परिवर्तन किए थे। दूसरी मंजिल के तलघर को विभाग ने दीवार उठाकर बंद कर दिया था। पहली मंजिल के तलघर में रिकार्ड रूम बनाया था। अब इन सभी बदलाव हटाकर कोठी को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक तकरीबन 5 करोड़ रुपए के खर्च से इसे दुरुस्त किया जाएगा और फिर इसे एक कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आर्ट गैलरी बनाई जाएगी। संभवत: रजवाड़ी व्यंजनों का एक रेस्तरां भी शुरू किया जाएगा। 

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