इंदौर में IIT खड़गपुर के स्टूडेंट ने जान दी:सुसाइड नोट में लिखा- पापा आप जिद्दी थे, आपको हमारे साथ ज्यादा टाइम स्पेंड करना था

इंदौर3 महीने पहले

इंदौर में नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी (NVDA) के अफसर के बेटे ने बुधवार रात फांसी लगा ली। वह IIT खड़गपुर का छात्र था। उसने दो पेज का सुसाइड नोट छोड़ा है। मृतक सार्थक ने पापा को जिद्दी तो मां को मजबूर बताया। पुलिस का मानना है कि वह डिप्रेशन में था।

सार्थक जे विजयवत (19) स्कीम नंबर-78 में रहता था। पिता ब्रजेश कुमार NVDA में एडिशनल डायरेक्टर हैं। वह कई महीनों से घर पर रहकर ऑनलाइन ही पढ़ाई कर रहा था।

पढ़ें सार्थक का सुसाइड नोट:

सॉरी! और अब क्या ही बोल सकता हूं। जिन उम्मीदों से JEE की तैयारी की थी, उनके टूटने के बाद ही सब कुछ बिगड़ता चला गया। कहां सोचा था कि कैम्पस जाऊंगा, एन्जॉय करूंगा और कहां ये ऑनलाइन असाइनमेंट में फंस गया। शायद टाला जा सकता था। कई लोगों के पास मौका था, लेकिन कुछ नहीं किया। शायद कोई बाहरी मकसद (utterior motive) होगा। खैर अब आता ही क्यों, क्योंकि हिम्मत नहीं बची प्रॉब्लम्स झेलने में और कारण नहीं बचा आगे जीने के लिए।

फैमिली भी शानदार है। पापा जिद्दी। मम्मी मजबूर। वात्सल्या मासूम। संभालूं तो किस-किस को। पापा आपको थोड़ा सा ज्यादा टाइम स्पेंड करना था हम सबके साथ। बात करनी चाहिए थी हमसे। जितनी बात अपने भाई-बहनों से करते, उससे आधी भी हमसे करते तो चल जाता।

देवेंद्र काका क्या बोलूं यार मैं आपको। थोड़ा ज्यादा अंडरस्टैंडिंग होते तो मजा आ जाता। आप भी राजू काका जैसे तो खूब दिमाग चलाया होगा लेकिन दूसरों का भी तो सोचते यार। आपका और पापा का नेचर एक था तो आपसे ही एक्पेक्ट करता था कि हम पर क्या गुजरती होगी। जब भी कोई पापा का मजाक उड़ाए, यार राजू काका, आपने बहुत निराश किया.. एट द एंड।

दोनों काकीजी की ज्यादा गलती नहीं है। उनका तो नेचर ही ऐसा था।और एक खड़ूस का तो नाम नहीं लूंगा, लेकिन मुझसे इतना सारा एक्सपेक्ट करने से पहले पूछ लेते यार। प्रेशर नहीं हैंडल कर पाया मैं।

मम्मी, बहुत सोचा, लेकिन फिर भी आपको सपोर्ट करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाया। हो सके और कभी घूमने जाओ तो सोच लेना मैं आपके साथ हूं। खुद घुमाने नहीं ले गया आपको, फिर भी साथ हूं आपके।

मां समझ रहा हूं कि आप अकेली रह जाओगी, लेकिन और बर्दाश्त नहीं हो रहा। सॉरी मम्मी। मन था कहने का तो लिख दिया। आई क्विट।

सार्थक का परिवार स्कीम नंबर-78 में रहता है। सार्थक की मौत के बाद रोते परिजन।
सार्थक का परिवार स्कीम नंबर-78 में रहता है। सार्थक की मौत के बाद रोते परिजन।

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