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भंवरकुआं चौराहे के नामकरण की कहानी:होलकर वंश के समय यहां जलाशय में चौराहे पर बनती थी भंवर, इसी से नाम पड़ा भंवरकुआं

इंदौर5 दिन पहले
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  • सीएम ने इस चौराहे का नाम बदलकर द नायक टंट्या भील चौराहा किया

शिवराज सिंह चौहान उन्होंने इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम बदलकर 'द नायक टंट्या भील' कर दिया है। इसके साथ ही MR 10 पर बन रहे ISBT (इंटर स्टेट बस स्टेशन) का नाम टंट्या मामा के नाम से रखे जाने की घोषणा की। भंवरकुआं चौराहे का नाम आखिर कैसे पड़ा। जानते हैं इसके नामकरण की कहानी...

समाजसेवी किशोर कोडवानी के अनुसार भंवरकुआं चौराहे का इतिहास होलकर वंश के समय का है। वर्तमान में चौराहे के सामने जहां थाना स्थित है, उसके समीप एक मंदिर हुआ करता था। वर्तमान में नौलखा चौराहे से जब हम भंवर कुआं की ओर जाते हैं, तो होलकर कॉलेज आता है। इसके पीछे यहां बड़ा जलाशय हुआ करता था। ढलान होने के कारण चौराहे पर हमेशा भंवर बनी हुई रहती थी। इस कारण इसका नाम भंवरकुआं चौराहा पड़ा। कोडवानी के अनुसार 20 वर्ष पहले ही मंदिर के समीप बना यह कुआं बंद हुआ है। अन्यथा बारिश के समय यहां पानी सड़कों पर निकल आता था।

इंदौर के मुख्य कुएं थे जहां पानी

किशोर कोडवानी के अनुसार इंदौर शहर में करीब1950 वर्ष 60 में पांच ऐसे कुएं थे। पहला भंवरकुआं, दूसरा मामाजी का कुआं नरसिंह बाजार चौराहे के समीप, गोराकुंड चौराहा का कुआं जहां से पनिहारी लोग पानी भर के मात्र चार आने में सभी के घरों में पानी दिया करते थे। वही के समय के साथ-साथ अब सभी हुए बंद हो गए हैं। और घरों में नर्मदा पाइपलाइन डल चुकी है, लेकिन फिर भी कुछ वर्षों तक इनको से कई वर्षों तक शहर के पुराने इंदौर में पानी की सप्लाई हुई है।

वर्तमान में क्यों है प्रसिद्ध

वर्तमान समय में भंवर कुआं इलाके के आसपास काफी अधिक कोचिंग क्लासेस व यूनिवर्सिटी बन चुकी है। यहां सबसे अधिक हॉस्टल भी बने हैं। भंवरकुआं के आसपास दो पुराने कॉलेज भी स्थित है। इसमें से आर्ट एंड कॉमर्स व होलकर कॉलेज स्थित है। वर्तमान में जिस तरह से इंदौर का नाम एजुकेशन हब के रूप में लिया जाता है, उसी तरह से सबसे अधिक कोचिंग क्लासेस वह सभी कॉन्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी के लिए इंदौर व प्रदेश से बाहर के छात्र भंवरकुआं इलाके में ही रहते हैं।