यह गणेश जी हैं खास:इंदौर में 76 तरह की जड़ी-बूटियों, 5 नदियों का पानी और 5 तरह की मिट्‌टी से आकार लेते हैं गजानन; इस बार CM योगी और सिंधिया के घर में विराजेंगे

इंदौरएक वर्ष पहलेलेखक: संतोष शितोले/अमित सालगट

इंदौर के शास्त्रोक्त श्रीमंत दगडू सेठ गणपतिजी खास हैं। इन्हें आकार देने में 5 से 6 दिन लगता है। शास्त्रोक्त माटी गणेश की मूर्ति के निर्माण में 76 प्रकार की जड़ी बूटियों का उपयोग होता है। इन्हें तैयार करने में सांप की बाम्बी वाली माटी लगती है। श्रीमंत दगडू सेठ गणपतिजी की मूर्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह को भेंट की जा चुकी है। अब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के घर दगडू सेठ गणपतिजी विराजेंगे।

ये मूर्तियां देश के 30 शहरों के अलावा दुबई, शारजाह और अमेरिका भी जाती हैं। इसकी विशेषता ये है कि शास्त्रोक्त होने के कारण इन्हें हमेशा के लिए घर में स्थापित भी किया जा सकता है और विसर्जित भी कर सकते हैं। आधी बाल्टी पानी में रखने पर ये मूर्तियां 3-4 घंटे में पानी में घुल जाती हैं। आइए जाने शास्त्रोक्त श्रीमंत दगडू सेठ गणपतिजी के तैयार होने की पूरी प्रक्रिया...

पुणे के श्रीमंत दगडू सेठ गणपतिजी का मंदिर पूरे विश्व में विख्यात है। मूर्ति तैयार करने वाली संस्था की ज्योति खंडेलवाल बताती हैं कि उन्होंने इसकी शुरुआत 2015 से की थी। इसे उज्जैन के मूर्तिकार तैयार करते हैं। ये मूर्तियां ब्राह्मी, शंख पुष्पी, जटामासी, नागर मोसा, अगर, पुनर्वा, गिलोय, बेल पत्र, कबीट, दुर्वा सहित 76 प्रकार की जड़ी बूटियों से बनाई जाती है। इसमें गंगा, जमुना, सरस्वती, नर्मदा व शिप्रा नदियों का जल है। पंचामृत के रूप में गाय का घी, दूध, दही, शहद और मिश्री समाहित है। इसके साथ ही गोबर, गोमूत्र, मुलेठी, हल्दी, आंबा हल्दी, चंदन, लाल चंदन, छैल छबीला, वच, कूट, कपूर, काचरी आदि का मिश्रण है। पंच मेवा में काजू, बादाम, किशमिश, खारक और पिस्ता को मिलाया गया है।

मिट्‌टी तैयार करते मूर्तिकार।
मिट्‌टी तैयार करते मूर्तिकार।

सबसे दुर्लभ सांप की बाम्बी वाली माटी
मूर्ति के निर्माण में पांच प्रकार के पेड़ के पत्तों का उपयोग किया जाता है। इसमें आम, नीम, बरगद, शमी व अशोक के पेड़ शामिल हैं। जौ, तिल, अश्वगंधा, लौंग, इलायची व सुपारी के अलावा पांच प्रकार के इत्र गुुलाब, मोगरा, केवड़ा, चंदन व खस को प्रयुक्त किया गया है। ऐसे ही पांच फूलों में गुलाब, कमल, गेंदा, चमेली व मोगरा को उपयोग किया गया। पांच प्रकार की मिट्‌टी में गोशाला, घोड़ शाला (अस्तबल), गज शाला (हाथियों का स्थान), दीमक की बाम्बी और एक तीर्थस्थल की माटी का उपयोग किया है। खास बात यह कि इसमें सांप की बाम्बी (जंगल के आसपास दीमक की बांबी, जहां सांप रहते हैं) वाली माटी मिलाई जाती है। जो बहुत कम मिलती है।

पांच से छह दिनों में बनती है एक मूर्ति
इन सब सामग्रियों को उज्जैन के आगे मालीखेड़ा गांव में इसे हाथ से बनाने वाले मूर्तिकारों को दिया जाता है। इसके लिए पहले सभी जड़ी बूटियों को पानी में उबाला जाता है। फिर इसमें अर्क, मिट्‌टी व गोबर को मिलाया जाता है। पहले इसे सांचे में ढालकर मूर्ति का आकार लिया जाता है, फिर वस्त्र, लड्‌डू, धोती आदि सब हाथ से बनाए जाते हैं। मूर्ति बनने के बाद उसे सुखाया जाता है तो क्रेक्स आते हैं। उसे भरा जाता है। यह प्रकिया दो बार होती है।

इसमें रंग का उपयोग नहीं कर खड़िया, गेरू, गोंद आदि का उपयोग किया जाता है। केवल आंखों व दांतों को आर्टिफिशयल रूप दिया जाता है। इस तरह सारी सामग्रियां तैयार होने पर एक मूर्ति बनाने में 5 से 6 दिन लगते हैं। मूर्ति बनने के बाद पंडित से गणपति अर्थव शीर्ष का पूजन किया जाता है, जिसमें 200 पाठ होते हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में स्थापित हुई थी शास्त्रोक्त माटी गणेश प्रतिमा
इंदौर की यही शास्त्रोक्त माटी गणेश प्रतिमा अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह में भी स्थापित हुई थी। मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा स्वयं माटी की गणेश प्रतिमा लेकर अयोध्या गए थे। इसके अलावा तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को भी यह प्रतिमा दी गई थी। फिर महाजन ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी थी। इसी तरह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय व उनके जरिए गृह मंत्री अमित शाह को भी सौंपी गई।

विदेशों में भी मूर्ति को पसंद किया जाता है। इनमें USA के आदित्य शर्मा हर साल खुद के और रिश्तेदारों के लिए ये मूर्तियां मंगवाते हैं। भारत में सूरत, जयपुर, जोधपुर, पुणे, अहमद नगर, होशंगाबाद, मुंबई, गुड़गांव, पीथमपुर, महू सहित अन्य शहरों में यह मूर्तियां भेजी जाती है।

कहते हैं कि जड़ी बूटियों से बनी गणेश मूर्ति को हाथ में लेते ही अलग अनुभूति महसूस होती है।
कहते हैं कि जड़ी बूटियों से बनी गणेश मूर्ति को हाथ में लेते ही अलग अनुभूति महसूस होती है।

फिर पौधों में बदल जाती है माटी की मूर्ति
ज्योति खंडेलवाल बताती हैं कि यह मूर्ति तीन साल तक लोगों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई थी। खास बात यह कि 9 से 12 इंच तक की ये मूर्तियां अब आमजन के लिए सिर्फ लागत मूल्य पर तैयार की जाती है। इसे घर में स्थापित किया जा सकता है। यदि कोई विसर्जन करता है और किसी गमले में रखकर उसमें मूली या शलगम के बीज डाल दिए जाते हैं जिससे वे मूर्ति की माटी में समाहित होने के के पांच दिनों बाद पौधे हो जाते हैं। दूसरा यह कि मूर्ति को हाथ में लेते ही मन में अलग भाव जागृत होते हैं और पवित्रता बनी रहती है।

यूपी सीएम को गणेश प्रतिमा भेंट करते शलभ त्रिपाठी।
यूपी सीएम को गणेश प्रतिमा भेंट करते शलभ त्रिपाठी।

यूपी सीएम के करीबी को भेजी चार प्रतिमाएं
माटी गणेश संस्था की ज्योति खंडेलवाल ने बताया कि यूपी सीएम के मीडिया सलाहकार शलभ त्रिपाठी को सोशल मीडिया के माध्यम से इन प्रतिमाओं की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इन प्रतिमाओं का ऑर्डर दिया। उन्होंने स्वयं के लिए और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को भेंट देने के प्रतिमा मंगवाई और उन्हें दे भी दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मूर्ति भेंट करने के लिए मंत्री तुलसी सिलावट ने खरीदा है।

सिंधिया के लिए मंत्री तुलसी सिलावट ने मूर्ति प्राप्त की।
सिंधिया के लिए मंत्री तुलसी सिलावट ने मूर्ति प्राप्त की।

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