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केंद्र सरकार के खिलाफ कपड़ा कारोबारी:टेक्सटाइल उद्योग पर 12% GST के निर्णय का विरोध; सूरत-दिल्ली-मुंबई के साथ इंदौर के व्यापारी आंदोलन के मूड में

इंदौर7 दिन पहले

केंद्र सरकार ने रेडिमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स उद्योग पर GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) की दर 5 से बढ़ाकर 12% करने का निर्णय लिया है। GST में बढ़ी दर 1 जनवरी 2020 से लागू होगी। मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ कपड़ा कारोबारी लामबंद हो गए हैं। इंदौर के भी रेडिमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स व्यापारियों में इसे लेकर काफी विरोध है। सरकार के खिलाफ लामबंदी के लिए अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, दिल्ली और दूसरे शहरों के व्यापारियों से रायशुमारी चल रही है। GST की दर वही 5% नहीं रखी गई तो इंदौर और मप्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन छेड़ने की बात कही जा रही है।

दुकान पर पैम्पप्लेट्स चिपकाकर विरोध

इंदौर में तो एमटी क्लॉथ मार्केट सहित अन्य कपड़ा बाजार एसोसिएशन एकजुट हो गए हैं। हजारों पैम्पप्लेट्स छपवाकर हर दुकान पर चस्पा की गई है। इसमें लिखा है- 'आम जनता पर एक और मार.. महंगाई की मार, GST 12% फीसदी लगेगा तो इसका भार आम जनता पर ही पड़ेगा। इसका हम सभी व्यापारी पुरजोर विरोध करते हैं। आप भी इसका विरोध करें। -एमटी क्लॉथ माार्केट मर्चेन्ट्स एसोसिएशन व समस्त व्यापारीगण, इंदौर’।

किसान आंदोलन के बाद बड़ा मुद्दा
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन और सचिव महेश गौर ने बताया कि टेक्सटाइल पर GST का 12% बढ़ना न्यायसंगत नहीं है। यह उद्योग की जड़ को कमजोर करने का प्रयास है। बढ़ी हुई GST की दर वापस लेने के लिए राष्ट्रीय टेक्सटाइल संगठनों की संयुक्त लड़ाई में इंदौर के कपड़ा व्यापारी सहभागी बनकर आंदोलन करेंगे। मामले में अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, दिल्ली सहित अन्य शहरों के कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन से रायशुमारी हो रही है। देश में किसान आंदोलन के बाद यह बड़ा मुद्दा है, यह नुकसान सरकार के लिए काफी बड़ा होगा। जैन की मानें तो इंदौर में रेडिमेड गारमेंट्स और टेक्साइटल्स के 10 हजार से ज्यादा व्यापारी हैं तथा 3 से 4 लाख लोगों की इंडस्ट्रीज हैं। इंदौर के कपड़ा उद्योग का रेडियस 600 किमी तक फैला है। हम अन्य शहरों के कपड़ा व्यापारियों के संपर्क में हैं और आंदोलन करेंगे। आंदोलन का संचालन एक किसी भी शहर से होगा।

तेजी से पनपेंगे कपड़ा माफिया, सरकार को भी लगेगी चपत

GST संघर्ष समिति व एमटी क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य अरुण बाकलीवाल ने बताया कि एसोसिएशन के जरिए आंदोलन की रूपरेखा बनाने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री व GST काउंसिलिंग के सदस्यों को ईमेल और यूट्यूब के जरिए संदेश पहुंचा रहे हैं कि GST की दर 5% ही रहने दी जाए। 12% करने से पूरे देश का धंधा चौपट हो जाएगा। पिछले तीन-चार महीने में 25 से 30 फीसदी रेट पहले ही बढ़ गए हैं। 12 फीसदी करने से बिना लिखा-पढ़ी का धंधा बढ़ेगा और सरकार को टैक्स नहीं मिलेगा। इसकी आड़ में कपड़ा माफिया पनपेंगे, जो बिना बिल के धंधा करेंगे।

हर दुकान पर चस्पा हैं इस तरह के पर्चें।
हर दुकान पर चस्पा हैं इस तरह के पर्चें।

ऐसे समझिए, कैसे बढ़ेगा आमजन और व्यापारियों पर बोझ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के पहले कार्यकाल में 2017 में कपड़ा उद्योग पर 5% GST की शुरुआत हुई थी।
  • इसके बाद 2019 में फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी। तब भी GST की दर 5% ही रही।
  • अब नवम्बर 2021 में GST को 5% से बढ़ाकर 12% किए जाने घोषणा की है।
  • यह बढ़ी हुई दर 1 जनवरी 2022 से लागू हो जाएगी।

फिर ऐसे फर्क पड़ेगा

सीनियर टैक्स कंसलटेंट एडवोकेट जुगल सतरावला के मुताबिक:-

  • जैसे किसी आमजन ने कपड़े की दुकान से 5 हजार रु. का सामान खरीदा तो उसे अभी 5 % के हिसाब से 250 रु. ज्यादा चुकाने पड़ते थे।
  • अब 12 % की दर जब लागू होगी तो उसे 5 हजार की खरीदी पर 600 रु. GST के चुकाने होंगे और यह कुल बिल में समाहित होगा।
  • GST बढ़ने से लोगों की पेइंग कैपेसिटी काफी कम हो जाएगी और इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग पर भी पड़ेगा।
  • जैसे किसी कारोबारी का हर साल का टर्नओवर 50 लाख रु. है तो उसे अभी GST के 5% के हिसाब से पहले 2.50 लाख रु. सरकार के खजाने में जमा करने होते हैं। अब GST की दर 12 % होने से उसे 50 लाख के टर्नओवर पर 6 लाख रु. सरकार के खजाने में जमा करने होंगे। यानी सीधे 3.50 लाख रु. ज्यादा।
  • दूसरा कारोबारी उधारी में धंधा नहीं कर सकेंगे। खास बात यह कि बड़े पैमाने पर ग्राहकी टूटेगी और कारोबारियों को अपने माल की खरीदी पर खुद की ही जेब सेल पहले GST चुकाना होगा। उधर, GST बढ़ने से पहले जैसा कारोबार नहीं रहेगा और ग्राहकी टूटेगी।

आमजन पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा
एडवोकेट सतरावला के मुताबिक रोटी, कपड़ा और मकान, इन तीनों को वाजिब दामों पर उपलब्ध कराना सरकार का काम है। रोटी के लिए हाल ही में सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मदद की है। मकान के लिए भी कम कीमत में आवास योजनाएं हैं, लेकिन तन को ढंकने के लिए कपड़े को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। GST का 12% बढ़ना यानी पहले से 7% ज्यादा। वैसे यह 7 नहीं, बल्कि 9% तक जाएगा, क्योंकि बड़े कारोबारी से छोटे कारोबारी तक की लिंक में हर बार मार्जिन बढ़ेगा और इससे सबसे ज्यादा असर आमजन पर पड़ेगा। सरकार को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए।