इंदौरियों का जज्बा; 85 वर्षीय वृद्धा ने की देह दान:15 दिनों में 20 लोगों ने आंखें डोनेट कर 40 लोगों की अंधेरी जिंदगानी में किया उजियारा

इंदौरएक महीने पहले
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स्व. मनोरमा घोलप - Dainik Bhaskar
स्व. मनोरमा घोलप

शहर के लोगों में देह दान और आंखें दान करने को लेकर लगातार जागरुकता आ रही है और वे मृत्यु पूर्व इसे लेकर संकल्प पत्र भर रहे हैं। दूसरी ओर परिजन में भी इसके लिए आगे आ रहे हैं। शहर में 2015 से अब तक 42 ग्रीन कॉरिडोर बन चुके हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को एक 85 ‌वर्षीय वृद्धा की मृत्यु के बाद उनकी इच्छानुसार मेडिकल कॉलेज को उनकी देह दान की गई। खास बात यह कि बीते 15 दिनों में शहर के 20 लोगों ने मृत्यु उपरांत अपनी आंखें डोनेट की हैं जिससे 40 लोगों की अंधेरी जिंदगानी में उजियारा हुआ है।

सोमवार सुबह 9 बजे सुदामा नगर निवासी मनोरमा पति स्व. नारायणराव घोलप (85) की घर पर मौत हो गई। उन्हें सांस संबंधी बीमारी थी। वह पेशे से सरकारी अस्पताल में नर्स थी तथा 1996 में रिटायर्ड हुई थी। पति सिंचाई विभाग में थे तथा 1995 में उनकी मृत्यु हुई थी। परिवार में चार बेटियां व एक बेटा है। इन सभी की शादी हो चुकी है। 85 साल की उम्र होने के बाद भी वह अभी तक एक्टिव थी तथा अकसर बेटियों के पास ही रहती थी। सोमवार को उन्होंने बेटी ज्योति केदारे के घर अंतिम सांस ली।

2017 में जिंदा रहने के दौरान किया था पिंड दान, दसवां और तेरहवां का आयोजन

दामाद राजेंद्र केदारे ने बताया कि वह काफी संजीदा महिला थी। चूंकि नर्स के रूप में सालों तक मानव सेवा की थी, इसके चलते वह लोगों की परेशानियों से वाकिफ थी। उनका मानना था कि मेरा शरीर किसी के काम आए तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। इसके चलते उन्होंने 2017 में देह दान का संकल्प लिया और मुस्कान ग्रुप में फॉर्म भरा था। खास बात यह कि उनकी दिली इच्छा थी कि उनके जिंदा रहने के दौरान मृत्यु पश्चात होने वाले सारी परम्परा पूरी की जाए। इसके चलते उन्होंने 2017 में ही अपने भतीजे हेमू घोलप के हाथों अपने सामने ही अपना पिंड दान, दसवां और तेरहवां का कार्यक्रम किया। इस दौरान उन्होंने खुद अपने हाथों परिवार के सारे लोगों को भोजन परोसा। साथ ही कहा था कि अब इसके बाद किसी के मृत्यु भोज में शामिल नहीं होगी और आखिरी तक संकल्पित रही। सोमवार को मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य आदि ने उनकी देहदान की सारी प्रक्रिया पूरी कराई।

…और इन 20 लोगों ने किया दूसरों की जिंदगी में उजियारा

इधर, शहर में तेजी से नेत्र दान भी किए जा रहे हैं। 15 दिनों में 20 लोगों ने नेत्रदान किए हैं जिससे 40 परिवारों की अंधेरी जिंदगी में उजाला हुआ है। जिन 20 लोगों ने मृत्यु उपरांत आंखें डोनेट की है उनमें स्व. कृपाशंकर शुक्ला, स्व. नरेश प्रेमचंदानी, स्व. सरदार भूपेंद्रसिंह खुरान, स्व. मृदृलाबेन झवेरी, स्व. मनोरमा जैन, स्व. राधेश्याम बेड़िया, स्व. आशादेवी राचवानी, स्व. हासानंद तलरेजा, स्व. कमलादेवी आगल, स्व. कमलादेवी कुकरेजा, स्व. खुमसिंह सोलंकी, स्व. शीलादेवी विजयवर्गीय, स्व. राजकुमारी तालरेजा, स्व. कांतादेवी सुख्यानी, स्व. पुष्पा देवी छल्लाणी, स्व. लीला देवी वाधवानी व स्व. लीला देवी रोचलानी हैं। इसमें समन्वय सेवा से जुड़े देपालपुर विधायक विशाल पटेल, समाज सेवी प्रकाश रोचलानी (बल्लू ब्लड) प्रभु आज्ञा फाउण्डेशन, मुस्कान ग्रुप के सेवादार हेमंत छाबड़िया, राजेंद्र माखीजा, डॉ. रेणु जयसिंघानी, जीतू बगानी, गोपाल सरोके, अनिल गोरे व सरदार हरभजन सिंह की खास भूमिका रही।

मृत्यु के बाद नेत्रदान जरूर करे

मुस्कान ग्रुप ने लोगों से अपील की है कि वे देह दान व नेत्र दान के तथ्य को समझे और इसे लेकर चल रही भ्रांतियां, मिथक आदि को दरकिनार कर नेत्रदान, अंगदान के लिए आगे आएं और मानवता सजग कामों में आगे बढ़े। वर्तमान में देश में में हर साल करीब दो लाख कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत है। ऐसे ही हर वर्ष 20 हज़ार मामले जुड़ जाते हैं। नेत्र दान के लिए एमके इंटरनेशनल आई बैंक के मोबाइल नं. 09406631 व देह दान व त्वचा दान लिए चोइथराम एण्ड रिसर्च सेंटर 09669851060 सम्पर्क किया जा सकता है।