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पहले डोज के 100 फीसदी के बाद का फंडा:अब नए कोरोना मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री पर खास जोर, दूसरे शहरों से संक्रमण को लेकर बारीकी से नजर

इंदौर3 महीने पहले
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शहर में सोमवार को फिर कोरोना संक्रमितों की संख्या सिर्फ एक रही, जबकि रविवार को एक परिवार के 6 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। इसके पूर्व करीब एक पखवाड़े में एक दिन में 9 और 7 पॉजिटिव पाए गए थे। पॉजिटिव मरीज जिन क्षेत्रों में पाए जा रहे हैं, वहां रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) भेजी जा रही है। यह मरीजों की कांटेक्ट हिस्ट्री जुटाने के साथ इनसे जुड़े लोगों के सैंपल भी करा रही है। खास बात यह कि आरआरटी का मुख्य फोकस अब पॉजिटिव मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री पर है। दरअसल, जिले में पहले डोज का 100 फीसदी वैक्सीनेशन हो चुका है। ऐसे में अगर कहीं पॉजिटिव मरीज पाया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम की यह शंका बलवती हो जाती है कि संबंधित व्यक्ति की ट्रेवल हिस्ट्री रही है। ऐसा अनुमान अब तक सात मरीजों में सही भी पाया गया है।

दरअसल, रविवार को 6 पॉजिटिव पाए गए थे, इसमें आरआरटी को पहले ही अनुमान था कि इन सभी की ट्रेवल हिस्ट्री हो सकती है और यही स्थिति रही। ये सभी 6 सितंबर को आंध्र प्रदेश व तेलंगाना से लौटे थे और एक हफ्ते में पॉजिटिव पाए गए। इसके पूर्व बीएसएफ का एक जवान पॉजिटिव पाया गया था। फिर भी आरआरटी ने उनके नजदीकी व आसपास के लोगों के सैंपल लिए जिसमें कोई पॉजिटिव नहीं पाया गया। हिस्ट्री में पता चला कि जवान एक हफ्ते पहले ही केरल से लौटा था। गौरतलब है कि अभी भी केरल में संक्रमण चरम पर है। इसके अलावा रोज जो एक-दो पॉजिटिव पाए जा रहे हैं उसमें सीधे तौर पर तो ट्रेवल हिस्ट्री तो नहीं मिली लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि बाहर से आए व्यक्ति से ही संक्रमण वाहन, सीट या किसी चीज में लगा और वहां संबंधित ने टच किया जिससे वह संक्रमित हुआ।

… तो सड़क मार्ग से संक्रमित होने की रहती है आशंका

वैसे बाहर आने-जाने वाले लोग यदि हवाई यात्रा कर रहे हैं तो वहां पर स्क्रीनिंग की सुविधा के साथ कसावट रहती है, इसलिए संक्रमित होने की संभावना कम रहती है। हालांकि इंदौर के उद्योगपति परिवार ने अधिकांश हवाई सफर ही किया था लेकिन वे आंध्र प्रदेश व तेलंगाना जाने के बाद वहां चपेट में आए और इंदौर आने के एक हफ्ते बाद पॉजीटिव पाए गए।

ऐसी ही स्थिति ट्रेनों को लेकर है

तीसरा, सड़क मार्ग को लेकर स्थिति यह है कि लोग बसों से सफर करें या निजी वाहनों से। आने-जाने वाले लोगों की अधिकांश शहरों में स्क्रीनिंग नहीं होती। ऐसे में संक्रमण की चपेट में आने की आशंका रहती है।

वैक्सीन भी कंफर्म, लेकिन पहला डोज या दोनों डोज

अहम यह कि आरआरटी जब भी किसी पॉजिटिव मरीज के निवास पर पहुंचती है तो कांटेक्ट हिस्ट्री, ट्रेवल हिस्ट्री सहित तमान जानकारी फॉर्म में भरी जाती है। इसमें ऐसा कोई कॉलम नहीं है कि मरीज को वैक्सीन का पहला व दूसरा डोज कब लगाया गया था। हालांकि मौखिक रूप से यह पूछ लिया जाता है लेकिन इसकी जानकारी मरीज के अस्पताल या कोविड केयर सेंटर में भर्ती होने के दौरान लगती है कि उसे पहला डोज लगा या दोनों डोज लगे हैं। हालांकि अब इंदौर के 18 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के संपर्क होने पर डॉक्टर यह मान लेते हैं कि उसे पहला डोज तो लग चुका है। वैसे लंबे समय से जो कोरोना मरीज भर्ती हुए हैं इनमें से एक भी गंभीर नहीं रहा। इसके पीछे मुख्य कारण वैक्सीन लगाना ही रहा है। सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या के मुताबिक आरआरटी का मुख्य जोर ट्रेवल हिस्ट्री पर तो है ही लेकिन कांटेक्ट हिस्ट्री, ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग भी कराई जाती है ताकि संक्रमण पर नियंत्रण रहे। वैक्सीन को लेकर भी लोगों से लगातार अपील की जा रही है।

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