ढोल बजाकर तेंदुए की खोज:इंदौर में लापता तेंदुआ 72 घंटे बाद भी नहीं मिला, जू मैनेजमेंट बोला- यहां लाया ही नहीं गया

इंदौर8 महीने पहले

इंदौर जू से लापता तेंदुआ 72 घंटे बाद भी नहीं मिला। पिंजरे लगाए, रात में हेलोजन लगाकर सर्चिंग की, फिर जू की टीम ने ढोल बजाकर तेंदुए को तलाश किया। तेंदुए की जू में तलाश तो की जा रही है, लेकिन जू मैनेजमेंट का कहना है कि वह जू में नहीं है। मैनेजमेंट का दावा है कि तेंदुआ जू लाने से पहले रास्ते में कहीं भाग गया। वहीं, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट तेंदुए के जू में ही भागने की बात कर रहा है।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम लगातार तीन दिन से तेंदुए को ढूंढ रहा है। रविवार को CCF मोहता ढोलवालों को लेकर जू में नाले के किनारे और दूसरे इलाकों में तेंदुए को सर्च करते दिखे। उनके मुताबिक जानवर ढोल की आवाज से डरकर भागते हैं। उम्मीद है कि तेंदुआ इससे पकड़ में आ जाएगा। वहीं, इसके उलट जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक CCTV फुटेज में जिसे तेंदुआ बताया जा रहा है, वो बिल्ली है।

तेंदुए के नए तरह के फुटेज आने पर उस पर रखी त्रिपाल सही सलामत पाई गई थी। इस मामले में जब सीसीएफ मोहता से बात की गई तो वह जबाव नहीं दे पाए। उनके मुताबिक इसे लेकर उन्हें कुछ खास जानकारी नहीं है। स्टाफ ने उन्हें जो बताया है उसके मुताबिक तेंदुआ जू से ही गायब हुआ है।

तेंदुआ बना पहेली

बुरहानपुर के नेपानगर से लाया गया जख्मी तेंदुआ अब पहेली बन गया है। तीन दिन बाद भी तेंदुआ नहीं मिलने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि तेंदुआ आखिर गया कहां? उसे लाया भी गया था या नहीं? या फिर जू में कहीं छिप गया। जू प्रभारी डॉ. उतम यादव के मुताबिक जिस गाड़ी में तेंदुए को लाए थे, उसमें रखा पिंजरा सुबह तक तिरपाल से पूरी तरह ढंका था। यदि पिंजरा तोड़कर तेंदुआ भागता, तो तिरपाल भी फटी या इधर-उधर होनी थी, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। जाहिर है कि तेंदुआ रास्ते में ही कहीं भाग गया। अब ठीकरा जू मैनेजमेंट पर फोड़ा जा रहा है। फिर भी शंका के आधार पर उसकी खोजबीन कर रहे हैं।

CCTV फुटेज में तेंदुआ नहीं, बिल्ली दिखी
जू मैनेजमेंट का दावा है कि CCTV फुटेज में जो तस्वीर आई है, वो बिल्ली की है। कहीं भी तेंदुआ नहीं दिखा है और न ही कहीं आहट ही मिली है। परिसर और आसपास के क्षेत्र में तेंदुए पर नजर रखने के लिए 13 जगह हेलोजन लाइट लगाई गई। इस लाइट के पास में ही कैमरा लगाया जाए, ताकि यदि तेंदुआ वहां से गुजरे या कोई भी जानवर निकले, तो कैमरे से स्पष्ट देखा जा सके। इसके साथ ही कैमरे की रिकॉर्डिंग पर रातभर नजर रखी गई। इस दौरान 5 बार ऐसा हुआ, जब जानवर कैमरे की परिधि में आए। गौर से देखा, तो पता चला कि कैमरे की नजर में आने वाले जानवर में दो बार कुत्ता था, तो 3 बार बिल्ली थी।

जू मैनेजमेंट ने उठाए सवाल
प्राणी संग्रहालय के प्रभारी उत्तम यादव के अनुसार जिस वक्त अंदर आ रहा था, उस वक्त पिंजरे के ऊपर तिरपाल ढंकी थी। वहीं, फॉरेस्ट के 5 कर्मचारियों में से एक भी व्यक्ति ट्रक के पास मौजूद नहीं था। ड्राइवर के अलावा, सभी कर्मचारी ट्रक छोड़कर चले गए थे। वहीं, गुरुवार सुबह सबसे पहला फोन प्राणी संग्रहालय के NGO कर्मचारी द्वारा तेंदुए के भागने की बात बताई गई थी।

जो कर्मचारी तेंदुआ दिखने का दावा कर रहा था, वह भी पीछे हटा
गुरुवार दोपहर तेंदुए की भागने की खबर के बाद शुक्रवार तड़के करीब 4:00 बजे NGO में काम करने वाले ब्रजेश ने बताया कि उसने तेंदुए को भागते देखा है। इसके बाद सुबह फॉरेस्ट के अधिकारी, जू प्रभारी और 25 कर्मचारियों के साथ इलाके की सर्चिंग करते रहे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। शनिवार दोपहर ब्रजेश ने मना कर दिया कि उसने तेंदुए को देखने की बात नहीं की।