पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अवैध निर्माण बढ़ने से रोकना चुनौती:फ्रंट MOS छोड़ा है तो मिलेगा 30% कंपाउंडिंग का फायदा

इंदौरएक महीने पहलेलेखक: दीपेश शर्मा
  • कॉपी लिंक
एमआर 9 क्षेत्र (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
एमआर 9 क्षेत्र (फाइल फोटो)
  • कंपाउंडिंग के नए नियम से अवैध निर्माण बढ़ने से रोकना चुनौती

राज्य सरकार के अवैध कॉलोनियों और कंपाउंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का असर इंदौर की 596 अवैध कॉलोनियों पर पड़ेगा। इन कॉलोनियों के वैध होने से लोन सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं रहवासियों को मिलने लगेंगी। वहीं 30 प्रतिशत कंपाउंडिंग से फायदा हाईराइज बिल्डिंग को मिलेगा, क्योंकि 80 प्रतिशत लोगों द्वारा फ्रंट एमओएस नहीं छोड़ा जाता।
इंदौर में वैध कॉलोनियों की संख्या 1163 हैं। शहर के कुल घरों की संख्या 6 लाख के लगभग मानी जाती है। इसमें दो लाख अवैध काॅलोनियों में हैं। मप्र नगर पालिका विधि में संशोधन के अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यह सभी घर नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आ जाएंगे और यहां नक्शे, बिल्डिंग परमिशन सहित अन्य कर निगम को प्राप्त होने लगेंगे। हालांकि इन काॅलोनियों के विकास कार्यों की राशि कॉलोनाइजरों से वसूल करने की बात भी अध्यादेश में है। इसका पालन कैसे होगा यह गजट नोटिफिकेशन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
80% लोग नहीं छोड़ते एमओएस
सिटी प्लानर विष्णु खरे के मुताबिक इंदौर में 80 प्रतिशत भवनों में फ्रंट एमओएस का पालन नहीं किया जाता। 30 प्रतिशत तक कंपाउंडिंग का अधिकार उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन्होंने फ्रंट एमओएस छोड़ा है। नियमानुसार घरों में 3 मीटर से 15 मीटर एमओएस प्लाॅट और सड़क की चौड़ाई के आधार पर छोड़ना होता है। अवैध कॉलोनियों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है क्योंकि यहां लोगों ने एमओएस छोड़ा ही नहीं है। कंपाउंडिंग का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो फ्रंट एमओएस छोड़ते हैं। हाईराइज बिल्डिंग में इसका पालन होता है तो कंपाउंडिंग से ज्यादा फायदा उन्हें ही मिलेगा।
जानिए क्या है कंपाउंडिंग? अभी तक सिर्फ 10% का नियम था

अब तक 10% कंपाउंडिंग का ही नियम है। इसके बावजूद लोग अवैध निर्माण पर कंपाउंडिंग नहीं करवाते हैं। दो साल पहले निगम ने शिविर लगाकर कंपाउंडिंग के लिए लोगों को बुलाया था। पिछले साल कोरोना के कारण बहुत कम लोगों ने कंपाउंडिंग करवाई। अभी कंपाउंडिंग दो तरह से होती थी। जिसने एमओएस में निर्माण नहीं किया है और निर्माण तय एफएआर से 10% के अंदर है तो बिल्डिंग परमिशन फीस का पांच गुना राशि ली जाती थी। बिल्डिंग परमिशन फीस 200 से 50 हजार तक अलग-अलग रेट जोन के हिसाब से होती है। दूसरी तरह की कंपाउंडिंग एमओएस कवर होने की स्थिति में की जाती है। इसके तहत गाइडलाइन के आधार पर 5% राशि ली जाती है।

पिछले साल निगम ने वसूले 29.47 करोड़
यह तय है कि नए अध्यादेश के बाद निगम की आमदनी में बड़ा इजाफा होगा। पिछले वित्तीय वर्ष में निगम के बिल्डिंग परमिशन विभाग ने 29.47 करोड़ की आमदनी की है। इसमें एप्लीकेशन फीस, कमर्शियल फीस, कंपाउंडिंग फीस, डिमॉलेशन चार्जेस, डेवलपमेंट फीस, ड्रेनेज, नर्मदा रेवेन्यू, पार्किंग फीस, वाटर कनेक्शन, वाटर हार्वेस्टिंग सहित 31 मद हैं।

यह बड़ी चुनौती...ध्यान रखना होगा नई अवैध कॉलोनियां बन न हो जाएं

निगम के रिटायर्ड अधीक्षण यंत्री एनएस तोमर ने कहा यह अध्यादेश बहुत अच्छा है। कॉलोनाइजरों से ही विकास शुल्क लिया जाना चाहिए। इससे वहां सालों से रह रहे लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। हालांकि इसके साइड इफेक्ट के रूप में तेजी से नई अवैध कॉलोनियां खड़ी होने का खतरा भी है। कंपाउंडिंग में 30 प्रतिशत की छूट मिलने से लोग 50 प्रतिशत तक अवैध निर्माण शुरू कर देंगे। इस पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम को सख्त मॉनिटरिंग रखना होगी।

खबरें और भी हैं...