आईआरडीए का बीमा कंपनियों और अस्पतालों को निर्देश:मेडिक्लेम की राशि अटकने के एक हजार मामले इंदौर उपभोक्ता फोरम में लंबित

इंदौर6 महीने पहले
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  • कैशलेस सुविधा है तो उसका पूरा लाभ पॉलिसी होल्डर को मिले

मेडिक्लेम कंपनियां बिल का 40 प्रतिशत तक काट रहीं और अस्पताल कैशलेस सुविधा में भी एडवांस राशि जमा करा रहे। इंश्योरेंस कंपनियां मरीज का उपचार होने के बाद रिएमबर्समेंट के बतौर महीनों तक राशि रिफंड नहीं कर रही हैं। ऐसे एक हजार से ज्यादा मामले इंदौर के जिला उपभोक्ता फोरम में लंबित हैं।

एडवोकेट लोकेश मेहता के मुताबिक, ऐसे मामलों की शिकायतों के बाद भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए इंश्योरेंस कंपनियों और उनसे संबद्ध अस्पतालों को कहा है कि यदि पॉलिसी होल्डर ने कैशलेस बीमा की सुविधा ले रखी है तो उसका लाभ अवश्य दें। ऐसे हॉस्पिटल जिन्होंने सर्विस लेवल एग्रीमेंट किया है, वे सामान्य और स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा की शर्तों का पालन करें। टीपीए भी इन सेवाओं और शर्तों का ध्यान रखते हुए सुविधा जल्द से जल्द दे। प्रदेश के खनिज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भास्कर की खबरों का हवाला देते हुए शिकायत की थी।

हॉस्पिटल नेटवर्क में नहीं, क्लेम देने से किया इनकार
सीए अनुराग बंसल ने बताया कि मेरे भाई रोहित बंसल को कोविड पॉजिटिव होने पर चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इसकी जानकारी स्टार हेल्थ कंपनी को भी दी थी। 14 दिन का 3 लाख रुपए बिल बना। बाद में कंपनी ने यह बोलकर क्लेम देने से मना कर दिया की चोइथराम हॉस्पिटल हमारे नेटवर्क लिस्ट में नहीं है। रोहित जितने दिन भर्ती रहे, कंपनी के अधिकारी ने हॉस्पिटल से फॉलोअप भी लिया था।

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