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इंदौर के 'नागलोक' की कहानी:घरों में नजर आते थे सैकड़ों सांप, अब रोजी-रोटी का संकट, सपेरे बोले- एक दिन की छूट दें तो बड़ी राहत मिलेगी; अजीत जोगी ने बसाया था ये मोहल्ला

इंदौर2 महीने पहलेलेखक: हेमंत नागले
सपेरों के बदहाल घर और सांप दिखाता एक सपेरा।

इंदौर की पहचान देश के सबसे साफ और स्वच्छ शहर के रूप में है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां नाथ नाम का इलाका भी है। यहां सपेरों के परिवार रहते हैं। कभी हर घर में सांप नजर आया करते थे। बच्चे सांपों के साथ खेला करते थे। यह परिवार नागपंचमी सहित अन्य दिनों में नाग देवता के दर्शन करवाकर रोजी-रोटी जुटाते थे। अब इन सपेरों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसका कारण सांप को पकड़ने या लेकर घूमने पर पाबंदी लगना है। सपेरों का कहना है कि यदि हमें सिर्फ नागपंचमी पर ही इसकी छूट मिल जाए तो बड़ी राहत मिलेगी।

दैनिक भास्कर नागपंचमी पर बता रहा है इंदौर के नाथ मोहल्ला की कहानी...

200 घरों वाले नाथ मोहल्ले को तत्कालीन इंदौर कलेक्टर और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बसाया गया था। यहां एक घर भी ऐसा नहीं था, जहां सांप आपको नजर न आएं। यह परंपरा कुछ वर्षों पहले तक थी। सन-प्रशासन की सख्ती के बाद अब यहां सांप नहीं हैं। उन्हें रखने वाले पिटारे खाली हैं। सांप पकड़ने और लेकर घूमने पर लगे प्रतिबंध के बाद इन परिवारों को दो जून की रोटी जुटा पाना मुश्किल हो गया है।

दिनेश जिसके पैर में रॉड पड़ी है।
दिनेश जिसके पैर में रॉड पड़ी है।

सांप लेकर घूमने पर ऐसे पीटा कि पैर में डालना पड़ी रॉड
बुजुर्ग लीलाबाई ने बताया कि कुछ साल पहले नागपंचमी पर हिमाचल के रहने वाले प्रकाश और उसके भाई दिनेश को अज्ञात लोगों ने इतना मारा कि दोनों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। मारपीट में घायल प्रकाश ने तो कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया था। दिनेश के पैर में रॉड डालनी पड़ी थी। इतना ही नहीं उसे सांप लेकर घूमने पर जेल तक की हवा खाना पड़ी थी। उनकी गाड़ी तक विभाग वालों ने जब्त कर ली थी, जिसे वह आज तक नहीं छुड़वा पाए। दिनेश के पैर में आज भी रॉड डली हुई है।

नाथ मोहल्ले में घूमते बच्चे।
नाथ मोहल्ले में घूमते बच्चे।

सांप पकड़ने के लिए रात में भी आते हैं फोन
मोहल्ला में रहने वाले नर्गिस ने बताया कि आज भी ऐसे कई मौके आते हैं कि जब देर रात लोग घरों में सांप घुसे होने पर बुलाने आते हैं या फिर कॉल करते हैं। हम सांप को देवता मानते हैं, यही कारण है कि बिना किसी डर के उन्हें पकड़ने जाते हैं। कुछ लोग सांप का जहर उतारने के लिए बस्तियों में जड़ी-बूटियां भी लेकर जाते हैं, लेकिन प्रशासन अब इतना सख्त हो गया है कि शहर में सांप लेकर घूमता देखा तो हवालात तक भेज देता है।

इनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि आज भी लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता है।
इनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि आज भी लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता है।

अब तो छतों से भी रिसता है पानी
सांप पकड़ने को लेकर लगे प्रतिबंध के बाद इनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है। इस इलाके में जितने भी मकान हैं, उनकी दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। बारिश का पानी घर के भीतर ही टपकता है। मोहल्ले की सड़कें इतनी संकरी हैं कि दो पहिया वाहन चलाना भी मुश्किल है। इनकी सरकार से एक ही गुजारिश है कि नागपंचमी पर सिर्फ 1 दिन इन्हें सांप घुमाने की छूट मिल जाए। इससे वे अपने साल भर का राशन और कपड़ों का इंतजाम कर लेंगे।

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घर की दीवारें आर्थिक हालत बयां कर रही हैं।
घर की दीवारें आर्थिक हालत बयां कर रही हैं।
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