इंदौर जू से भागा तेंदुआ 2KM दूर मिला:रात में ​​​​​​​पिंजरे लगाकर हेलोजन की रोशनी में खोजा, एक्सपर्ट डॉग बुलवाया; ढोल तक बजाने पड़े

इंदौर5 महीने पहले

इंदौर जू से भागा तेंदुआ 6वें दिन रेस्क्यू कर लिया गया। नवरत्न बाग इलाके में तेंदुए के दिखाई देने के बाद जू और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम उसे रेस्क्यू करने में कामयाब रही। तेंदुआ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ऑफिस के रेस्ट हाउस के पास मिला। यह एरिया जू से 2KM दूर है। नवरत्न बाग में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ऑफिसर के बंगले हैं। नवरत्न बाग से ही रेसिडेंशियल एरिया लगा हुआ है। यहां IG, कलेक्टर, SP, ADM और दूसरे अफसरों के बंगले हैं। पास में ही आजादनगर और संविदनगर इलाका लगा है। जिला जेल भी है।

बुरहानपुर के पास नेपानगर से फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के 7 कर्मचारी तेंदुए को बुधवार रात इंदौर जू लाए थे। दूसरे दिन गुरुवार सुबह तेंदुआ ट्रक में रखे पिंजरे से निकलकर भाग गया था। इसके बाद से ही उसकी तलाश जारी थी। इन 5 दिनों (120 घंटे) में तेंदुए की तलाश के लिए पिंजरे लगाए गए, हेलोजन लगाकर रात में सर्चिंग की, एक्सपर्ट डॉग को बुलाया। ढोल बजवाए गए, ताकि वह आवाज सुनकर भागे। आइए, जानते हैं पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन...

DAY 1: 52 एकड़ में फैले जू में सर्च ऑपरेशन
बुधवार रात 9.30 बजे तेंदुए को जू लाया गया था। यहां ट्रक रातभर खड़ा रहा। गुरुवार को तेंदुए को पिंजरे से जू में शिफ्ट किया जाना था। पिंजरा ट्रक में रखा था, लेकिन गुरुवार सुबह 7 बजे तेंदुआ इसमें नहीं था। टीम ने गुपचुप सर्चिंग शुरू की। शाम तक खबर मीडिया में आ गई। इसके बाद सर्चिंग में तेजी ला दी गई। देर रात तक हेलोजन लाइट के सहारे तेंदुए को तलाशा गया।

DAY 2: CCTV में तेंदुआ दिखने का दावा
तीसरे दिन तेंदुआ CCTV में दिखा। टीम तलाश में जुटी थी। 12.30 बजे एक कैमरे के फुटेज में तेंदुआ दिखने का दावा किया गया। इससे इस बात की पुष्टि हो गई की तेंदुआ जू में ही है। बुरहानपुर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम और इंदौर जू के करीब 20 वर्कर्स उसे पकड़ने की कोशिश में जुटे रहे। जाल और पिंजरे लगाए गए। पूरा दिन गुजरने के बाद भी टीम खाली हाथ रही।

DAY 3: जू मैनेजमेंट और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने एक-दूसरे पर मढ़े आरोप
तीसरे दिन भी तेंदुए की तलाश जारी रही, लेकिन इस दिन जू मैनेजमेंट ने यह दावा कर दिया कि तेंदुआ यहां लाया ही नहीं गया। जू प्रभारी उत्तम यादव ने कहा कि CCTV फुटेज में नजर आ रहे जानवर कुत्ते और बिल्लियां हैं। तेंदुआ जू लाते समय रास्ते में ही कहीं भाग गया। उनका तर्क था कि तेंदुआ जू से भागता तो उसके पिंजरे पर ढंकी तिरपाल फटी होती। वहीं, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का कहना था कि तेंदुआ जू से ही भागा है।

DAY 4: एक्सपर्ट डॉग और ढोल वाले बुलवाए
चौथे दिन खंडवा से एक्सपर्ट डॉग को बुलवाया गया। यह डॉग सर्च में माहिर था। डॉग नाले के किनारे और मैदान में आकर बार-बार रुका। इसके बाद इसी दिन ढोल वालों को बुलवाया गया। दरअसल, शोर सुनकर जानवर भागते हैं। ऐसे में टीम को यह उम्मीद थी कि ढोल की आवाज से तेंदुआ अगर छिपा होगा तो यहां-वहां भागेगा और नजर में आ जाएगा।

DAY 5: नाले किनारे और रेसिडेंशियल एरिया में सर्च
पांचवें दिन टीम ने ढोल वालों को साथ लेकर जू के करीब नाले के किनारे-किनारे सर्चिंग की। आसपास के रेसिडेंशियल एरिया में भी तलाश की गई, लेकिन तेंदुए का पता नहीं चला।

जू बंद होने से मैनेजमेंट को 5 लाख से ज्यादा का नुकसान

इंदौर जू 5 दिन बंद रहा। इससे यहां मैनेजमेंट को 5 लाख से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा। जू प्रभारी डॉक्टर उत्तम यादव के मुताबिक जू में हर दिन 4500 के करीब टूरिस्ट आते हैं। संडे के दिन यह संख्या 22 हजार तक पहुंच जाती है।

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