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  • Indore's daily GDP of 400 crores, 80% fall from lockdown; The country's economy will be normal in three months

असर / इंदौर की रोज की जीडीपी 400 करोड़ की, लॉकडाउन से 80% गिरी; तीन माह में सामान्य होगी देश की अर्थव्यवस्था

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
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प्रतीकात्मक फोटोप्रतीकात्मक फोटो

  • कोरोना से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन का असर हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है
  • मप्र की जीडीपी साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए है, इसमें इंदौर का सबसे अधिक हिस्सा डेढ़ लाख करोड़ से ज्यादा है

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 05:21 AM IST

इंदौर. कोरोना से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन का असर हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। मप्र की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) करीब साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए है। इसमें इंदौर का सबसे अधिक हिस्सा डेढ़ लाख करोड़ से ज्यादा है। यानी, यहां हर दिन की औसतन जीडीपी 400 करोड़ रुपए है। लॉकडाउन के कारण इंदौर की जीडीपी में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है। केवल किराना, दवा और अन्य जरूरी सेक्टर में ही काम होने से यह घटकर 80 से 100 करोड़ के बीच ही रह गई है। कोरोना के प्रभाव को लेकर फिक्की (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) ने करीब 60 पन्नों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी है।

इस रिपोर्ट में विभिन्न उद्योग, बैंकिंग और अन्य कॉर्पोरेट सेक्टर से बात करके सुझाव दिए हैं। इसमें बताया है कि कोरोना के चलते बाजार में कैश फ्लो 80 फीसदी कम हो गया है। व्यापार पर 53 फीसदी असर दिख रहा है। यह असर कम से कम तीन माह रहने की अाशंका है। इसके बाद ही बाजार सामान्य रूप में आ सकेगा।

वित्तीय वर्ष बढ़ाने से जीएसटी हाॅलिडे ईयर तक के सुझाव

  • सभी तरह के रिटर्न भरने की अंतिम तारीख को तीन माह बढ़ाया जाए।
  • एविएशन, ट्रेवल जैसे सेक्टर जहां गंभीर असर है, वहां जीएसटी हाॅलिडे ईयर हो।
  • वित्तीय वर्ष को एक माह बढ़ाकर 30 अप्रैल करना चाहिए। जरूरी होने पर इसे तीन से छह महीने तक बढ़ाया जाए।
  • सभी तरह की इनकम टैक्स, जीएसटी अपील की समय सीमा अादि बढ़ाने के लिए कानूनी बदलाव करना चाहिए।
  • सभी तरह की लेट फीस और पेनल्टी को खत्म कर दिया जाना चाहिए।
  • लोन की ईएमआई आदि को कम से कम छह माह के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए। बाद में लोन समाप्ति के दौरान इसे समायोजित किया जा सकता है।
  • बाजार में खरीदी-बिक्री प्रभावित नहीं हो, इसके लिए लोगों को उनका वेतन मिलना चाहिए। सरकार को मनरेगा में काम बढ़ाकर पेमेंट बढ़ाना चाहिए। विकसित देशों की तरह से अलग से एक राशि जारी करना चाहिए। 
  • काम की हानि देखते हुए सामान्य स्थिति होने पर अतिरिक्त काम ले सकते हैं।

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