• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Indore
  • MP Board Private School Association Official Raised Objection, Questions Raised By Releasing Video

स्कूल बंद करने के निर्णय का विरोध:MP बोर्ड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पदाधिकारी ने जताई आपत्ति, वीडियो जारी कर उठाए सवाल

इंदौर6 दिन पहले

इंदौर में एमपी बोर्ड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने 31 जनवरी तक स्कूल बंद करने के शासन के फैसले का विरोध किया है। एसोसिएशन पदाधिकारी ने अपना एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने शासन के इस निर्णय पर कई सवाल उठाए है। उनका कहना है कि दूसरे देशों के स्कूल कोविड के बाद भी खुले है, लेकिन मध्यप्रदेश में कोविड के चलते सबसे पहले स्कूलों को ही बंद कर दिया जाता है।

एमपी बोर्ड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल सोनी ने शुक्रवार रात को वीडियो जारी करते हुए कहा कि मप्र सरकार ने कक्षा 1 से 12वीं तक के स्कूल अचानक बंद कर दिए। इसका कारण कोरोना को बताया है। यह अन्याय है मध्यप्रदेश के 50 हजार एमपी बोर्ड के स्कूलों के साथ, लाखों शिक्षकों और करोड़ों स्टूडेंट्स के साथ। जो स्टूडेंट्स पढ़ना चाहते है, लेकिन जिनके पास मोबाइल नहीं है, डेटा नहीं वे कैसे पढ़ेंगे? अगर कोई स्टूडेंट्स पढ़ना चाहता है तो उसे स्वेच्छा से स्कूल क्यों नहीं आने दिया जा रहा है? हमें ये बताया जा रहा है कि अगर स्टूडेंट्स को कोरोना हो गया तो कौन जिम्मेदारी लेगा? उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर बच्चों की इतनी चिंता है तो क्योंकि न प्रतिबंध लगा दिया जाए कि बच्चा सड़क पर भी नहीं दिखेगा।

बच्चों से दूर हो रही शिक्षा
बच्चे मॉल, टॉकीज और यहां तक की पानी पतासे के ठेले पर भी अपने पेरेंट्स के साथ जा रहा है तब कौन जिम्मेदारी लेगा। पहले से ही स्कूल 50% क्षमता के साथ काम कर रहे है। जिन पेरेंट्स के पास पैसा है, मोबाइल है, इंटरनेट है उनके बच्चे पढ़ सकते है, बाकी स्टूडेंट्स के पास से शिक्षा दूर हो गई है। हर चीज के लिए सबसे पहले स्कूल बंद कर दिए जाते है। पिछले 2 वर्ष से स्कूलों की हालत खराब है स्टूडेंट्स लिखना पढ़ना भूल गए है।

प्रतिबंध स्कूलों पर ही क्यों? शराब दुकानों पर क्यों नहीं
सोनी ने सवाल उठाया है कि सारे प्रतिबंध स्कूलों पर ही क्यों किए जा रहे है? शराब की दुकानों पर, राजनीतिक रैलियों पर क्या प्रतिबंध हो रहा है? स्कूल वालों का सवाल है कि क्या स्कूल बंद करने से कोरोना खत्म हो जाएगा? सरकार 15 से 18 साल के स्टूडेंट्स को वैक्सीन लगवा रही है। हमारी मांग है कि 10 से 15 साल के स्टूडेंट्स को भी वैक्सीन लगवाई जाए। इस तरह स्कूल बंद करना आजादी पर प्रतिबंध लगाना गलत है। एसोसिएशन इसका पुरजोर विरोध करता है। स्कूलों ने जो कर्ज लिया है, शिक्षकों की सैलरी कहां से देंगे। उन्होंने कहा जिन स्टूडेंट्स के पास स्कूल की फीस जमा करने के पैसे नहीं है वह मोबाइल और डाटा कहां से लाएगा? अगर ये प्रतिबंध नहीं हटा तो स्कूल खत्म हो जाएंगे और स्कूल, स्टूडेंट्स बहुत पीछे चले जाएंगे।

खबरें और भी हैं...