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बंगाली फ्लाईओवर ब्रिज:डिजाइन बदलने पर अब पीएस की बैठक में अंतिम निर्णय, डिजाइन पर सहमति बनी तो प्रस्ताव पास कराने पीडब्ल्यूडी मंत्री से मिलेंगे मंत्री सिलावट

इंदौर3 महीने पहले
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पहले ब्रिज का काम माधवराव सिंधिया की प्रतिमा की शिफ्टिंग की वजह से पांच माह तक रुका रहा था। - Dainik Bhaskar
पहले ब्रिज का काम माधवराव सिंधिया की प्रतिमा की शिफ्टिंग की वजह से पांच माह तक रुका रहा था।

बंगाली फ्लाई ओवर ब्रिज के बीच के हिस्से में काम करने के दौरान डिजाइन बदले जाने को लेकर जनप्रतिनिधियों ने पेंच फंसा दिया है। इसके बाद अब शुक्रवार को शाम प्रमुख सचिव के साथ संभागायुक्त कार्यालय में बैठक होगी। इसमें इस बात पर चर्चा की जाएगी कि बंगाली फ्लाईओवर को पुरानी डिजाइन के साथ ही बनाया जाए, जिसमें बीच में पांच फीट का पिलर आ रहा है या फिर कोई और विकल्प पर विचार किया जाए। अगर सबकुछ ठीक रहा और डिजाइन फाइनल हो गई तो पीडब्ल्यूडी अफसर इसका प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजेंगे, जिसके संबंध में 22 जून को भोपाल में पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के साथ मंत्री तुलसी सिलावट व जनप्रतिनिधि चर्चा करेंगे।

फ्लाईओवर ब्रिज की डिजाइन को लेकर सांसद शंकर लालवानी शुक्रवार को होने वाली बैठक में तीन विकल्प भी रखेंगे। इसमें से पहला बीच के हिस्से में स्टील की गार्डर डालकर काम कर सकते हैं। इसमें समय भी कम लगेगा और ब्रिज भी जल्दी पूरा हो जाएगा। इसके अलावा रायपुर में बने आर्च वाले फ्लाईओवर की तर्ज पर बनाया जा सकता है। इसमें बीच का पूरा हिस्सा स्टील व लोहे का रहेगा। वहीं, तीसरे विकल्प में स्टील व सीमेंट को मिलाकर तैयार किया जा सकता है। हालांकि यह थोड़ा कठिन काम है और इसमें समय भी 6 महीने से ज्यादा लग सकता है। इसके अलावा अगर वर्तमान की डिजाइन के मुताबिक ही काम किया जाता है तो बंगाली फ्लाई ओवर ब्रिज को 6 महीने में ही तैयार किया जा सकता है।

120 कॉलोनियों के 2 लाख से ज्यादा लोगों का काम-धंधा प्रभावित

बंगाली चौराहे पर फ्लायओवर की देरी से ट्रैफिक ही नहीं 120 कॉलोनियों के 2 लाख से ज्यादा लोगों का काम-धंधा भी प्रभावित हुआ है। जब से फ्लायओ‌वर बनना शुरू हुआ है, तब से अब तक 20 से ज्यादा दुकानदारों को यहां से व्यापार समेटना पड़ा है। चौराहे से जुड़े 20 कॉलोनियों के लगभग 12 से 15 हजार लोगों को यही चिंता सताती है कि जैसे ही घर से बाहर निकलेंगे चौराहे पर जाम में फंस जाएंगे। सर्विस रोड के रहवासियों की तो यह हालत है कि किसी काम से जाने के लिए अपनी गाड़ी तक सड़क पर नहीं उतार पाते हैं, क्योंकि मेन रोड का ट्रैफिक सर्विस रोड पर शिफ्ट हो गया है।

एक भी ब्रिज आज तक सही तरीके से नहीं बनाया

  • सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अफसरों की मनमानी और लापरवाही के कारण जनता को लंबे समय से परेशान होना पड़ रहा है। इनके द्वारा बनाया गया एक भी ब्रिज पूरी तरह से सुरक्षित व सफल नहीं है। बंगाली ब्रिज में भी वही गलती दोहराने जा रहे हैं। बार-बार बोलने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
  • मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि कोई भी निर्माण कार्य विकास और प्रगति के लिए किए जाते हैं ना कि लोगों के लिए सिरदर्द बनने के लिए। बंगाली ब्रिज से शहर की दो लाख के करीब जनता को राहत मिलेगी। पीडब्ल्यूडी के अफसर व मंत्री से इस समस्या के ऐसे विकल्प निकाले जाने के लिए चर्चा की जाएगी, जिससे कि समय भी कम लगे और भविष्य में लोगों को परेशानी भी ना हो।
  • विधायक महेंद्र हार्डिया ने कहा कि लॉकडाउन के पहले ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव से डिजाइन के विषय में चर्चा की गई थी, लेकिन लॉकडाउन व कोरोना संक्रमण के कारण इस मामले में आगे बात नहीं हो सकी। हालही में एक बार फिर मंत्री से मिलकर डिजाइन बदलने को लेकर चर्चा की है। ऐसे कुल लगभग सात बार ब्रिज के संबंध में जनता के हित की बात रख चुका हूं।

ऐसे उठा पूरा मामला
शहर के कर्ता-धर्ताओं को 31 माह और 80% काम पूरा होने के बाद 13 जून को आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में यह समझ आया कि बंगाली चौराहा फ्लायओवर की डिजाइन में डिफेक्ट है। इसकी लागत करीब 30 करोड़ है। 25 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। पहले ब्रिज का काम माधवराव सिंधिया की प्रतिमा की शिफ्टिंग की वजह से पांच माह तक रुका रहा और अब डिजाइन के डिफेक्ट को लेकर आई आपत्तियों के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने रुकवा दिया है।

डिफेक्ट है क्या?
ऑर्किटेक्ट अतुल सेठ की मानते तो जिस जगह प्रतिमा थी, वहां पिलर बनाए तो दोनों लेन में ट्रैफिक 50-50 फीट में चलेगा। यानी ट्रैफिक वैसे ही फंसता रहेगा। पिलर नहीं बनाए तो 90 से 100 फीट एक लेन में मिलेगी।

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