इंदौर में बोले सलमान खुर्शीद ​​​​​​​:मैं हिंदुत्व का सम्मान करता हूं पर इस्लाम के खिलाफ कुछ कहेंगे तो विरोध मेरा अधिकार

इंदौर3 महीने पहलेलेखक: अंकिता जोशी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, सीनियर एडवोकेट और जाने माने लेखक सलमान खुर्शीद का मानना है कि देश का माहौल अच्छा नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहरा आघात हुआ है। आज भारत में लोग सुखी नहीं दिख रहे। हमारा नाम दुनिया के उन देशों में शामिल नहीं किया जा सकता जहां चैन-ओ-अमन है। इसका पहला कारण है लालच और दूसरा है ऐसे नेतृत्व की कमी जो अवाम की सोच में आमूलचूल परिवर्तन ला सके। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने हिंदुत्व, इस्लाम, लचर विपक्ष और उदयपुर हिंसा पर भी बात की। बड़ नपे-तुले शब्दों में ही सही, पर देश से जुड़े जलते सवालों पर पढ़िए खुर्शीद के जवाब...

Q. देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बना हुआ है। हम फिर वहां पहुंच गए हैं जहां से चले थे। इसकी बड़ी वजह क्या मानते हैं ?
A. यह दुर्भाग्यपूर्ण और बड़ी विडम्बना है। मैं यह पूछना चाहता हूं कि क्या यह हमारे किरदार में है ? या फिर इन बातों को जान-बूझकर बढ़ावा दिया जा रहा है। बढ़ावा दिया जा रहा है यह स्पष्ट है। अलग अलग समुदायों और जाति-विशेषों में जो कटुता बढ़ गई है, जिस तरह के घिनौने आरोप वे एक-दूसरे पर लगा रहे हैं उसकी तह में राजनैतिक कारण हैं। मुझे ऐसा लगता है कि जिस देश में हम पले-बढ़े हैं, जिस देश को देखा-समझा है उस देश की प्रवृत्ति, उसका चरित्र यह नहीं है। इस देश के लोगों की सोच ऐसी नहीं है। किसी ने इसे बिगाड़ने का प्रयास किया है, बिगाड़ा है और बिगाड़ रहे हैं लेकिन मेरा विश्वास है कि वो इसमें सफल होंगे। माहौल इतना अजीब हो गया है कि कोई यह बात कहता भी है तो कुंठा बढ़ती है, तनाव बढ़ता है। मैं समझता हूं कि हमें थोड़ा संयम रखना होगा। इंसाफ तत्काल मिल जाए, यह सोचेंगे तो देश के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। न्याय पाने की जल्दबाजी में हम संयम खो रहे हैं और जब संयम खो जाता है तो इंसान इतना नीचे गिर जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं होती। यह लीडरशिप की बात है। हर क्षेत्र के लोग जो नेतृत्व में हैं, उन्हें यह करके दिखाना होगा।

Q. जाति पर विवाद पहले भी होते रहे हैं, क्या कारण है कि लीडर हालात पर काबू कर ही नहीं पा रहे ?
A. दो जातियों में बंटवारे की भावना जितना फायदा दे सकती थी, दे चुकी। पहले संकट इस बात का था कि उन्हें लोगों को प्रभावित करना था। अब 10 साल हो चुके हैं और इते सालों में जिन्हें प्रभावित होना था हो चुके, जिनका मोह भंग होना था वह भी हो चुका। अब इससे ज्यादा कुछ पाएंगे नहीं।

Q. उदयपुर में कन्हैया की हत्या के पीछे सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर की बयानबाजी को जिम्मेदार बताया है। देश की सर्वोच्च संस्था की ओर से यह स्टेटमेंट क्या आप सही मानते हैं। क्या इससे ऐसे अन्य आतंकियों को आड़ नहीं मिल गई ऐसे घृणित कृत्य करने की?
A. सुप्रीम कोर्ट से ऊंची और कोई संस्था हमारे पास है नहीं। अगर हम सहमत नहीं है तो हम आदर पूर्वक कहें। कहें कि इस पर पुर्नविचार किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को समझ नहीं है, सुप्रीम कोर्ट पक्षपात कर रहा है यह कहना गलत है। देश में जो रहा है वह देख कर कोई भी समझदार व्यक्ति यही कहेगा कि यह देश के लिए अच्छा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को इतने कठोर शब्द इस्तेमाल करने चाहिए या नहीं यह हम नहीं समझ पाएंगे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पर कितने दबाव हैं हम उससे बेखबर हैं। सुप्रीम कोर्ट यह कह रहा है कि ऐसी भड़काऊ बयान बाज़ी न की जाए। काला कोट पहनकर जो उस कोर्ट में काम करते हैं, वह भी हल्के शब्दों में उस संस्था की बुराई कर रहे हैं। यो तो वे कोर्ट जाना छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आखिरी पड़ाव हैं, पर ऐसा नहीं है कि हम गलती नहीं करेंगे। इसीलिए तो रिव्यू की परम्परा बनाई गई है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 50 साल बाद एक कानून बदला। यह हमारे यहां भी हुआ है। डॉक्टर को यदि आपने कह दिया कि वह बेकार है, तो फिर इलाज खुद ही करना होगा। सुप्रीम कोर्ट को नकार देंगे तो फिर किसके पास जाएंगे अपनी बात लेकर।

Q. देश की व्यवस्था सही ढंग से चलती रहे, इसके लिए मजबूत विपक्ष का होना बहुत जरूरी है। क्या कारण है कि कांग्रेस इस भूमिका में आ ही नहीं सकी। विपक्ष इतना लचर क्यों है? कांग्रेस के पास कोई चेहरा ही नहीं है।
A. जब व्यापक रूप से सोच बदलती है तो आपको खुद को भी बदलना होता है। बड़ी शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है, जब वह यह समझ ही नहीं पाती कि क्या बदलाव हुआ है। नौजवानों का एक नया वर्ग देश में तैयार हुआ है जो बदलाव चाहता है। वह चाहता है कि जो पहले से राज करता आ रहा है उसे नकार कर नए चेहरों को मौका दिया जाए। पंजाब और दिल्ली में जो बदलाव आया वह इसी सोच से आया। मुझे लगता है कि कांग्रेस कसे बहुत गंभीरता से यह सोचना होगा कि देश और देश की सोच में ऐसा क्या बदलाव आया है जिसमें हम फिट नहीं हो पा रहे। आत्मावलोकन का समय है यह।

Q. क्या आपको लगता है कि आम आदमी की अभिव्यक्ति का स्वतंत्रता पर आघात हुआ है ?
A. देश का माहौल अच्छा नहीं है। आज भारत में लोग सुखी नहीं दिख रहे। हमारा नाम दुनिया के उन देशों में शामिल नहीं किया जा सकता है जो सुखी हैं, जहां चैन-ओ-अमन है। पहला कारण यह है कि लालच बहुत बढ़ गया है। ऋषि मुनियों को उनके ज्ञान को भूल हम पैसों की पूजा करने लगे हैं। जब पैसा नहीं चलता है तो हम धर्म की शरण में जाते हैं। अब हमें ऐसी लीडरशिप चाहिए जो इस सोच में आमूलचूल परिवर्तन ला सके, जैसे महात्मा गांधी ने किया था। इमरजेंसी के समय कहा गया था कि हल्के चलो, तो आप रेंगने लगे। कुछ लोगों ने बोलने के नुकसान उठाए हैं, लेकिन हर कोई सलाखों के पीछे तो नहीं हैं। यह सरकार भी समझ जाएगी कि अपनी बात मनवाने का यह कोई उपाय नहीं है लेकिन समझाने वाले भी तो होने चाहिए।

Q. हिंदुत्व पर आपने किताब लिखी जो काफी विवादों में भी रही। आज के दौर में आप हिंदुत्व को कैसे देखते हैं ?
A. मुझे हिंदुत्व से कोई समस्या ही नहीं है। क्यों होगी ? मुझे भी बताइए कि इस धर्म की क्या-क्या अच्छी बातें हैं। मैं अपने ईमान के बारे में उन्हें बताऊंगा। हिंदु धर्म और हिंदुत्व के खिलाफ कोई कुछ गलत कहता या करता है तो उसका विरोध किया जाता है। इसी तरह जब इस्लाम के साथ कुछ ऐसा होता है तो मैं उसका उसका विरोध करता हूं। मुझे इस्लाम को गलत ढंग से प्रस्तुत करने पर विरोध करने का अधिकार है। इस पर आपत्ति क्यों ? अगर आप किसी काे जलाते हो, मारते हो, उसका गला काटते हो तो वह न हिंदु धर्म है न ही इस्लाम। यही तो मैं कह रहा हूं कि यह न तो हिंदुत्व है, न ही जिहाद है। जिहाद का नया मतलब बनाकर अपने फायदे के लिए लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। मुझे गर्व है हिंदू धर्म पर। यह बहुत व्यापक और उच्च विचारधारा है। कुछ लोग उसे नीचा दिखा रहे हैं। वो लोग इतने गलत हैं कि जब मैं हिंदुत्व के खिलाफ ऐसी सोच को रेखांकित करता हूं तो वे उसे भी हिंदुत्व पर हमला बताते हैं। जो हिंदुत्व को नहीं समझेगा, वह इस देश को समझ ही नहीं सकता। मैं हिंदू धर्म का सम्मान करता हूं लेकिन इस्लाम की सभ्यता को भी समझना होगा क्योंकि इस देश में सब साथ रहते हैं। नाम बदल देने से वह सभ्यता सामप्त नहीं होगी। किसी के इबादतगाह को तोड़ देने से आखिर क्या पाएंगे ?

Q. आपके व्यक्तित्व पर, विचारों पर किसका असर सबसे ज्यादा और गहरा है।
A. मेरे नाना डॉ. ज़ाकिर हुसैन का। हम उन्हें मियां कहते थे। एक दिन मैंने उनसे पूछा कि मियां मुसलमान क्या है, कौन है ? वह बोले - जो अंधेरी रात में अपने गुनाहों पर रोए, उन्हें कभी न दोहराने का इरादा करे, वह मुसलमान है। अब इस वाक्य में आप मुसलमान की जगह हिंदू लिख दीजिए... वाक्य उसके लिए भी वही रहेगा।