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भिखारी को डंपर में डालकर फेंकने का मामला:IG से लगाई गुहार, निगमकर्मियों पर दर्ज हो केस; बोला- अपाहिज हूं, इसलिए मांग कर खाता हूं, क्या मैं कचरा हूं

इंदौर3 महीने पहले
आकाश और रामू ने आईजी के समक्ष अपनी पीड़ा जाहिर की। रामू बोला - मेरी मां तो चल भी नहीं सकती।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आने के बाद अब इसकी चारों तरफ निंदा हो रही है। शनिवार दोपहर कांग्रेस दो पीड़ितों को लेकर आईजी से मिलने पहुंचे और गरीबों काे न्याय दिलाने की मांग की। उनका कहना था कि निगमकर्मी 15 लोगों को गाड़ी में भरकर लेकर गए थे, लेकिन हमें सिर्फ चार लोग रैन बसेरा में मिले हैं। बाकी कहां है, इसका भी पता किया जाए। साथ ही, निगमकर्मियों पर अपहरण और हत्या की धाराओं में केस दर्ज हो। वहीं, भिक्षुक बोला- अपाहिज हूं, मेहनत कर नहीं खा सकता, इसलिए मांग कर पेट पालता हूं, क्या मैं कचरा हूं?

कांग्रेसियों के साथ न्याय की गुहार लगाने भिक्षुक आईजी ऑफिस आए।
कांग्रेसियों के साथ न्याय की गुहार लगाने भिक्षुक आईजी ऑफिस आए।

आईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा से मिलने पहुंचे पीड़ित रामू ने कहा कि हम मां-बेटे भिक्षा मांग कर जीवन यापन कर रहे थे। मां अंधी है, मैं उसका सगी औलाद तो हूं नहीं। मेरी मां को तो भगवान ने पहले ही ले लिया था, पर मैंने उसे अपनी मां बनाया था। उसे दिखता भी नहीं है और चल भी नहीं पाती। कल निगम की गाड़ी आई और कहा कि इसका सामान भरो। हमारे बिस्तर और बर्तन समेत सब सामान गाड़ी में डाल लिया। हमें भी गाड़ी में बिठा लिया और शिप्रा के आगे ले गए। वहां हमें जंगल में छोड़ दिया। मैंने वहां से गुजर रहे गांव वालों को बताया, तो वे निगमकर्मियों से भिड़ गए। वे बोले- जहां से लेकर आए हो, वहीं ले जाकर छोड़ो।

रामू ने बताया कि हम 15 लोग थे, आधों को इन्होंने रास्ते में छोड़ दिया। इसके बाद हम तीन लोगों को रैन बसेरा में लाकर पटक दिया। निगम के 8 से 10 लोग थे, जो जबरन हमें भरकर ले गए थे। इसके पहले भी कई बार निगम ने बदसलूकी की है। सुबह से हमें किसी ने चाय तक नहीं दी।

आकाश ने बताया कि मैं विकलांग हूं। दोपहर 12 बजे के करीब मधुमिलन चौराहे के पास हनुमान जी के मंदिर के पास बैठकर भिक्षा मांग रहा था। इसी दौरान, निगम अधिकारी आए और कहा कि तुम यहां से भगो। दो-चार बुजुर्ग जो थे, उन्हें भी भगा दिया। मुझे कहा, हमारे साथ चल नहीं, तो तुझे भोपाल के आगे फेंक आएंगे। जैसे किसी कचरे को फेंका जाता है, वैसे ही फेंक देंगे। मुझे तो शिप्रा नहीं लेकर गए, लेकिन रैन बसेरा में जरूर छोड़ दिया था। रात में खाना-पीना नहीं दिया।

मंत्री भूपेंद्र सिंह बोले - यह घटना अमानवीय

वहीं, घटना को लेकर मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इंदौर की घटना निश्चित रूप से अमानवीय है। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने खुद उपायुक्त को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच की जा रही है। आगे इस प्रकार की कोई घटना ना हो, इसे लेकर निर्देश दिए गए हैं।

रामू और उसकी मां को भी डंपर में भरकर शिप्रा ले गए थे।
रामू और उसकी मां को भी डंपर में भरकर शिप्रा ले गए थे।

कांग्रेस द्वारा डीआईजी को दिए आवेदन के अंश ...
29 जनवरी को जो नगर निगम के कर्मचारियों ने शर्मनाक हरकत की है, गरीब बेघर-बुजुर्गों को घसीट-घसीट कर गाड़ियों में भरा और शहर से दूर शिप्रा गांव की सड़क पर छोड़ आए। जिनका भरण-पोषण शहर के नागरिक 10 से 50 रुपए आते - जाते में देते थे, नगर निगम के लोग झूठ बोल कर की, हम रैन बसेरा लेकर जाएंगे, वहां खाना मिलेगा, रहने को छत मिलेगी.. का झांसा देकर ऐसी जगह बेघर बेसहारा बुजुर्गों को छोड़ कर आए हैं, जहां उन्हें कोई खाना देने और पूछने वाला नहीं है। वहां लोग भूख से मर जाते। उन बुजुर्गाें की जान भी जा सकती थी। आप इन कर्मचारियों के खिलाफ जान से मारने का केस दर्ज करें। ये कृत्य राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। दिखावटी कार्रवाई कर अधिकारी को भोपाल लाइन अटैच कर दिया है, जिससे देशभर में शहर के प्रशासन पर सवाल उठाया जा रहा है। यह गलती करने वाले कर्मचारियों का यह कार्य आपराधिक श्रेणी में आता है। जांच कर इन्हें निर्देश देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई कर केस दर्ज करने के आदेश दें।

निगम कमिश्नर बोलीं- अपर आयुक्त जांच कर रहे हैं

मामले में निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने कहा, अपहरण जैसी यदि कोई बात है, तो यह पुलिस का पार्ट है। रैन बसेरा में आने-जाने वालों पर पाबंदी नहीं है। सर्दी ज्यादा होने पर जरूर हम बेसहाराओं को रैन बसेरा में शिफ्ट करते हैं। अभी 76 लोग यहां निवासरत हैं। अक्टूबर 2018 से अब तक 30 हजार से ज्यादा लोग इनमें रुक चुके हैं। शहर में 10 रैनल बसेरा संचालित हैं। प्रारंभिक मामले में उपायुक्त को निलंबित कर भोपाल अटैच किया गया है। इसके अलावा दो को बर्खास्त दिया गया है। रैन बसेरा की अपर आयुक्त जांच कर रहे हैं। जांच की जा रही है, वे शहरी सीमा से बाहर क्यों गए थे।

आप ने की मानवाधिकार आयोग में शिकायत

इस मामले की शिकायत आम आदमी पार्टी ने मप्र मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। आप जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष जोशी द्वारा की गई। इसमें निगम की वृद्धजनों को डंपर में भर कर शहर के बाहर छोडने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। नगर निगम इंसान को इंसान नहीं, बल्कि कचरा समझ रहा है। संभागायुक्त को ज्ञापन देकर निष्पक्ष न्यायिक जांच समिति के गठन की मांग की है।

आप कार्यकर्ताओं ने मामले की शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग में भी की है।
आप कार्यकर्ताओं ने मामले की शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग में भी की है।
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