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  • It Is Ravana's Humiliation And Sita's Abduction, Becoming The Life Of Ramlila, It Is Pleasant For Us To Meet Death At The Hands Of Ramji.

बात उन कलाकारों की, जो रावण का किरदार निभाते रहे:रावण का अट्‌टहास और सीता हरण ही है रामलीला की जान दशानन बनकर रामजी के हाथ मौत मिलना हमारे लिए सुखद

इंदौरएक महीने पहलेलेखक: शमी कुरैशी
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ज्ञानी पुरुष का किरदार निभाना गौरव की बात है। - Dainik Bhaskar
ज्ञानी पुरुष का किरदार निभाना गौरव की बात है।

भले ही समाज में रावण की छवि नकारात्मक है, लेकिन हमारे लिए उस ज्ञानी पुरुष का किरदार निभाना गौरव की बात है। और अंत तो सबसे भला, भगवान श्रीराम के हाथों मृत्यु। यह कहना है उन कलाकारों का जो दशहरे पर होने वाली रामलीला या अन्य नाटकों में ‘रावण’ बनते आए हैं। कहते हैं इस किरदार को वर्षों से जी रहे थे, लेकिन कोविड ने सिलसिला तोड़ दिया। हालांकि लोग अब भी हमें रावण के कारण ही जानते हैं और इसी नाम से पुकारते भी हैं। इंटरनेट के युग में इस मंचीय रामलीला की परंपरा को जीवंत रखना बहुत जरूरी है।

दोस्त मुझे रावण कहकर ही पुकारने 00 लगे, किरादार निभाने पर गर्व हुआ

‘मेरी भारी-भरकम आवाज और हिंदी के स्पष्ट उच्चारण के चलते मुझे रावण की भूमिका मिली। टीवी, रेडियो, फिल्म और ‘सिया के राम’ महानाट्य में रावण की भूमिका निभा चुका हूं। हर बार परफेक्शन बढ़ता गया।’ निगमकर्मी अजय सरोज यादव कहते हैं कि समाज में भले ही इस पात्र को निगेटिव देखा जाता है, लेकिन मुझे उस किरदार को निभाने में गर्व महसूस हुआ। कई दोस्त मुझे रावण ही पुकारते हैं।

अभ्यास- रावण के पात्र को निभाने के लिए मैंने 3 महीने का अभ्यास किया था। उसकी आवाज, अट्‌टहास करना आसान नहीं है। रावण के हंसने का अंदाज और सीता हरण किसी रामलीला की जान होता है।

रावण का किरदार सबसे चैलेंजिंग, दर्शकों की नजर इसी पर होती है

‘ग्यारह वर्ष पहले कैला माता मंदिर पर रामलीला होने वाली थी। रावण का रोल निभाने वाला शख्स गायब हो गया। कद, काठी के हिसाब से मुझे तैयार किया गया। तब से रावण बनकर रामलीला को जीवंत कर रहा हूं।’ फोटोग्राफर उमेश त्रिवेदी बताते हैं यह सबसे चैलेंजिंग किरदार होता है। दर्शकों की नजर सिर्फ इसी पर होती है। मुखौटे को सिर पर बनाए रखना और 5 किलो वजनी ड्रेस में एक्टिंग करना मुश्किल है।

सुखद अनुभव- नीलकंठ कॉलोनी में बुराई के प्रतीक किसी शख्स को रावण का भेष देकर दहन किया जाता था। हर रामलीला के आखिरी में मेरा वध हो जाता है, लेकिन रामजी के हाथों मरना सुखद है।

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