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मदद के लिए चीख:मैं पैरों से पूरी तरह जल चुका हूं, अब नहीं बच पाऊंगा, मम्मी-पापा का ध्यान रखना

इंदौर21 दिन पहले
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घर के चिराग दो गाड़ियों के बीच फंसे हुए थे। इनमें से केवल एक रोहित का चेहरा और हाथ दिख रहा था। वह मदद के लिए चीख रहा था। माता-पिता टूटे कांच पर चलते हुए लहूलुहान हो गए। गाड़ी में पहुंचकर उसे निकालने की कोशिश करने लगे, लेकिन तभी धुएं का बवंडर उठा और गाड़ी लपटों से घिर गई। माता-पिता को परिजन ने बाहर खींच लिया।

इधर, अब तक मदद के लिए चीख रहा बेटा समझ गया अब कुछ नहीं हो सकता तो कहने लगा काका, मैं पैरों से झुलस गया हूं, अब नहीं बचूंगा। मम्मी-पापा का ध्यान रखना। गाड़ियां देर तक लपटों से घिरी रहीं और बाहर परिजन बेबसी की आग में झुलसते रहे। परिवार के तीन चिराग बुझ चुके थे। उनके कंकाल ही शेष रह गए। यह हृदयविदारक हादसा द्वारिकापुरी निवासी संतोष शर्मा के परिवार के साथ हुआ।

दिवाली पूजन के बाद मथुरा व राजस्थान दर्शन के लिए निकले थे। शुक्रवार तड़के 3.30 बजे बरखेड़ा खुर्द (गुना) में ट्रेवलर खड़े कंटेनर में घुस गया। ड्राइवर सीट के पास बैठे माधव (20) पिता जगदीश शर्मा, दुर्गा (13) जगदीश शर्मा व रोहित (19) रामकिशन शर्मा की मौत हो गई।

20 लोग थे, पीछे का दरवाजा खुलने से बाकी लोग बच गए
परिवार के संतोष शर्मा ने बताया कि ट्रेवलर में परिवार के 20 सदस्य थे। ड्राइवर नीलेश खत्री को तेज चलाने पर दो बार टोका भी। वह नशे में भी लग रहा था। हादसे के बाद वह उतर गया, लेकिन गाड़ी का आगे का छह फीट का हिस्सा कंटेनर में फंस गया। पीछे का गेट खुलने से बाकी बच गए। तीनों बच्चों के शव पोटलियों में लेकर आए और अंतिम संस्कार किया।

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