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कोताही का कोरोना / देश में लॉकडाउन, सारे निर्माण बंद, लेकिन पीपल्याहाना ब्रिज पर 50 से ज्यादा मजदूरों से करवाया जा रहा काम

रिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज यहां लॉकडाउन के बाद भी कार्य जारी है रिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज यहां लॉकडाउन के बाद भी कार्य जारी है
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रिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज यहां लॉकडाउन के बाद भी कार्य जारी हैरिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज यहां लॉकडाउन के बाद भी कार्य जारी है

  • मजदूर बोले- हमें समय पर ब्रिज बनाने का कहा जा रहा है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम ही नहीं
  • देशभर के निर्माण कार्य बंद हो गए, लेकिन रिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज का काम निरंतर चल रहा है

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 04:38 AM IST

इंदौर. पूरे देश में लॉकडाउन होने के बाद अधिकांश शासकीय दफ्तर और निर्माण कार्य बंद है, लेकिन इंदौर के पीपल्याहाना में बिहार के 50 से ज्यादा मजदूरों से दबाव बनाकर काम करवाया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि वे तो इस महामारी के डर से अपने कमरों में रहकर आराम करना चाहते हैं, लेकिन अफसर उन्हें स्पेशल परमिशन का हवाला देकर काम करवा रहे हैं। उधर, पता चला है कि ब्रिज को जल्द बनवाने और उन्हें सोशल दूरी के हिसाब से काम करवाया जा रहा है। 

कोरोना की बीमारी के चलते भले ही पूरे देशभर के निर्माण कार्य बंद हो गए हैं, लेकिन रिंग रोड स्थित पीपल्याहाना ब्रिज का काम निरंतर चल रहा है। यहां अभी बिहार से आए कई मजदूर काम कर रहे हैं। कोरोना वायरस से बचाव के लिए उन्हें सिर्फ मास्क दिए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि वे कुछ दूरी बनाकर काम करें। इस मामले में नाम न छापने के अनुरोध पर कुछ मजदूरों ने बताया कि वे भी घरों में बंद होना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें भी इस बीमारी से डर लग रहा है, लेकिन कंपनी के लोगों ने उन्हें धमका रखा है कि किसी को कुछ ना बताएं। चुपचाप काम करें। मजदूरों का कहना है कि वे एक दूसरे के उपकरण को छूते हैं। पसीना आने पर दिनभर मुंह और आंखें पोछते हैं। निर्माण सामाग्री भी एक साथ लाते हैं। इससे उन्हें बीमारी हो सकती है। भले ही ब्रिज के निर्माण के लिए स्पेशल परमिशन ली गई हो, लेकिन वे बीमारी के डर से काम नहीं करना चाहते हैं। कंपनी के लोगों के डर से उन्होंने अभी तक कहीं शिकायत भी नहीं की है।

ब्रिज पर यह लापरवाही महामारी से बचाव की हमारी कोशिशों की नींव को कर रही है कमजोर

आईडीए सीईओ विवेक श्रोत्रिय ने बताया होली के समय लंबी छुट्टी पर गए मजदूरों में बिहार के 100 मजदूर लौट आए हैं। लॉकडाउन और कर्फ्यू के बाद उनके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई। उन्हें रहने के लिए बैरक दिए गए हैं, जिसमें 10 से 15 लोग एक बैरक में रहते हैं। उनकी सुरक्षा को देखते हुए पीपल्याहाना ब्रिज पर उन्हें सोशल दूरी से काम पर लगाया गया है। ऐसे में धीरे-धीरे काम भी चल रहा है और दिनभर मजदूरों को अलग रखने का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है। इसके लिए संभागायुक्त ने विशेष तौर पर अनुमति दी है।

श्रमिक बोले- हम बिहार से आए, फिर भी हमारी जांच नहीं हुई
मजदूरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ मास्क पहनने को कहा गया है, जबकि वे राह चलते लोगों को देखते हैं तो उनके हाथों में ग्लब्स होते हैं। हम छुट्‌टी के बाद बिहार से आएं हैं, फिर भी हमारी जांच नहीं की गई। मजदूरों ने बताया कि हम एक-दूसरे के हाथ में दिया सरिया, सीमेंट, पाइप, टोपी आदि सामान पकड़ लेते हैं। इससे भी संक्रमण फैल सकता है।

तीन सहायक उप निरीक्षक व चौकीदार ड्यूटी पर नहीं मिले, सिर्फ चौकीदार को किया सस्पेंड

इंदौर| कर्फ्यू के दौरान चोइथराम सब्जी मंडी में ड्यूटी के दौरान तीन सहायक उप निरीक्षक और एक चौकीदार अनुपस्थित पाए गए। चारों के निलंबन का प्रस्ताव मंडी अधिकारियों ने भोपाल मुख्यालय भेजा, लेकिन सिर्फ चौकीदार को निलंबित किया गया। कृषि उपज मंडी समिति ने सहायक उप निरीक्षक राजेश यादव, सदन पटेल, सुरेश दुबे की ड्यूटी फल व सब्जी मंडी में और चौकीदार रामबाबू रघुवंशी की ड्यूटी दो नंबर नाके पर लगाई थी। कृषि उपज मंडी समिति के उप संचालक महेंद्र दीक्षित ने गुरुवार को निरीक्षण किया तो कार्यस्थल पर अनुपस्थित मिले।

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