हमीदिया में दूसरा किडनी ट्रांसप्लांट हुआ:61 वर्षीय मां ने बेटी को दी किडनी; पहला ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज अब मॉर्निंग-ईवनिंग वॉक पर जाते हैं, जानिए-हाल

इंदौर/भोपालएक वर्ष पहले

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में दूसरा किडनी ट्रांसप्लांट सोमवार को हुआ। सुबह 8.30 बजे से शुरू हुआ ऑपरेशन दोपहर 1.30 बजे खत्म हुआ। 27 साल की बेटी को उनकी 61 साल की मां ने किडनी डोनेट की। यहां तीन महीने पहले पहला किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। इंदौर के रहने वाले किशनदत्त शर्मा को उनकी पत्नी मीना शर्मा ने किडनी दी थी। किशन अब पूरी तरह फिट हैं। पहले की तरह चाय-नाश्ता और भरपेट खाना खाते हैं। मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक भी पर भी जाते हैं, जबकि इससे पहले यह स्थिति थी कि उन्हें चलने-फिरने में तो छोड़िए, उठने-बैठने तक में तकलीफ होती थी।

6 साल से दोनों किडनियां खराब होने की पीड़ा झेल रहे किशनदत्त शर्मा (55) का तीन महीने पहले किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। अब न केवल पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि सारे काम खुद कर लेते हैं। कुछ दवाइयां अभी चल रही हैं, लेकिन मन व शरीर एकदम स्वस्थ है।

मूलत: मुरैना के रहने वाले किशनदत्त पेशे से किसान रहे हैं। 2014 में मुरैना में ही रहने के दौरान उन्हें कई बार सिरदर्द होता था तो पेनकिलर (दर्द खत्म करने की टेबलेट) अक्सर लेते थे। इस बीच एक कार ने उन्हें टक्कर मारी तो वे जख्मी हुए। इसके बाद अकसर उन्हें उल्टियां होने लगीं। इस पर ग्वालियर में डॉक्टरों को बताया तो सारी जांचें हुई। जांच में पता चला कि दोनों किडनियां खराब हैं। डॉक्टरों ने बताया अगर ब्लड रिलेशन में या जिनका ब्लड ग्रुप समान हो, तो उसकी किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। इस बीच डायलिसिस चलता रहा और 2016 में बच्चों की पढ़ाई के सिलसिले में परिवार बिचौली हप्सी (इंदौर) में शिफ्ट हो गया।

किडनी ट्रांसप्लांट के पहले मरीज थे
6 महीने पहले किशनदत्त ने हमीदिया अस्पताल (भोपाल) में डॉक्टरों को दिखाया और वहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। खास बात यह है कि इसके लिए पत्नी मीना का ब्लड ग्रुप ‘O’ होने से कोई परेशानी नहीं थी। उन्होंने पति को किडनी देने की इच्छा जताई। इसके चलते दोनों की सारी जांचें हुईं और संबंधित विभागों से अनुमति लेने के बाद 7 सितम्बर को हमीदिया अस्पताल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ। इसमें पहले पत्नी मीना (डोनर) का ऑपरेशन कर किडनी निकाली गई। इसमें डेढ़ घंटा लगा। फिर किशनदत्त (रिसीवर) का ऑपरेशन हुआ, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की गई।

भरपेट भोजन के बाद अब नियमित वॉकिंग
अब तीन महीने से ज्यादा हो चुका है। मीना के मुताबिक उन्हें एक किडनी देने के बाद किसी तरह की तकलीफ नहीं है। वैसे भी डॉक्टरों ने उन्हें बता दिया था कि इंसान दोनों किडनी अच्छी होने पर एक किडनी डोनेट भी करता है तो वह बाकी जीवन भी स्वस्थ रहकर गुजार सकता है। उन्हें ऑपरेशन के बाद कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उधर, किशनदत्त के मुताबिक छह साल बाद यह पहला मौका है कि किसी भी तरह की तकलीफ नहीं है। वे अब पहले की तरह चाय-नाश्ता व भरपेट भोजन करते हैं। इसके अलावा पहले की तरह ही चलना-फिरना सहित सारे काम करते हैं। चूंकि, डॉक्टरों ने कोरोना में एहतियात बरतने को कहा है, इसलिए अक्सर खुद के फ्लैट में रहते हैं। इसके साथ ही सुबह-शाम घर में वॉकिंग करते हैं।

दूसरा ट्रांसप्लांट: 61 वर्षीय मां ने बेटी को दी किडनी
27 वर्षीय महिला को उनकी 61 वर्षीय मां ने किडनी दी। महिला के दो छोटे भाई हैं। उनके भाई ने बताया कि शुरुआत से भोपाल के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। उन्होंने भी डायलिसिस का बोल दिया था। फिर इंदौर में दिखाया तो उन्होंने भी वह सलाह दी। इसके बाद हमीदिया अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। यहां क्लिक कर पढ़िए पूरी खबर

30 मरीज ने कराया रजिस्ट्रेशन
हमीदिया अस्पताल के डॉ. हिमांशु शर्मा ने बताया कि अब तक हमीदिया में 30 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें से 6 मरीजों की जांच भी चल रही है। कुछ मरीजों के साथ डोनर को लेकर दिक्कत है।

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