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भास्कर रिसर्च:दूसरी लहर में जिस रेमडेसिविर के लिए कई दिन कतार में रहे, इस बार 1% मरीजों को भी नहीं लगे

इंदौर7 दिन पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
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रेमडेसिविर के लिए कतार- दवा बाजार की यह तस्वीर 8 अप्रैल 2021 की है। - Dainik Bhaskar
रेमडेसिविर के लिए कतार- दवा बाजार की यह तस्वीर 8 अप्रैल 2021 की है।
  • तीसरी लहर में मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा, लेकिन अभी तक घातक असर नहीं, क्योंकि वैक्सीन का असर वैरियंट भी कमजोर

कोरोना की तीसरी लहर में मरीजों की संख्या भले तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस बार उतना घातक असर देखने को नहीं मिल रहा है। भास्कर ने दूूसरी लहर में कोरोना उपचार के लिए रामबाण की तरह इस्तेमाल किए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन की खपत के आंकड़े खंगाले तो चौंकाने वाली बात सामने आई। दूसरी लहर में इंजेक्शन के लिए लोग कई-कई दिन कतार में लगे रहे।

जमकर कालाबाजारी भी हुई, लेकिन इस बार अभी तक 1 फीसदी मरीजों को भी इसकी जरूरत नहीं पड़ी है। शहर में गुरुवार को कोविड केयर सेंटर में 94 और अस्पतालों में 77 मरीज भर्ती थे। इनमें तीन से चार मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। दूसरी लहर में 50 से 70% मरीजों को रेमडेसिविर की जरूरत पड़ी थी। तीसरी लहर में अब तक सिर्फ 25 से 30 मरीजों को लगाने पड़े हैं। ये सभी मरीज 60 साल से अधिक उम्र के हैं।

सरकारी कोविड अस्पताल में भी 2 मरीजों को रेमडेसीविर देने की ज़रूरत पड़ी है। अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में 8 मरीजों को दिया जा चुका है। निजी अस्पतालों में 2से 3 मरीजों को दिया जा चुका है। डॉ. रवि डोसी बताते हैं कि हमारे यहां 60 मरीज भर्ती हुए। उनमें से 7 से 8 को रेमडेसिविर दिया गया। यह सभी उम्रदराज मरीज थे और उनमें डेल्टा वैरिएंट मिला था।

जब सीटी स्कैन करवाया तो वह फेफड़ाें में 50 प्रतिशत तक संक्रमण मिला। सांस लेने में परेशानी हो रही थी। सारे ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। इसलिए उन्हें इंजेक्शन लगाए गए। हालांकि, इनमें दो मरीज ऐसे थे जिन्हें सिर्फ तीन इंजेक्शन का ही डोज दिया गया। इनमें से कुछ की जीनोम सिक्वेंसिंग भी करवाई थी जिसमें डेल्टा वैरिएंट मिला था।

छह इंजेक्शन का पूरा डोज कुछ मरीजों को ही लगा

चेस्ट फिजिशियन डॉ. दीपक बंसल व डॉ. रवि डोसी बताते हैं, जिन मरीजों को ये इंजेक्शन लगे उनकी उम्र अिधक थी व अन्य बीमारियां भी थीं। कुछ को ही छह इंजेक्शन का डोज दिया गया।

लंग्स में इंफेक्शन मिला इसलिए ही लगाना पड़ा

डॉ. पीयूष जोशी व डॉ. गुप्ता कहते हैं कि सिर्फ उन मरीजों को रेमडेसिविर लगाने की जरूरत पड़ी, जिनके लंग्स में इंफेक्शन मिला था। िगने-चुने केस में ही इसकी नौबत आई।

4 मरीजों की मौत हुई सभी उम्रदराज और अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे

उधर, दिसंबर से अब तक शहर में कोरोना से चार लोगों की मौत हुई है। डेथ ऑडिट में सामने आया है कि सभी उम्रदराज थे और उन्हें अन्य पुरानी व गंभीर बीमारियां भी थी। डीन डॉ. संजय दीक्षित, डॉ. सीबी सोलंकी, डॉ. वी.पी. पांडे, डॉ. सलिल भार्गव, डॉ. अशोक यादव, डॉ. के.के. अरोरा, डॉ. सतीश जोशी, डॉ. मनोज केला ने ये डेथ ऑडिट किया।

केस 1

75 साल के मरीज का शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। 10 दिसंबर काे उनकी कोरोना रिपाेर्ट पॉजिटिव आई। 20 दिसंबर काे उनकी माैत हो गई। वे 19 दिन भर्ती रहे। उन्हें कोरोना संक्रमण के साथ ही लंबे समय से अन्य बीमारियां भी थीं।

केस 2

69 साल के मरीज की 12 दिसंबर को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 21 दिसंबर को मौत हो गई। वे कुल 9 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। डॉक्टर्स के अनुसार, उनकी स्थिति भी ऐसी ही थी। कोरोना संक्रमण के साथ ही अन्य पुरानी बीमारियों से ग्रसित थे।

केस 3

82 साल के बुजुर्ग को 2 जनवरी को सांस लेने में तकलीफ हुई। प्राथमिक जांच के बाद पता लगा कि बीपी गड़बड़ है। भर्ती होने के लिए कहा। इलाज के दौरान 2 जनवरी को ही मौत हो गई। मौत का कारण कार्डियक प्राब्लम बताया गया।

केस 4

3 जनवरी को एक अन्य उम्रदराज मरीज को हलकी खांसी आने लगी। ऑक्सीजन लेवल 92 से 95% आया। रैपिड एंटीजन में पॉजिटिव आने पर भर्ती हुए। आठ साल से हार्ट व डायबिटीज के मरीज थे। कार्डियक फेल्यूअर से मौत हो गई।

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