आबोहवा में असर दिखाने लगीं हमारी कोशिशें:दिवाली पर सिर्फ एक दिन ऑरेंज जोन में रहा इंदौर, पिछली बार 4 दिन थे बुरे हाल

इंदौर25 दिन पहलेलेखक: विश्वनाथ सिंह
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दिवाली के पहले ऐसी रही आबोहवा - Dainik Bhaskar
दिवाली के पहले ऐसी रही आबोहवा

दिवाली का सप्ताह इस बार प्रदूषण के लिहाज से भी इंदौर के लिए शुभ रहा। पिछले साल जहां इस दौरान चार बार शहर ऑरेंज जोन (अधिक प्रदूषित) में रहा था, लेकिन इस बार सिर्फ एक दिन दिवाली पर यह स्थिति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में पर्यावरण सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का नतीजा इस बार दिवाली पर भी देखने को मिला है।

हालांकि दिवाली के दिन दृश्यता, ध्वनि व वायु प्रदूषण अपेक्षाकृत अधिक रहा। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर आरके गुप्ता के मुताबिक, दिवाली तक के सात दिन की तुलना करें तो पिछले साल की अपेक्षा इस बार शहर की आबोहवा बेहतर रही है। 2020 की दीपावली के पहले के सात में से पांच दिन तक जहां प्रदूषण का स्तर ज्यादा था तो इस बार की दीपावली के पहले यह स्तर केवल एक दिन ही ज्यादा यानी 200 के पार रहा है।

100 तक लाना है एक्यूआई का स्तर
गुप्ता के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के सात दिन पहले और सात दिन बाद प्रदूषण स्तर का अध्ययन करने का आदेश दिया है। यह स्टडी 28 अक्टूबर से शुरू की गई है और 11 नवंबर तक की जाना है। शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए बने प्लान के मुताबिक एक्यूआई को 100 से भी कम करने पर काम जारी है। 14 नवंबर 2020 को इंदौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 197 था, जबकि 4 नवंबर 2021 को एक्यूआई 382 था। दिवाली की रात विजिबिलिटी यानी दृश्यता भी 200 मीटर थी, जो पिछले साल 250 मीटर थी।

दिवाली के पहले ऐसी रही आबोहवा

  • 2020 एक्यूआई 2021 एक्यूआई
  • 7 नवंबर 147 28 अक्टूबर 130
  • 8 नवंबर 237 29 अक्टूबर 145
  • 9 नवंबर 259 30 अक्टूबर 144
  • 10 नवंबर 242 31 अक्टूबर 145
  • 11 नवंबर 266 1 नवंबर 212
  • 12 नवंबर 247 2 नवंबर 174
  • 13 नवंबर 143 3 नवंबर 165

(यह आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए)

दीपावली के दिन यह स्थिति रही
तारीख एक्यूआई तारीख एक्यूआई
14 नवंबर 20 197 4 नवंबर 21 382

इन प्रयासों ने जगाई उम्मीद
1. निर्माण कार्य :
शहर के अंदर होने वाले निर्माण कार्य जैसे भवन निर्माण, सड़क निर्माण, विभिन्न पाइप लाइन डालने के लिए खुदाई के दौरान प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीन नेट से ढंककर काम किया जाने लगा है।

2. बगीचे विकसित किए: बगीचे, सामुदायिक केंद्र, स्कूल व हाउसिंग सोसायटी के ओपन एरिया में हरियाली विकसित की गई। डिवाइडर पर पौधारोपण ठीक किया।

3. कचरे का निपटान सुधारा: कचरा निपटान व्यवस्था को और बेहतर किया गया। नगरीय ठोस अपशिष्ठ जलाने पर नियंत्रण व नियमित जांच शुरू की। बायो वेस्ट के निष्पादन के लिए बागवानी आदि में कम्पोस्टिंग कर खाद्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

4. पानी का छिड़काव: शहर में कई जगहों पर हो रहे निर्माण कार्य व स्मार्ट सिटी के तहत तोड़-फोड़ वाले मार्ग पर पानी का छिड़काव किया गया। इससे धूल उड़ना बंद हुई।

5. फव्वारे किए शुरू: अत्यधिक यातायात वाले प्रमुख चौराहों पर पानी के फव्वारे लगाने से गाड़ियों का धुआं व धूल उड़ना कम हुई।

6. साइकलिंग को बढ़ावा: शहरवासियों ने साइकलिंग का उपयोग बढ़ाया। लोक परिवहन के साधनों में सफर बढ़ना भी फायदेमंद।