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26 जनवरी को यहां जाने का बनाएं प्लान:इंदौर और आसपास के मंदिरों से लेकर पिकनिक स्थल तक कैसे पहुंचे और कितनी है एंट्री फीस...जानिए सबकुछ

इंदौर4 महीने पहलेलेखक: हेमंत नागले
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इंदौर शहर और उसके आसपास कई पिकनिक स्पॉट और मंदिर हैं। यह स्थल शहर के आसपास ही हैं। इन जगहों पर 26 जनवरी को घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। आप आधे से एक घंटे में यहां पहुंच सकते हैं। शाम होते-होते घर भी लौट सकते हैं। अगर आप कहीं भी पिकनिक के लिए जा रहे हैं, तो कोरोना गाइड लाइन का पालन जरूर करें। दोनों डोज का सर्टिफिकेट साथ रखें। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इसकी तैयारियां भी कर रखी हैं। टूरिस्ट स्पॉट पर कोरोना जांच भी की जा रही है।

तस्वीरों में देखें इनके सुंदर नजारे

1. पातालपानी :

इंदौर के समीप महू का पातालपानी। यहां कार से एक घंटे में पहुंचा जा सकता है। रास्ते में एक टोल टैक्स के बाद आप सीधे इस सुंदर पहाड़ों के बीच प्रकृति के सुदंर नज़ारे को देखने पहुच जाएंगे। यहां करीब 300 फीट ऊंचाई नीचे पानी गिरता है। पातालपानी के आसपास का क्षेत्र सुंदर और हरा-भरा है। यह लोकप्रिय पिकनिक और ट्रैकिंग स्पॉट भी है। इंदौर से करीब 40 किमी दूर इस जगह के लिए महू से स्पेशल ट्रेन चलती है। पिछले कुछ वर्षों में यहां सेल्फी लेते वक्त हादसों के बाद प्रशासन द्वारा पहाड़ी किनारे रेलिंग लगा दी हैं, जिससे पर्यटक झरने के नजदीक नहीं जा पाते। सिर्फ इस जगह आप को पार्किंग शुल्क के अलावा किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लगेगा।

पातालपानी
पातालपानी

2. गुलावत :
इंदौर के समीप लोटस वैली नाम से प्रसिद्ध इस जगह भी घूमने जा सकते हैं। यहां फूल एक झील में खिलते हुए देख सकते हैं। यह स्थान भी शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर है। लावट लोटस वैली यशवंत सागर डैम के पीछे वाली पानी से बनी झील है। झील के ऊपर स्थित विचित्र 100 मीटर के पुल की झलक अवश्य देखनी चाहिए। यहां से झील और खूबसूरत कमल का मनोरम दृश्य दिखेगा, जो इसे इंदौर को सबसे अच्छी जगहों में से एक बनाता है। पहली किरणों को झील के ऊपर तैरते फूलों को देखना बेहतरीन होता है। आप यहां नौका विहार और घुड़सवारी जैसी कुछ गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, घाटी के पास स्थित हनुमान मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। आपको प्रकृति की गोद में कुछ समय बिताने का अवसर प्रदान करते हैं। जंगल में छोटे तालाब भी देख सकते हैं, जहां यशवंत सागर बांध से पानी आता है।

गुलावत
गुलावत

3. तिंछा फॉल :
इंदौर से यह करीब 25 किलोमीटर दूर नेमावर- मुंबई रोड पर स्थित है। यह भी भी बहुत ऊंचाई से झरना गिरता है। इंदौर के लोगों के लिए यह सबसे खास डेस्टिनेशन है। सिमरोल मेन रोड से 9 किलोमीटर अंदर है तिंछा फॉल। किसी प्रकार का की शुल्क नही सिर्फ गहरी पहाड़ियों में उतरने से बचे और यहा पर अंधेरा होने से पहले जगह से बाहर आ जाए। पहाड़ो के बीच बनी पानी के गड्डो में अकेले न जाए।

तिंछा फॉल
तिंछा फॉल

4. रालामंडल अभयारण्य :
शहर से 12 किलोमीटर की दूर स्थित रालामंडल अभयारण्य शानदार जगह है। यह चारों तरफ से जंगलों से घिरी हुई है। यहां टूरिस्ट को लुभाने के लिए डियर पार्क बनाया गया है। डियर पार्क में सफारी का मजा ले सकते हैं। इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 262 वर्ग फीट है। इसकी स्थापना होलकर महाराज के समय की गई थी। यह उनके मनोरंजन की एक प्रमुख जगह थी। शहर के सीमावर्ती वन्य क्षेत्र रालामंडल अभयारण्य में जल्द ही पर्यटक नाइट सफारी का आनंद सकेंगे।
शुल्क -- इस जगह आपको पार्किंग शुल्क के साथ साथ बेट्री वाली गाड़ी पर घुमने के भी रुपए देने होंगे। वन्य क्षेत्र होने से आप खाने पीने की कुछ चुनिदा वस्तु ही अंदर ले जा सकेंगे ।

रालामंडल अभयारण्य
रालामंडल अभयारण्य

5. शीतला माता फॉल :
इंदौर से करीब 60 किलोमीटर दूर यह स्थान है। मानपुर से यह जगह 3 किलोमीटर जानापावा की जगह है। यहां दो झरने हैं। शीतलामाता फॉल मानपुर गांव के पास स्थित है। ऊपर से गिरती हुई पानी की धाराएं यहां अच्छा पिकनिक स्थल बनाती हैं। यहां 3 प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। माना जाता है कि वह होलकर राज्य के पिंडारयों के छिपने की जगह हुआ करती थी।
शुल्क - इस जगह आप को जाते समय दो टोल टैक्स देने होंगे। यदि आप महू के अंदर से जाते है तो एक टोल और मानपुर हाई वे जाते है तो नेशनल टोल टैक्स देना होगा। पार्किंग के अलावा किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होगा।
पहाड़ों की बीच बने इस स्थल पर अधिकतर पर्यटक नहाने के लिए झरने के नीचे जाते हैं, वो खतरनाक है, पहाड़ों के बीच बने खो में पैर फंसने से हादसे की आशंका अधिक रहती है।

शीतला माता फॉल
शीतला माता फॉल

6. कजलीगढ़ :
इंदौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर सिमरोल से यहां के लिए रास्ता जाता है। किले के आसपास की वादियां हरी-भरी होने से यहां का नजारा मनमोहक नजर आ रहा है। यहां बारिश के दाैरान बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं शहर से दूर होने के कारण यह जगह वीरान है लेकिन अब धीरे धीरे पुरातत्व विभाग इस पर कार्य कर रहा है।
कोई शुल्क नहीं -- इस जगह किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं है। सिर्फ दिन में इस किले को देखने जा सकते हैँ, लेकिन शाम होने से पहले मुख्य मार्ग पर आना जरूरी है। अन्यथा रात में जंगल में भटक सकते हैं।

कजलीगढ़
कजलीगढ़

7. दरवाजा (जाम गेट) -

इंदौर से महू होते हुए मंडलेश्वर जाने वाले रोड पर मालवा और निमाड़ के बीच के चेक पॉइंट पर स्थित है एक सुरम्य और रमणीय स्थल। इस स्थान का नाम है जाम गेट। एक बहुत ही सुंदर गेट है, यह जो अब भी अच्छी स्थिति में है। इतिहास में इस दरवाज़े का खास महत्व मिलता है। जाम गेट इंदौर से करीब 50 किलोमीटर और मंडलेश्वर से 28 किलोमीटर दूर घाट पर घने जंगल में बना है। यहाँ पहुँचने के लिए निजी गाड़ी से जाना ज्यादा ठीक रहता है।
शुल्क- दो पहिया और चार पहिया वाहनों का शुल्क लिया जाता है। वहीं किले में आप अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। एक नेशनल हाई वे पर टोल टैक्स भी चुकाना होगा।

(जाम गेट)
(जाम गेट)

8. चोरल डैम -
खूबसूरत स्थान में पहुंच कर यहां की बोट राइडिंग की सवारी आपको बेहद सुकून देगी । यहां पर पहाड़ों से बहती हुई चोरल नदी में बनाया गया यह डैम अब पर्यटन स्थल भी बन चुका है। इस स्थान में पर्यटकों को रुकने के लिए सुजज्जित रिसोर्ट बना हुआ है । यहां पर खाने की उत्तम व्यवस्था के साथ साथ यहां रुकने के लिए भी अच्छा प्लेस है ।
चोरल डैम तक पहुंचने के लिए इंदौर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी यह महू मार्ग पर पड़ता है तथा पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।
शुल्क: एक टोल नाके के साथ बोटिंग करने का शुल्क, लेकिन यहां पार्किंग शुल्क नहीं लगाता है

चोरल डैम
चोरल डैम

9. जानापाव कुटी -

इंदौर से करीब 40 किलोमीटर दूर एबी रोड पर जानापाव कुटी है। यह भगवान परशुराम का जन्म स्थान भी माना जाता है। जंगली गलियारों से गुजरते हुए प्राकृतिक वातावरण के नैसर्गिक आनंद लेते हुए पर्यटक जानापाव कुटी पहुंचते हैं। यहां के शानदार प्राकृतिक वातावरण के दृश्य को देखकर अचंभित रह जाते हैं। कल कल करती नदियां, झरने, और जंगली जानवर यहां आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। कुछ नदियों का उद्गम स्थल भी जानापाव पहाड़ी है। इसमें चंबल नदी, गंभीर नदी, सुमरिया नदी, बेरम नदी, चोरल नदी, कारम नदी, कलेश्वरी नदी शामिल है।

जानापाव कुटी
जानापाव कुटी

शहर में मौजूद कुछ ऐतिहासिक स्थान
1. कृष्णा बाई होल्कर छतरी
इंदौर के बीचोंबीच बसा मेन मार्केट में राजबाड़ा के पास में स्थित है। ये ऐतिहासिक स्थान होल्कर राजवंशों की समाधियों के लिए जाना जाता है। इसी जगह पर होल्कर साम्राज्य के शिवाजीराव, तुकोजीराव, यशवंतराव, कृष्णा बाई होल्कर और मनोरमा राव की समाधियां है।

कृष्ण पुरा होल्कर छतरी
कृष्ण पुरा होल्कर छतरी

2 . राजबाड़ा

राजबाड़ा होल्कर राजवंश के शासकों की ऐतिहासिक हवेली है। इस महल का निर्माण लगभग 200 साल पुराना और आज तक ये महल पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षक केंद्र है। इंदौर शहर में स्थित एक राजशाही महल हैं। इस महल का निर्माण लगभग 200 साल पहले हुआ था और आज तक यह महल पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण रखता है। इस महल की वास्‍तुकला, फ्रैंच, मराठा और मुगल शैली के कई रूपों व वास्‍तुशैलियों का मिश्रण है। राजबाड़ा अपने इतिहास में तीन बार जल चुका है और 1984 में लगी अंतिम आग ने इसे भीषण क्षति पहुंचायी है। आज केवल बाहरी हिस्सा यथावत है, लेकिन अब इसका जीर्णोद्धार का भी सतत जारी है।

राजबाड़ा
राजबाड़ा

3. कमला नेहरु प्राणी संग्रहालय चिड़ियाघर
प्रदेश का सबसे पुराना कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय 1974 में शुरू हुआ था। 52 एकड़ में फैले शहर के मध्य यह प्राणी संग्रहालय में अब 60 प्रजाति के 650 वन्यजीव हैं। सेंट्रल जोन में इंदौर का चिड़ियाघर इकलौता ऐसा प्राणी संग्रहालय है, जहां आम दिनों में ही वन्य प्राणियों को देखने पहुंचने वाले दर्शनार्थियों
की संख्या 15 से 20 हजार होती है, यहां प्रति दर्शक 20 रुपए की दर से प्राणी संग्रहालय में प्रवेश शुल्क की व्यवस्था है। इस हिसाब से संग्रहालय को हर साल 3 से 4 करोड़ रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है, जोकि अन्य राज्यों के बड़े प्राणी संग्रहालय से दोगुने के बराबर है।

कमला नेहरु प्राणी संग्रहालय
कमला नेहरु प्राणी संग्रहालय

इंदौर में इन धार्मिक स्थलों पर जाया जा सकता है

1. खजराना गणेश मंदिर: इंदौर के प्रमुख मंदिर खजराना एक गणेश मंदिर है। यहां पर भगवान गणेश की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है जो दर्शनार्थियों को अपने तरफ आकर्षित करती है। जराना मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां उल्टा स्वस्तिक बनाने से मनचाही मनोकामनाएं पूरी होती है। इसकी वजह से आने वाले श्रद्धालु गणेश की प्रतिमा पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। मन्नत पूरी होने पर वापस मंदिर में सीधा स्वस्तिक बनाते हैं। लड्डुओं का भोग भी चढ़ाते हैं। वैसे तो इस मंदिर में श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है, लेकिन बुध्ववार को इस मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

खजराना मंदिर
खजराना मंदिर

2. इस्कॉन मंदिर -

राधा कृष्ण के प्रेम को समर्पित इस्कॉन मंदिर मुख्यतः बड़े शहरों में है। इसी तर्ज पर इंदौर में भी मौजूद है। मंदिर की नक्काशी इतनी खूबसूरत है कि इसकी कलाकृतिया पर्यटकों को देखते बनती है। अगर आप राधा कृष्णा के भक्त हैं तो एक बार इस्कॉन मंदिर अवश्य जाएं। यहां जाकर मंदिर की नक्काशी देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे।

इस्कॉन मंदिर
इस्कॉन मंदिर

3. अन्नपूर्णा मंदिर -

अन्नपूर्णा मंदिर में सैकड़ों सैलानी रोजाना घूमने के लिए आते हैं। ये मंदिर अध्यात्मिक लोगों के लिए तीर्थ स्थान है। अन्नपूर्णा मंदिर अब नया स्वरूप लेगा। 20 करोड़ से अधिक की अनुमानित राशि और संगमरमर से अन्नपूर्णा माता के लिए नया मंदिर बनाया है। नए मंदिर का निर्माण वर्तमान मंदिर से करीब 50 फीट पीछे 6600 वर्गफीट में किया है। इसमें वर्तमान मंदिर में स्थापित माता अन्नपूर्णा, कालका और सरस्वती माता की स्थापना की। मंदिर की लंबाई 108 फीट और चौड़ाई 54 फीट है। मुख्य कलश की ऊंचाई 81 फीट है । इंदौर में सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है इस मंदिर की भव्यता और इसकी स्थापत्य सौंदर्य दूर से ही दिखाई देता है।

अन्नपूर्णा मंदिर
अन्नपूर्णा मंदिर

4. स्वामी नारायण मंदिर

शहर के खंडवा रोड पर 14 महीने में 20 करोड़ की लागत से स्वामी नारायण मंदिर बनाया गया है। एक एकड़ में मंदिर का निर्माण 110 बाय 75 वर्गफीट में हुआ है, जबकि जमीन से कलश की उंचाई 91 फीट है। मंदिर में पांच शिखर और 4 गुंबद के साथ कुल 238 स्तंभ हैं। इन पर संत-गंधर्वों की 90 मूर्तियां लगाई गई हैं। इसके साथ ही फूल, मोर और बेलबूटे की बारीक नक्काशी हुई है।

ये खूबसूरत मंदिर नारायण विष्णु को समर्पित है। इसकी कारीगरी इतनी खूबसूरत तरीके से की गयी है कि दर्शनार्थी इस मंदिर की नक्काशी देखकर तारीफ करना नहीं भूलते। यदि आप दार्शनिक स्थानों को देखने में रूचि रखते हैं तो एक बार इस मंदिर को जरूर विजिट करें।

स्वामी नारायण मंदिर
स्वामी नारायण मंदिर

5. कांच मंदिर

यह मंदिर जैन धर्म को समर्पित है। इस मंदिर के बाहरी हिस्से को सफेद पत्थर से बनाया गया है। मंदिर का आतंरिक हिस्सा पूरी तरह से कांच से बनाया गया है। यहां खम्भे हो या फिर दीवारे, छत, फर्श सब कुछ कांच के बने हुए है। इसी वजह से इसका नाम कांच मंदिर पड़ा।

कांच मंदिर
कांच मंदिर