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सेना दिवस आज:जिन फील्ड मार्शल करिअप्पा की याद में आर्मी-डे मनाते हैं, उन्हें 1919 में कमीशन इंदौर से मिला

इंदौर3 दिन पहलेलेखक: शमी कुरैशी
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डेली कॉलेज में शुरू हुए ट्रेनिंग स्कूल ऑफ इंडियन आर्मी कैडेट की पहली और आखिरी बैच (1918)। - Dainik Bhaskar
डेली कॉलेज में शुरू हुए ट्रेनिंग स्कूल ऑफ इंडियन आर्मी कैडेट की पहली और आखिरी बैच (1918)।

भारत की आज़ादी के बाद 15 जनवरी 1949 को जनरल (बाद में फील्ड मार्शल) केएम करिअप्पा पहले भारतीय सेनाध्यक्ष बने। तब से हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। इंदौर के लिए गर्व की बात है कि करिअप्पा ने आर्मी की ट्रेनिंग इंदौर में ही ली थी। वर्ष 1934 के पहले ब्रिटिश इंडियन आर्मी में जो भी भारतीय युवा अफसर बने, वे किंग्स कमीशंड इंडियन ऑफिसर (केसीआईओ) की श्रेणी में आते थे।

केसीआईओ के पहले बैच की ट्रेनिंग के लिए 1918 में इंदौर में ‘ट्रेनिंग स्कूल ऑफ इंडियन आर्मी कैडेट’ की स्थापना हुई। यह स्कूल डेली कॉलेज कैम्पस में शुरू हुआ, जिसके लिए वहां पढ़ रहे छात्रों को दो साल के लिए इंदौर स्थित अन्य हाउस में शिफ्ट किया। यहां से एक बैच निकली, जिसमें केएम करिअप्पा भी कैडेट थे। यह तथ्य डेली कॉलेज के पूर्व प्राचार्य कंुवर सुमेर सिंह की किताब ‘द डेली कॉलेज-स्टोरी ऑफ ए 125 ईयर्स ओल्ड इंस्टीट्यूशन’ में भी दर्ज है।

सिख मोहल्ला के सज्जन सिंह भी थे इस बैच में

डिफेंस हिस्ट्री के जानकार देव कुमार वासुदेवन बताते हैं कि करिअप्पा को इंदौर से ट्रेनिंग लेने के बाद उन्हें 1919 में कमीशन मिला और वे सेकंड लेफ्टिनेंट बने। करिअप्पा ने बाद में लिखा था कि इंदौर में रहने की यादें सुखद हैं। पहली बैच में 38 कैडेट थे। इनमें से एक इंदौर के सिख मोहल्ला के सज्जन सिंह थे, जो कर्नल बने और बाद में होलकर स्टेट फोर्स में गए।

‘भारत का वयोवृद्ध पुरुष’ कहे जाने वाले दादा भाई नौरोजी के पोते केएडी नौरोजी और बाद में पाकिस्तान में मेजर जनरल बने मो. अकबर खान भी इसी बैच से निकलेे। एक बैच के बाद 1919 में यह ट्रेनिंग स्कूल यहां बंद किया और भारत से चुने गए कैडेट को रॉयल मिलिट्री कॉलेज सैंडहर्स्ट (इंग्लैंड) भेजा जाने लगा।

1952 में महू आए थे

इतिहासकार डेन्जिल लोबो बताते हैं कि केएम करिअप्पा 19 नवंबर 1952 को महू आए थे। मिलिट्री परेड की सलामी लेने के बाद वे सेक्रेड हार्ट स्कूल में पहुंचे। प्रिंसिपल जॉलीचन पी.जे. के अनुसार बच्चों ने उन्हें सलामी दी। करिअप्पा ने हिंदी में संबोधित करते हुए कहा- देश के अच्छे और ईमानदार नागरिक बनो।