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IIM इंदौर को ऑस्ट्रेलिया-इंडिया काउंसिल ग्रांट:न्यू साउथ वेल्स और कैनबरा यूनिवर्सिटी के साथ करार, ग्रामीण भारत में बिजली पहुंचाने पर साथ काम करेंगे

इंदौर2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

IIMI इंदौर ने कैनबरा यूनिवर्सिटी (CU) और न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी (NSWU) के साथ ऑस्ट्रेलिया-इंडिया काउंसिल ग्रांट हासिल की है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के विदेश मामलों और व्यापार मंत्री मारिस पायने ने हाल ही में इस ग्रांट की घोषणा की थी। तीनों संस्थान ग्रामीण भारत में बिजली पहुंचाने पर काम करेंगे।

IIMI, CU और NSWU ने ग्रामीण भारत में ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम का विस्तार करने के लिए 'वित्तपोषण तंत्र का विकास' नामक एक परियोजना के लिए ग्रांट प्राप्त की है। 146 संगठन ने अनुदान के लिए आवेदन किया था।11 परियोजनाओं का चयन किया गया है। इस परियोजना के तहत IIMI के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु राय और डॉ. मिलिका सिमुल, निदेशक अनुसंधान और नवाचार, कैनबरा विश्वविद्यालय ने हाल ही में MOU साइन किए हैं।

जैसा कि नाम से ही पता चलता है यह सोलर सिस्टम ऑफ-ग्रिड यानी बिना बिजली के कार्य करता है। सिस्टम ऐसी जगह के लिए बेहतर है, जहां बिजली नहीं है अथवा बहुत अधिक कटौती होती है। या फिर ऐसे लोग जो सिर्फ सोलर से अपना सारा लोड चलाना चाहते हैं और बिजली का कनेक्शन नहीं लेना चाहते।

समाज की बेहतरी में योगदान देने के मिशन में सहायक होगी परियोजना

IIMI के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु रॉय ने कहा कि IIMI का मिशन प्रासंगिक और सामाजिक रूप से जागरूक बिजनेस स्कूल बनना है। हमारा लक्ष्य राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाना है। यह परियोजना IIMI र के समाज की बेहतरी में योगदान देने के मिशन में सहायक होगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। उन्होंने बताया IIMI टीम में प्रो. केयूर ठाकर, संजय घोष के साथ प्रो. पोटा NSWU और प्रो. मिलिंद साठे, CU भी शामिल हैं।

वित्तीय समाधान पर केंद्रित है परियोजना
प्रो. केयूर ठाकर ने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण भारत में बिजली की पहुंच प्रदान करने के लिए वित्तीय समाधान पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के लिए लंबी अवधि के आधार पर ऑफ-ग्रिड बिजली की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाने के लिए एक स्थायी वित्तपोषण तंत्र का डिजाइन, विकास और परीक्षण करना है। तीनों संस्थान अब इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। टीम विभिन्न हितधारकों जैसे नियामकों, विशेषज्ञों, फाइनेंसर, निर्माताओं और समुदायों के साथ जल्द ही चर्चा करेगी और क्षेत्र का दौरा करेगी।

कई लोग आधुनिक ऊर्जा की पहुंच से वंचित

ट्रैकिंग SDG7 द एनर्जी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2020 के मुताबिक दुनियाभर में करीब 789 मिलियन लोग सस्ती और सुरक्षित आधुनिक ऊर्जा की पहुंच से वंचित हैं। आधुनिक ऊर्जा सेवाओं के बिना रहने वाले अधिकांश लोग प्रकाश के लिए मिट्‌टी का तेल, मोमबत्तियों, बैटरी टॉर्च या अन्य तकनीकों पर निर्भर हैं। ये पारंपरिक समाधान महंगे हैं, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और संचार प्रोद्यौगिकियों की आपूर्ति नहीं करते है। जबकि ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा उत्पाद पारंपरिक समाधानों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ, सस्ता और विश्वसनीय विकल्प प्रदान करते है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण भारत में बिजली की पहुंच प्रदान करने के लिए एक समाधान प्रदान करती है।

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