कमलनाथ के साथ लिफ्ट में हादसा:कांग्रेस नेता जायसवाल बोलीं - ऐसे लगा जैसे बम धमाका हुआ हो; लिफ्ट में धूल का गुबार था, कुछ दिखाई नहीं दे रहा था

इंदौर2 वर्ष पहले
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लिफ्ट में कमलनाथ के साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी समेत कई नेता सवार हुए थे। - Dainik Bhaskar
लिफ्ट में कमलनाथ के साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी समेत कई नेता सवार हुए थे।
  • डीएनएस अस्पताल में हुआ हादसा। 15 मिनट तक लिफ्ट का लॉक नहीं खुला

मैं और बाकी सब लोग लिफ्ट में खड़े थे। जैसे ही गेट लगाकर बटन दबाया, लिफ्ट धड़ाम से नीचे जा गिरी। लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ हो। मुझे भी चोट लगी। जैसे ही लिफ्ट गिरी, अंदर अफरा-तफरी मच गई। जैसे तैसे संभले, लेकिन धूल का गुबार भर गया। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। यह बात हादसे की शिकार हुईं कांग्रेस नेता अर्चना जायसवाल ने बताई। जायसवाल को पैर में चोट आई है। वे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ उसी लिफ्ट में सवार थीं, जो टूटकर बेसमेंट में जा गिरी थी।

कांग्रेस नेता सत्यनारायण पटेल अस्पताल में हादसे के दौरान माैजूद थे।
कांग्रेस नेता सत्यनारायण पटेल अस्पताल में हादसे के दौरान माैजूद थे।

एक सेकंड भी पूरा नहीं हुआ होगा कि लिफ्ट टूट गई
शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल बताया कि मैं और सारे साथी और कमलनाथजी के स्टाफ के कुछ सहयोगी लिफ्ट में चढ़े। गेट लगाकर जैसे ही तीसरी मंजिल के लिए बटन दबाया, एक सेकंड भी पूरा नहीं हुआ होगा कि लिफ्ट टूटकर धड़ाम से नीचे जा गिरी। किसी को संभलने का तो दूर, सोचने का भी मौका नहीं मिला। हम सभी लिफ्ट के अंदर ही गिर पड़े। एक मिनट से ज्यादा वक्त तो उठने और हालात को समझने में लगा। ऐसा लगा मानो जान ही चली जाएगी। पूरी लिफ्ट में धूल का गुबार था। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सभी ने कमलनाथजी और एक दूसरे को संभाला। 3-4 मिनट बाद स्थिति सामान्य हुई। किसी ने आवाज़ लगाकर बाहर मौजूद लोगों को भीतर के हालात बताए। ज़िंदगी में शायद ही ऐसे अनुभव की कल्पना की थी।

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अर्चना जायसवाल के पैर में चोट आई है।
अर्चना जायसवाल के पैर में चोट आई है।

मैंने आवाज लगाई सब ठीक है, भीतर से धीमी आवाज आई, दरवाजा खोलो
कार्यकर्ता इरशाद शेख ने बताया - मैं अन्य कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल में कमलनाथ का इंतजार कर रहा था। 30 मिनट पहले लिफ्ट में आवाजाही बंद कर दी गई थी। जैसे ही नाथ व अन्य नेता लिफ्ट में चढ़े, विस्फोट जैसी आवाज आई और लिफ्ट नीचे जा गिरी। हम सब भागे। बेसमेंट में मैंने आवाज लगाई, सब ठीक हैं? तभी लिफ्ट से आवाज आई कि जल्दी दरवाजा खोलो। एक कर्मचारी चाबी लाया, लेकिन उससे लिफ्ट नहीं खुली। भारी मशक्कत के बाद लिफ्ट खुली और सब बाहर निकले। फिर हमने सबकी धूल हटाई।

लिफ्ट में सवार होते ही वह ऊपर जाने की जगह नीचे गिर गई थी।
लिफ्ट में सवार होते ही वह ऊपर जाने की जगह नीचे गिर गई थी।

नाथ बाहर आते ही सीढ़ियां चढ़े, रास्ते में बोले- ओवरलोडिंग नहीं कुछ और
जैसे ही लिफ्ट खुली। नाथ धूल साफ होते ही आगे बढ़े। सीढ़ियों से ही नेताओं के साथ तीसरी मंजिल पर चल पड़े। रास्ते में बोले, अगर ओवरलोडिंग वजह होती तो लिफ्ट इतनी रफ्तार से नीचे नहीं गिरती। बल्कि सेंसर बजता। ये तो टूटकर गिरी है। नाथ का चेकअप भी हुआ। नाथ बाद में पटेल से मिले और हालचाल जाने।

सलूजा बोले- बड़ी चूक, कार्रवाई हो
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा, घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सुरक्षा में बड़ी लापरवाही व चूक है। अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई हो

अस्पताल प्रबंधन ने कहा- लिफ्ट में तकनीकी खामी से हादसा
उधर, डीएनएस अस्पताल के डायरेक्टर मनीष सिंघवी का कहना है कि किसी तकनीकी खराबी से यह हादसा हुआ। लिफ्ट चार महीने पहले ही लगी है। लिफ्ट में लगे कैमरे खराब होने की जानकारी मुझे नहीं थी। कंपनी को जांच के लिए बुलाया है।

यह है पूरा घटनाक्रम
संभागीय कार्यकर्ता सम्मेलन में रविवार को शामिल होने के लिए इंदौर आए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ एलआईजी चौराहा स्थित डीएनएस अस्पताल की लिफ्ट में बड़ा हादसा हो गया। वे यहां भर्ती पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल को देखने के लिए पहुंचे थे। नाथ अन्य नेताओं व सुरक्षा अधिकारी के साथ जैसे ही लिफ्ट में चढ़े, बटन दबाते ही धमाके की आवाज के साथ लिफ्ट नीचे बेसमेंट में जा गिरी। नेता एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। नाथ का सिर लिफ्ट की छत से टकरा गया।

वरिष्ठ नेता अर्चना जायसवाल भी इसमें घायल हो गईं। उनके पैर में चोट आई। सभी नेताओं पर धूल का गुबार जमा हो गया। करीब 15 मिनट तक बेसमेंट में फंसे रहे, लेकिन लॉक नहीं खुला। बमुश्किल एक-एक कर सभी को बाहर निकाला गया। लिफ्ट में नाथ के साथ सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, विनय बाकलीवाल, राधेश्याम पटेल,1 सिक्युरिटी अफसर, एक पुलिस अफसर और उनके पीएसओ सहित 13 लोग सवार थे। कलेक्टर मनीष सिंह ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम मुख्यालय हिमांशु चंद्रा को जांच सौंपी गई है।

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