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  • More Than 20 Thousand Businessmen Of Indore Who Supply To Other Districts Will Come Under The Purview Of GST.

ईवे बिल में शामिल किराना, कपड़े सहित 30 सामग्री:अन्य जिलों में सप्लाय करने वाले इंदौर के 20 हजार से ज्यादा कारोबारी आएंगे जीएसटी के दायरे में

इंदौर5 महीने पहले
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शासन द्वारा 30 और आइटम के ई-वे बिल में जोड़ने का सीधा असर इंदौर सहित मप्र के भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर व अन्य ऐसे सभी शहर जहां से माल अन्य जिलों में सप्लाय होता है, वहां के कारोबारियों पर पड़ेगा। इंदौर किराना, कपड़े व अन्य आइटम के लिए प्रदेश का सबसे बड़ा सप्लाय बाजार है।

अब यहां के 20 हजार से ज्यादा कारोबारियों को अन्य जिलों में माल सप्लाय करने से पहले जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कारण है कि बिना रजिस्ट्रेशन के ई-वे बिल अपलोड नहीं किया जा सकता है। वहीं पूरे प्रदेश में 40 से 50 हजार कारोबारियों के इस दायरे में आने की संभावना है। जीएसटी में रजिस्टर्ड होने पर कारोबारियों पर मासिक या तिमाही रिटर्न व टैक्स भरने की जिम्मेदारी भी आ जाएगी।

व्यापारिक संगठन- प्रस्ताव वापस लिया जाए

अहिल्या चैंबर ने वाणिज्यिक कर आयुक्त लोकेश कुमार जाटव से मुलाकात कर इसे लेकर ज्ञापन दिया और इन सभी 30 नए आइटम पर ई-वे बिल वापस लेने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल, महामंत्री सुशील सुरेका, रसनिधि गुप्ता और इशाक चौधरी शामिल थे।

वहीं मालवा चैंबर के अजीतसिंह नारंग और सचिव सुरेश हरियानी ने कहा कि यह जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। कम से कम एक माह का समय दिया जाना चाहिए था। वहीं क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष हंसराज जैन ने कहा कि व्यापार करना ही मुश्किल हो जाएगा। यहां से हर जिले में कपड़ा जाता है। जीएसटी के ई-वे बिल से तो कारोबारी की कमर टूट जाएगी।

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