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रेमडेसिविर खरीदने से पहले यह खबर जरूरी पढ़िए:डॉक्टर्स पैनल ने कहा- फेफड़ों में 40 फीसदी संक्रमण फैलने के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत, सभी कोरोना मरीज को लगाने की आवश्यकता नहीं

इंदौर4 महीने पहले
इंदौर रेसीडेंसी कोठी में बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करे डॉक्टर्स।

यह राहत की खबर शायद उन सभी कोरोना मरीज के परिजनों के लिए है, जो कि दिन -रात एक कर रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए रोजाना घंटों कतार में खड़े हो रहे हैं। इंदौर रेसीडेंसी कोठी पर इसको लेकर इंदौर के डॉक्टरों की बैठक हुई। इसमें अधिकतर डॉक्टरों का कहना था- ' यह इंजेक्शन केवल उन्हीं मरीजों के लिए है, जिनके फेफड़ों में 40% से अधिक संक्रमण है। आम जनता में यह भ्रम फैल चुका है कि यह इंजेक्शन सभी कोरोना पेशेंट को लगाना अनिवार्य है। इसके लिए छोटे अस्पतालों के बीएमएस डॉक्टर जिम्मेदार हैं।'

शनिवार को हुई रेसीडेंसी कोठी पर एक बैठक के दौरान डॉक्टर सुमित शुक्ला और डॉक्टर विनोद भंडारी ने बताया कि कि 3 जुलाई 2020 को केंद्र सरकार और WHO ने रेमडेसिविर को गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बताया गया है कि इसका इस्तेमाल किन मरीजों पर किया जाना है। जो मरीज अभी गंभीर नहीं हैं और न ही नया है, जिसे डॉक्टर की भाषा में मॉडरेट मरीज कहा जाता है। ऐसे मरीजों में ऑक्सीजन की कमी होने लगे, तो उन्हें रेमडेसिविर का इंजेक्शन देना जरूरी है। प्रत्येक कोरोना मरीज को लगाने की जरूरत नहीं है। साथ ही तुरंत सिटी स्कैन जरूरी नहीं है। इससे बहुत कुछ जानकारी नहीं मिलती है। तीन से चार दिन बाद सिटी स्कैन करवाने से ज्यादा जानकारी मिल पाती है। इससे सिटी स्कैन सेंटर पर लोग बेवजह भीड़ बढ़ा रहे हैं।

होम आइसोलेशन के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। इसके लिए भी गाइडलाइन तय है। होम आइसोलेट वालों के लिए सामान्य ट्रीटमेंट ही काफी है। हम पहले दिन से कह रहे हैं कि 80 फीसद लोगों के लिए कोरोना एक सामान्य फ्लू जैसा इंफेक्शन है, लेकिन डॉक्टर सलाह से इलाज लेना जरूरी है। डॉक्टर का कहना है कि गाइडलाइन तय होने वाली है, जिसमें क्वालिफाइड एक्सपोर्ट लोग बताएंगे कि रेमडेसिविर घर बुलाकर लेने वाली दवा नहीं है। न इसकी उतनी जरूरत है।

छोटे अस्पतालों के डॉक्टरों ने बढ़ाया रेमडेसिविर का दर्द

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर छोटे अस्पतालों में बीएमएस डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। इन्हें ये जानकारी नहीं कि रेमडेसिविर किन परिस्थितियों में जरूरी है। साधारण मरीज को नहीं लगाया जा सकता, फिर भी छोटे अस्पताल हर भर्ती मरीज को रेमडेसिविर लाने के लिए कह रहे हैं। इसी कारण रेमडेसिविर को लेकर परेशानी हो रही है। विशेष अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला का कहना है कि अगर 300 सौ मरीज भर्ती हैं, तो सिर्फ 100 मरीजो को रेमडेसिविर की जरूरत पड़ती है, वो भी तब जब फेफड़ों में संक्रमण चालीस फीसदी से ज्यादा हो।

MGM कॉलेज को मिले 5 हजार रेमडेसिविर
प्रदेश के बारह मेडिकल कॉलेजों में रेमडेसिविर इंजेक्शन शासन मुफ्त मुहैया करवा रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज को 5 हजार इंजेक्शन दिए गए हैं। कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों को मांग के हिसाब से रेमडेसिविर दिए जाएंगे। इंदौर के अलावा ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, रतलाम, खंडवा, विदिशा, सागर, शिवपुरी, दतिया, छिंदवाड़ा और शहडोल को रेमडेसिविर का वेयर हाउस होगा। एमजीएम मेडिकल कॉलेज को वेयर हाउस बनाया गया है।

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