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70 टाउनशिप तैयार:रिजर्व फ्लैट न बिकने से एनओसी रुकी जिन्होंने लोन से यहां फ्लैट खरीदे उन्हें भी नहीं मिल रहा पजेशन

इंदौर11 दिन पहलेलेखक: हरिनारायण शर्मा
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  • कॉलोनाइजर को एनओसी के लिए 15% प्लॉट-फ्लैट गरीबों के लिए रखना जरूरी
  • सरकार के सामने कई बार बताई परेशानी पर नहीं निकला समाधान, निगम को भी नहीं मिल रहे गरीब

रियल एस्टेट सेक्टर में निम्न आय वर्ग को फ्लैट या प्लाट रिजर्व कर उन्हें ढूंढकर देने का नियम मुसीबत बन रहा है। इसके कारण शहर में ऐसी 60 से 70 कॉलोनियां हैं, जिन्हें पूर्णता प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिला या गरीबों के आवास पूरी तरह आवंटित नहीं होने से डेवलपर उन्हें भी प्लॉट या फ्लैट का पजेशन नहीं दे पा रहा है, जिन्होंने यहां खरीदे हैं। ऐसे लोगों पर भी दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर उनकी लोन की किस्त चल रही तो दूसरी ओर किराए का मकान लिए हैं तो किराया भी देना पड़ रहा है। जबकि काम पूरा हो चुका है।

मप्र सरकार के नियम के मुताबिक एक डेवलपर या कॉलोनाइजर को किसी भी तरह का आवासीय प्रोजेक्ट लाने पर 15% एलआईजी-ईडब्ल्यूएस के लिए प्लॉट छोड़ना पड़ते हैं। प्लॉट नहीं छोड़ते हैं तो कुल निर्मित एरिया में 15% फ्लैट बनाकर देना होते हैं। 100 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से आश्रय निधि भी देना होती है। 15% रिजर्व फ्लैट के लिए गरीब भी कॉलोनाइजर को ही ढूंढना है। इसके बिना डेवलपर को न रैरा सर्टिफिकेट मिलेगा न ही बंधक प्लॉट मुक्त होंगे।

10 एकड़ की कॉलोनी में 4 एकड़ में डेवलपमेंट, 0.90 एकड़ में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी

​​​​​​​शहर के निजी बिल्डर्स के ही करीब 8 हजार फ्लैट (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) खाली पड़े हैं। खास टाउनशिप की बात करें तो ओमेक्स, शिव सिटी, विंध्याचल, शिवालय सहित कई ऐसी टाउनशिप हैं जहां इस वर्ग के हितग्राहियों की तलाश है। डेवलपर्स के मुताबिक एक कॉलोनी यदि 10 एकड़ की है तो 4 एकड़ डेवलपमेंट हो जाने के बाद 6 एकड़ जमीन बचती है। इस 6 एकड़ में 15 प्रतिशत (9% ईडब्ल्यूएस व 6 % एलआईजी के लिए ) दो कैटेगरी में छोड़ना पड़ता है। ऐसे में करीब 0.90 एकड़ इस कोटे में आरक्षित हो जाता है। इसके अलावा बंधक प्लॉट अलग से।

क्रेडाई: सरकार राहत दे तो सभी को हो फायदा
इंदौर क्रेडाई अध्यक्ष लीलाधर माहेश्वरी के मुताबिक जब यह नियम बनाया था, तब इस वर्ग को आवास की सख्त जरूरत थी। बाद में सरकार ने सभी के लिए फ्री कर दिया। अब निगम की ही प्रॉपर्टी नहीं बिक पा रही है तो बिल्डर गरीबों को कहां से ढूंढकर लाएगा। वहीं गरीबों को 2022 तक ही पीएम आवास योजना का फायदा मिलना है। सरकार चाहे तो नियम शिथिल कर दे और सारे गरीबों को फायदा दे। जो साल का 1.10 लाख कमा रहा है वह 4 से 14 लाख तक के फ्लैट का पैसा कैसे चुकाएगा।

नरेडको: बिल्डर कहां से ढूंढकर लाएगा गरीब
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (नरेडको) के मप्र के प्रेसिडेंट विवेक दम्मानी के मुताबिक यदि कोई बिल्डर है तो वह रिजर्व कैटेगरी के फ्लैट बनाकर तो दे देगा, लेकिन वह इस कैटेगरी के परिवारों को कहां से ढूंढकर लाएगा। इस पहले यह नियम था कि यदि दो साल में रिजर्व फ्लैट या प्लॉट नहीं बिके तो वह सामान्य वर्ग के लिए ओपन हो जाएंगे, लेकिन अभी ऐसा भी नहीं है। कम से कम शासन को इस नियम में तो पंचायत के साथ निगम सीमा में भी राहत देना चाहिए।

15000 आवास का काम जारी, बुकिंग 3200 की ही
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर निगम ने ही शहर में 9 अलग-अलग जगह पर 24 हजार आवास बना रहा है। 15 हजार पर काम चल रहा है, जहां थोड़े-बहुत काम बाकी है। प्रोजेक्ट प्रभारी व चीफ इंजीनियर महेश शर्मा के मुताबिक हमारी 3200 की बुकिंग हो चुकी है और 450 परिवारों को पजेशन भी दे चुके है।
नगर निगम कॉलोनी सेल में सवा महीने से इंजीनियर ही नहीं: जहां से इसकी अनुमति जारी होती है और मॉनिटरिंग होती है वहां उपयंत्री का भी एक पद है, जो पिछले सवा महीने से खाली है।

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