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समाज व कानून व्यवस्था में नई पहल:अब स्पेशल ट्रेनिंग लेकर बाल अपराधों पर नियंत्रण, समाज में आई विकृतियों से बच्चों को बचाने का प्रयास

इंदौर19 दिन पहले
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चारों ओर से  असुरक्षित विशेष ग� - Dainik Bhaskar
चारों ओर से असुरक्षित विशेष ग�

प्रदेश में बढ़ते बाल अपराधों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि अब लगभग हर प्रकार के अपराधों में नाबालिगों की लिप्तता बढ़ती जा रही है। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से वे एक अपराध के बाद दूसरा अपराध कर रहे हैं। शहर में दो बाल सुधार गृहों की हालत यह है कि वहां जघन्य अपराधों में लिप्त रहे नाबालिग की संख्या बढ गई है। इनमें गुटीय विवाद तो हैं ही विभाग की भी कई विसंगतियां हैं जिसके चलते यहीं नए अपराध भी हो सकते हैं। कई बार यहां हमला कर व खिड़की से कूदकर नाबालिग भागे भी हैं लेकिन ढर्रा नहीं सुधर रहा है। कुछ ऐसी ही स्थितियां अन्य जिलों में भी हैं। इन सभी के मद्देनजर इंदौर पुलिस, यूनिसेफ सहित कई इकाइयां नियंत्रण के लिए प्रयासरत हैं। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए इंदौर जोन के 600 पुलिस अधिकारियों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि बाल अपराधों पर नियंत्रण हो।

हाल ही में जोन स्तर पर 6 दिनी यह ऑन लाइन स्पेशल ट्रेनिंग शुरूआत की गई है। इसके तहत बच्चों के हितों के लिए कार्यरत संस्थाओं व विभिन्न कानूनी प्रावधानों को लेकर नए सिरे से खाका तैयार किया जा रहा है। दरअसल ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में समाज में जो विकृतियां आ रही हैं उनसे इन बच्चों को बचाने व संरक्षण पर जोर दिया गया है। बच्चे अपराधी न बने व उनके साथ कोई अपराध हो तो पुलिस क्या करें? उन्हें पारिवारिक माहौल प्रदान कर सीखने की ललक हो, ऐसा आधार बनाकर ट्रेनिंग दी जा रही है।

अब ऐसे करेंगे विवेचना

- बाल अधिकारों, उनके संरक्षण व बच्चों की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए दिए गए विधिक प्रावधानों एवं सामुदायिक पुलिसिंग के तहत कार्रवाई को लेकर पुलिस अधिकारियों में आवश्यक समझ एवं दृष्टिकोण का निर्माण किया जा रहा है।

- कानूनी प्रावधानों जेजे एक्ट, पाक्सो एक्ट, किशोर न्याय आदि की तकनीकी जानकारी देकर जांच के लिए मजबूत दिशा दी जा रही है।

- बाल अपराध को रोकने के लिए किए जाने वाले प्रभावी उपाय एवं बच्चों के पुनर्वास के सार्थक कदम क्या हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैै।

- बच्चों को अपराध बोध न हो इसके लिए मनोवैज्ञानिक तरीके से काउंसिल की ट्रेनिंग।

और इधर दोनों बाल सुधार गृहों के खतरनाक हालात

इंदौर स्थित बाल सम्प्रेषण गृह
इंदौर स्थित बाल सम्प्रेषण गृह

इधर, शहर में जघन्य अपराध कर चुके नाबालिगों के रखने के लिए परदेशीपुरा के पास बाल सम्प्रेक्षण गृह व विशेष गृह हैं लेकिन वर्तमान में यहां के हालात बहुत खराब हैं। खासकर विशेष बालक गृह में तो अभी भी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं है जिसके चलते बीते सालों में कई बार नाबालिगों द्वारा हमला कर भाग चुके हैं। दो साल पहले तो आठ नाबालिगों द्वारा सुरक्षा गार्डों पर हमला कर भागने की घटना भी हो चुकी है। खास बात यह कि 2012 के निर्भया कांड के बाद के बने नए कानून के तहत गंभीर अपराधों में लिप्त नाबालिगों को विशेष गृह में रखा जाता है जबकि सामान्य अपराध में लिप्त नाबालिगों को बाल सम्प्रेषण गृह में। अब बाल सम्प्रेषण गृह में ज्यादा संख्या होने या उनकी उम्र 16 ‌वर्ष से ऊपर होने पर इन नाबालिगों को भी विशेष गृृह में बड़े अपराधों मे लिप्त नाबालिगों (16 से 18 वर्ष के बीच) के साथ रखा गया है जो घातक हैं। ऐसे में सामान्य अपराध वाले नाबालिगों की घनिष्ठता जघन्य अपराधों वाले नाबालिगों से हो जाती है और वे कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। यहां एक नाबालिग ऐसा था जिसने 7 साल पहले एक अपने साथियों के साथ एक युवक का सिर सहित हाथपैर काटकर नाले में ठिकाने लगा दिए थे। वह भी अपने साथियों के साथ यहां से भाग चुका है। ऐसे 22 अपराधी यहां हैं। कुछ समय पहले विधायक उषा ठाकुर भी यहां दौरे के दौरान इस सच्चाई से रूबरू हुई थी और उन्होंने भी इसे असुरक्षित बताया था। वर्तमान में चल रही जोन स्तरीय ट्रेनिंग में यहां से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं।

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