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इंदौर में पहली बार 24 घंटे चली फैक्ट्रियां:कोरोना से लड़ने में इंदौर ने की दुनिया की मदद; पहले अमेरिका, अब इराक व सऊदी तक भेजी दवाएं

इंदौर3 महीने पहलेलेखक: संजय गुप्ता
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सांवेर रोड स्थित एक फार्मा इंडस्ट्री। यहां कोविड की दवाई बनती है। - Dainik Bhaskar
सांवेर रोड स्थित एक फार्मा इंडस्ट्री। यहां कोविड की दवाई बनती है।
  • तीन महीनों में ही 100 करोड़ से ज्यादा की दवाई निर्यात की

सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े फार्मा हब इंदौर ने दूसरी लहर में 100 करोड़ से ज्यादा की कोविड दवाइयां मार्च से मई के बीच देश-विदेश में भेजी। इनमें 18 करोड़ से ज्यादा एंटीबायोटिक, विटामिन टैबलेट, स्टेरॉयड के 50 लाख से ज्यादा इंजेक्शन व 10 लाख से ज्यादा कोविड किट देश में गुजरात, महाराष्ट्र, तेलगांना, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, असम, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़ भेजी गई।

पीथमपुर सेज से ग्लेनमार्क ने कोविड में काम आने वाली फैवीफ्लू की करीब 30 लाख टैबलेट इराक, सऊदी अरब व अन्य एशियाई देशों को भेजी। अब सांवेर रोड स्थित फार्मा कंपनियां हर दिन 10 लाख तक फैवीफ्लूू टैबलेट बना सकती हैं। इंदौर की मॉडर्न लेबोरेटरी को ब्लैक फंगस इंजेक्शन बनाने का लाइसेंस भी मिल गया है।

तब एचएसक्यूसी भेजी थी
इससे पहले पहली लहर मार्च-अप्रैल 2020 में एंटी मलेरिया ड्रग हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन (एचएसक्यूसी) को कोरोना में प्रभावी माना गया था। तब इप्का लैब से दवा अमेरिका तक भेजी गई थी। मैकडब्ल्यू ने भी कई जगह भेजी थी।

300 करोड़ सालाना टर्नओवर

इंदौर के औद्योगिक क्षेत्र में फार्मा की करीब 85 यूनिट हैं, इनमें 15 बड़ी और बाकी छोटी व मध्यम यूनिट हैं, इनका कुल सलाना टर्नओवर करीब 300 करोड़ का है

मार्च से मई तक जारी रही सप्लाय
फार्मा सेक्टर की इन यूनिट में करीब पांच हजार लोग काम करते हैं। कोविड के तीन माह में करीब सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की दवाएं इंदौर से देश के कई राज्यों और विदेशों को निर्यात हुई हैं।

ब्लैक फंगस का इंजेक्शन भी बनेगा
फैवीफ्लू का लाइसेंस मिला। एथेनाल से सैनिटाइजर, कोविड किट बनाई। ब्लैक फंगस इंजेक्शन बनाने की अनुमति मिली।

देश-दुनिया के 85 ब्रांड यहां हैं

5 हजार करोड़ का निर्यात होता है

पीथमपुर के सेज में देश-दुनिया के सभी ब्रांड हैं। यहां से 5 हजार करोड़ की दवाएं विदेश में जाती हैं। --हिमांशु शाह, प्रेसीडेंट, स्माल स्केल ड्रग मैन्यूफेक्चरर एसो.

600 करोड़ का कारोबार होगा

इंदौर में फार्मा सेक्टर अगले पांच साल में दोगुना होगा। 10 से 15 हजार लोग जुड़ेंगे। 600 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होगा। -जेपी मूलचंदानी, महासचिव बेसिक ड्रग्स डीलर एसोसिएशन

कोविड महामारी के इलाज में काम आने वाली ये दवाइयां हम बना रहे

जिंक व विटामिन टैबलेट

1. 4 करोड़ रेंटीडी टैबलेट, 6.5 करोड़ जिंक टैबलेट, 8 कैल्शियम टैबलेट इंदौर में बनी। मॉर्डन लेबोरेटरी चेयरमैन डॉ. अनिल खरया ने बताया विदेश में भी ये दवाएं भेजी।

स्टेरॉयड के इंजेक्शन

2. कोविड उपचार के दौरा डेक्सा व कई तरह के स्टेरॉयड लगते हैं। यह स्टेरॉयड भी इंदौर में बनाए गए। तीन माह के दौरान स्टेरॉयड टैबलेट और इंजेक्शन देश-विदेश में भेजे गए।

एंटीबायोटिक इंजेक्शन
3. जेंटामाइसिन, क्रेटामाइल आदि कई तरह के एंटीबायोटिक इंजेक्शन कोविड उपचार में काम आए। यह इंदौर की नंदनी मेडिकल लेबोरेटरी द्वारा बनाकर देश के कई हिस्सों में भेजे।

बुखार व पेन किलर टैबलेट

4. कोविड में बुखार, हाथ-पैर दर्द प्रारंभिक लक्षण रहे हैं। इसके लिए खासतौर से पेरासिटामॉल उपयोग में लाई गई। इंदौर से करीब 3 करोड़ टैबलेट बाहर भेजी गई।

कोविड किट
5. एक कोविड किट बनाई गई। इसमें तीन तरह की ड्रग, जिंक टैबलेट शामिल थी। निर्माता कंपनी मैकडब्ल्यू के अमित चावला ने बताया कि 10 लाख से ज्यादा किट पूरे देश में भेजी गई।

ब्लैक फंगस इंजेक्शन

6. इंदौर मप्र का पहला शहर है, जहां अब ब्लैक फंगस के इंजेक्शन बनेंगे। मॉडर्न लेबोरेटरी को लाइसेंस मिला है। कच्चा माल आते ही उत्पादन शुरू होगा। हर दिन दस हजार इंजेक्शन बनेंगे।