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इंदौर में रेमडेसिविर का बंपर स्टॉक:40 से ज्यादा अस्पतालों में एक लाख से ज्यादा वॉयल उपलब्ध, लेकिन एक्सपायरी डेट को लेकर उलझन

इंदौर6 दिन पहले
रेमडेसिविर बनाने वाली छह से ज्यादा कंपनियां हैं, जबकि शहर के दवा बाजार सहित अन्य मिलाकर 12 स्टॉकिस्ट हैं।

कोरोना की तीसरी संभावित लहर की तैयारियां चल रही हैं। इसके तहत अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, डॉक्टरों-नर्सों की विशेष ट्रेनिंग आदि पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खास है कि दूसरी लहर में जिस जीवनरक्षक रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए लोग भटक रहे थे, इस बार पहले ही इसका बंपर स्टॉक है। मौजूदा स्थिति में 40 से ज्यादा प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में इसका स्टॉक 1 लाख से भी ज्यादा है। इसके चलते किसी तरह की परेशानी नहीं है। दूसरी ओर यह भी स्थिति है कि इन इंजेक्शनों की एक्सपायरी डेट एक साल तक होती है। ऐसे में ये करोड़ों के स्टॉक किए इंजेक्शन एक्सपायरी डेट निकलने के बाद बेकार भी हो जाएंगे।

दूूसरी लहर में रेमडेसिविर वितरण में पक्षपात के आरोप, नकली इंजेक्शन बेचने समेत कई स्थितियां सामने आईं। इसके चलते एक सिस्टम बनाया गया। इसके तहत संबंधित शहर के स्टॉकिस्ट के माध्यम से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को दिया जाने लगा। इंदौर में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 12 स्टॉकिस्ट हैं। तब सबसे ज्यादा जरूरत इंदौर को पड़ी थी।

शुरुआती दौर में शहर को एक दिन में 500 से लेकर अधिकतम 5 हजार इंजेक्शन तक दिए गए। यह भोपाल से हुए आदेश के बाद संंबंधित जिलों में अस्पतालों में कोविड मरीजों की क्षमता और जरुरत के लिहाज से दिए गए। मार्च-अप्रैल में इसे लेकर काफी परेशानियां थी। इसके बाद शासन ने विभिन्न कंपनियों से संपर्क कर ज्यादा सप्लाई करने की बात कही। इस तरह मई में पर्याप्त मात्रा में रेमडेसिविर उपलब्ध हो गए।

15 मई के बाद किसी भी अस्पताल में डिलीवरी नहीं

इस बीच, 40 से ज्यादा अस्पतालों में मई में 1 लाख से ज्यादा इंजेक्शन का स्टॉक हो गया। वह इसलिए कि मई-जून में संक्रमण पर नियंत्रण होना शुरू हुआ। मरीजों की संख्या कम होने लगी। दूसरी ओर, ऐसे मरीज भी थे, जिनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें छह डोज लगने थे। इस लिहाज से अस्पतालों ने इंजेक्शन का स्टॉक मंगवा लिया, लेकिन इस बीच कुछ मरीजों की मौत हो गई। उनके बचे इंजेक्शन भी स्टॉक में ही रहे। वैसे, 15 मई को अस्पतालों को आखिरी बार इंजेक्शन सप्लाई किए गए। इसके बाद इंजेक्शन मंगाने की जरूरत नहीं पड़ी।

कंपनियां और स्टॉकिस्ट भी निश्चिंत

रेमडेसिविर बनाने वाली छह से ज्यादा कंपनियां हैं, जबकि शहर के दवा बाजार सहित अन्य मिलाकर 12 स्टॉकिस्ट हैं। इनके पास भी अभी खासा स्टॉक है। इसके चलते तीसरी लहर अगर आती भी है, तो रेमडेसिविर को लेकर चिंता की बात नहीं है। इसके चलते जिला प्रशासन रेमडेसिविर के मामले में निश्चिंत है। दूसर ओर कंपनियों व स्टॉकिस्ट की परेशानी यह है कि वे आगे की स्थिति नहीं जान पा रहे हैं। जनहित में तो हर व्यवसायी यही चाहता है कि तीसरी लहर नहीं आए, लेकिन परेशानी स्टॉक में रखे 1 लाख से ज्यादा इंजेक्शन की है। आने वाले महीनों में इनकी एक्सपायरी डेट निकल जाएगी। ऐसे में करोड़ों के ये इंजेक्शन बेकार हो जाएंगे।

कम जरुरत ही पड़ सकती है रेमडेसिविर की

- जिले में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों को पहला और 20 फीसदी से ज्यादा को दोनों डोज लग चुके हैं। एससीएस मो. सुलेमान बता चुके हैं कि वैक्सीनेट हो चुके लोगों को कम खतरा है। अगर वे प्रभावित भी हुए तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में जाहिर है कि तब रेमडेसिविर की भी जरुरत कम ही पड़ेगी।

- दूसरी लहर में 110 से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के मरीज भर्ती थे। इस बार 46 को ही इसके दायरे में लिया गया है। ऐसे में बचे 64 अस्पतालों में से कुछ के पास पहले का भी स्टॉक है। जरूरत पड़ने पर पहले इनका उपयोग किया जा सकता है।

- वैसे अधिकतम एक मरीज को 6 डोज लगते हैं। इस लिहाज से भी पर्याप्त स्टॉक है। इधर, इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने बताया कि शहर के सभी अस्पतालों व परिसर में स्थित दवाइयों की दुकानों पर रेमडेसिविर की भरपूर उपलब्धता है। दूसरी लहर में शासन ने रेमडेसिविर के वितरण की जो व्यवस्था शुरू की थी, उसका पालन किया जाएगा। अगर और भी इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है तो कंपनियों से बात कर मंगा लिए जाएंगे।

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