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प्रवासी पक्षी दिवस:मई में आते हैं कई पक्षी, पपीहा दिखे जून में तो मानो बारिश के आसार हैं

इंदौर2 महीने पहले
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  • इस वर्ष की थीम ‘सिंग, फ्लाय, सोर लाइक अ बर्ड’

पलायन करने वाले पक्षी साउथ एशिया यानी की भारत, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देशों की ओर अपना रुख करते हैं। इस पलायन के चलते ही वर्ष में दो बार ‘प्रवासी पक्षी दिवस’ मनाया जाता है। पक्षियों के संरक्षण और प्रकृति के लिए काम करने वाली इंदौर की संस्था ‘वाइल्डलाइफ एंड नेचर कंजरवेंसी’ के सेक्रेटरी राजेश मंगल ने बताया कि इस दिन का उद्देश्य प्रवासी पक्षियों पर मंडराते खतरे, उनका परिस्थितिक महत्व और उनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करना है। इस वर्ष इस दिवस की थीम ‘सिंग, फ्लाय, सोर लाइक अ बर्ड’ है। सेंट्रल एशिया फ्लायवे के केंद्र में होने के कारण कई पक्षी इस दौरान भारत की ओर आते हैं।

‘नवरंग’ में 9 रंग होते हैं
इंदौर में प्रवासी पक्षी शीत ऋतु के अलावा गर्मी में भी अपना समय बिताने आते हैं। मुख्य रूप से इनमें मप्र का राजकीय पक्षी दूधराज है, जो अपना प्रजनन काल यहीं पूरा करता है। नवरंग भी आता है, जिसमें 9 रंग होते हैं। पाइड कुकू यानी पपीहा भी मई की गर्मी में आता है, कहा जाता है कि पपीहा जून में दिखने लगे तो मानो बारिश के आसार हैं। इसके अलावा इंडियन पैराडाइज फ्लायकैचर, ब्लू टेल्ड बी-इटर, पाइड कुकू, इंडियन कुकू, इंडियन ब्लैक बर्ड आदि आते हैं। यह सारे पक्षी मुख्य तौर पर माचल तालाब, सिरपुर, यशवंत सागर, बिलावली, बरोदा दौलत, कजलीगढ़, तिंछा फॉल, सिमरोल, पातालपानी आदि स्थानों पर आते हैं।

21 हजार फीट पर उड़ान
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर विजय सिंह चंदेल ने बताया कि भारत आने के लिए कुछ प्रवासी पक्षियों को हिंदू कुश घाटी और तिब्बत के पहाड़ जैसी बाधा को पार करना होता है। मंगोलिया, तजाकिस्तान और तिब्बत से आने वाला बार हेडेड गूज़ हिमालय के ऊपर 21000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरता है। यह दुनिया में दूसरा सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी माना गया है। साइबेरिया साउथ और रशिया से आने वाले साइबेरियन स्टोनचेट चीन, तुर्की और हिमालय होकर भारत आते हैं। यह पक्षी एक बार में पांच सौ किमी का सफर तय करते हैं।

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