नई चुनौती:इंदौर में सिर्फ एक महीने में 1764 और ग्वालियर में 42 दिन के भीतर 1460 बच्चे संक्रमित हुए

इंदौर9 महीने पहले
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ग्वालियर। दूसरी लहर में 15 वर्ष तक के बच्चों में आ रहे वयस्कों से लक्षण - Dainik Bhaskar
ग्वालियर। दूसरी लहर में 15 वर्ष तक के बच्चों में आ रहे वयस्कों से लक्षण
  • तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा खतरा, अस्पतालों में बेड बढ़ाने की तैयारी शुरू

कोरोना की तीसरी लहर कब तक आएगी, कितनी घातक होगी, किसी को नहीं पता। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार तीसरी लहर बच्चों पर अपना असर दिखा सकती है। इसी के मद्देनजर अस्पतालों में 200 बेड बढ़ाने की तैयारी है। अभी 2500 बेड उपलब्ध हैं। बीते एक माह की बात करें तो जिले में 10 साल तक के 1764 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। 11 से 18 साल के बच्चों की संख्या 3168 है। वहीं, बीते साल मार्च से अब तक कुल 12 हजार 459 बच्चे इस महामारी का शिकार हुए हैं।

यह संख्या तब सामने हैं जबकि माना जा रहा है कि ड्राप-आउट बच्चों की संख्या ज्यादा होगी। मतलब यह है कि ज्यादातर छोटे बच्चों की जांच नहीं हो पाती है, इसलिए वे रिकॉर्ड पर भी नहीं हाेंगे। अब चूंकि तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमण की बात उठ रही है तो प्रदेश सरकार ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुरुवार को संभागायुक्त डॉ. पवन शर्मा ने शिशु रोग विशेषज्ञों और स्त्री राेग विशेषज्ञों को प्लानिंग के लिए बुलवाया। माना जा रहा है कि बच्चे और गर्भवती महिलाएं तीसरी लहर में ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

चुनौतियां क्या-क्या...

  • मुंह व नाक से स्वॉब लेकर सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है। प्रदेश में ऐसा प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है जिन्हें बच्चों के सैंपल लेने का अनुभव हो।
  • बच्चों के लिए यह दवाइयां नहीं दी जा सकती है जो बड़ों को दी जा रही है।
  • सैंपल कलेक्शन के अलावा वेंटीलेटर का संचालन, इनक्यूबेशन सहित अन्य प्रक्रियाएं अलग-अलग तरह होती है।
  • माता-पिता के सामने यह चुनौती रहेगी कि वे बच्चों में लक्षण को पहचानें।

ग्वालियर : दूसरी लहर में 15 वर्ष तक के बच्चों में आ रहे वयस्कों से लक्षण
अभिषेक द्विवेदी | एक अप्रैल से 11 मई यानी 42 दिन में नवजात से लेकर 15 वर्ष तक के 1460 बच्चे पॉजिटिव हो चुके हैं। पहली लहर में 24 मार्च 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 के बीच यह आंकड़ा 761 था। विशेषज्ञों के मुताबिक दूसरी लहर में संक्रमण का शिकार होने वाले 771 बच्चे 11 से 15 साल तक के हैं।

पहली लहर में 15 साल तक के एक भी बच्चे की मौत कोरोना संक्रमण से नहीं हुई थी, जबकि दूसरी लहर में 42 दिन में ही दो बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से इटावा की 42 दिन की नवजात शामिल है। कोरोना की पहली लहर में बच्चों को पेट दर्द, शरीर में लाल दाने निकलने और कभी-कभी उल्टी की शिकायत होती थी, लेकिन इस बार वही लक्षण आ रहे हैं, जो वयस्कों में हैं। बच्चों को भी खांसी, जुकाम, गले में खराश, बुखार और सांस लेने में दिक्कत आ रही है।

संक्रमण का असर इन उम्र के बच्चों में ज्यादा

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